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दाग तो धुल गया पर कसक बाकी रह गई

दाग तो धुल गया पर कसक बाकी रह गई
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$img_titleनई दिल्ली।
बोफोर्स कांड का जिन्न इस दफा बोतल से मानों बच्चन परिवार के दामन पर ढ़ाई दशक से चिपके दागों को साफ करने के लिए निकला। मामले की जांच करने वाले स्वीडिश पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्राम ने अमिताभ बच्चन को बोफोर्स दलाली मामले में न सिर्फ क्लीन चिट दी, बल्कि फिल्मी परदे के महानायक को फंसाने की भारतीय अधिकारियों की साजिश पर से भी परदा उठा दिया। नई जानकारी केबाद पहले तो बिग बी ने ब्लॉग के जरिये अपने मनोभाव प्रगट किए और फिर शाम को मुंबई में मीडिया से खुद रूबरू भी हुए। माथे पर लगे कलंक के हटने से कुछ खुश और कुछ भावुक बिग बी ने शिकवा किया कि अगर उन्हें सच पहले से पता था तो उन्होंने 25 साल क्यों लगाए?


अमिताभ ने शाम को बाकायदा प्रेसवार्ता कर सच्चाई सामने आने पर खुशी जताई। साथ ही जोड़ा कि मुझे खेद एक ही बात का है कि 25 सालों तक हमें इस बदनामी और बेइच्जती के साथ रहना पड़ा। तब हम जवान थे। लड़े और सह लिया। लेकिन मां और बाबू जी के लिए दुख होता है। उनके मन में एक क्लेश था। उनके जीते-जी हम सफाई नहीं दे पाए। वैसे हमने खुद को निर्दोष तो बताया, लेकिन आज वे जीवित होते तो बहुत खुश होते। यह बोलते हुए बिग बी बेहद भावुक हो उठे और कहा कि अब इसकी क्या भरपाई हो सकती है, जो जीवन बीत गया वह तो वापस नहीं लौट सकता।

मीडिया के सवालों के जवाब में ही अमिताभ ने बयां किया कि उस समय बदनामी होती थी, तरह-तरह की गालियां पड़ती थीं। यहां तक कि बाबू जी ने एक दिन बुलाया और पूछा कि कोई गलत काम तो नहीं किया? तब मुझे लगा यह बेहद गंभीर मामला है और यह लांछन हटाने के लिए लड़ना चाहिए। तब हमने विलायत में जाकर मुकदमा लड़ा और हमने सारे तथ्य रखे और मुकदमा जीते। परिवार का शुक्रगुजार हूं जो हमेशा मेरे साथ रहा, जबकि पूरी दुनिया हमारी बात पर विश्वास नहीं कर रही थी।

यह पूछने पर कि आपको क्या लगता है कि किसने उनका नाम इस मामले में डाला? किसी भी राजनीतिक विवाद से बचते हुए अमिताभ ने कहा कि इस पर क्या कहूं, जिसने बताया या किया वह जाने और 25 साल क्यों लगे यह भी वही जान सकते हैं? उन्होंने बोफोर्स की वजह से सांसद पद से इस्तीफा देने की बात भी नकारी।

'मुझ पर बोफोर्स कांड में अमिताभ का नाम डालने के लिए दबाव डाला गया था। जब मैंने बात नहीं मानी तो दूसरे अखबार में खबर प्लांट कराई गई'

चित्रा सुब्रमण्यम

'तथ्य और सच की जीत का समय। जब तूफान अपने चरम पर हो तो उससे लड़ना मूर्खता ही होगी।'

अमिताभ बच्चन

'जो दर्दनाक लम्हे बीत चुके हैं, उनकी भरपाई अब नहीं हो सकती, लेकिन सच्चाई सामने आई यह राहत की बात है।'

जया बच्चन

Updated : 2012-04-26T05:30:00+05:30
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