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हिंदू धर्म केवल एक 'तकनीकी शब्द :आयकर ट्रिब्यूनल

हिंदू धर्म केवल एक तकनीकी शब्द :आयकर ट्रिब्यूनल


नागपुर ;
नागपुर की आयकर ट्रिब्यूनल ने हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं को चैरिटी इन्स्टिटूशन के सेक्शन 80 (जी) के तहत मिलने वाले लाभ को देने से इंकार कर दिया है। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के अनुसार हिंदू धर्म केवल एक 'तकनीकी शब्द' (टेक्नीकल टर्म) है इसी वजह से सरकार हिंदू धर्म को वो लाभ नहीं दे पा रही जो ईसाइयत और इस्लाम धर्मों को मुहैया कराया जा रहा है! नागपुर के शिव मंदिर देवस्थान पंच समिति संस्थान द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने यह हिंदू विरोधी आदेश बीते ११ नवम्बर को नागपुर में दिया।आयकर विभाग के अनुसार, शिव मंदिर देवस्थान पंच समिति संस्थान ने 'धार्मिक गतिविधियों' और मंदिरों के रखरखाव पर पैसे खर्च करती है। बता दें कि कानून का कहता है कि जो कोई भी चंदा एक एकत्रित करता है तो उसे कर में छूट मिलने का अधिकार प्राप्त है- दूसरे शब्दों में कहे तो, व्यक्ति की कर योग्य आय कम हो तो- अगर केवल संस्था चंदा प्राप्त ' परोपकारी गतिविधियों’ (चैरिटेबल क्रियाकलापों) में है, और किसी विशेष धर्म, समुदाय या जाति के लाभ के लिए काम न कर रही हो।विभाग ने यह भी कहा कि ट्रस्ट "धार्मिक प्रयोजन” के लिए कुल आय का 5% से अधिक खर्च करती है। चंदा देने वालों को कर में छूट का लाभ ऐसी कई संस्थाओं के लिए अक्सर लाइफ लाइन का काम करता है ।ऐसे में देवस्थान समिति का ट्रिब्यूनल में जाना स्वाभाविक है। समिति के तर्क बहुत ही सरल थे: जाति या धर्म के विभिन्नताओं को दरकिनार करते हुए,मंदिर सभी लोगों के लिए खुला है, यही नहीं जो लोग देवी देवताओं में विश्वास नहीं रखते हैं मंदिर में वे प्रवेश कर सकते हैं, और मंदिर किसी विशेष धर्म से संबंधित नहीं है।लेकिन कर अधिकारियों ने मंदिर की बाहरी वस्तु खंड की ओर इशारा करते हुए स्पष्ट कहा है कि निर्धारिती (कर निर्धारिती) की गतिविधियां प्रकृति में धार्मिक है। अधिनियम विभिन्न गतिविधियों का वर्णन करता है।



Updated : 2012-11-15T05:30:00+05:30
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