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दियों से होता है कम प्रदूषण

दियों से होता है कम प्रदूषण
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भारतीय परंपरा में त्योहारों पर दिए जलाने की परंपरा है। हिन्दू घरों एवं मंदिरों में प्रार्थना और आरती के दौरान जलने वाले घी और खाद्य तेल के दीपकों से प्रदूषण कम होकर वातावरण में शुद्धता आती है। आज दिवाली पर अगर आप सरसों के तेल के दीये जलाकर त्योहार मनाएंगे तो वातावरण में प्रदूषण कम होगा। यह कहना है केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों का। जो हवन के दौरान वातावरण में फैलने वाले धुएं को वातावरण शुद्धिकरण का कारक मानता हैं। इस संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक (प्रभारी वायु प्रयोगशाला एवं विश्लेषक) डॉ. दीपांकर साहा कहना है कि प्राकृतिक तैलीय पदार्थ को जलाने से वह हवा में धूल के कणों को अपने से चिपका लेता है। जिससे वायुमंडल में धूल के कणों में कमी होती है। जिसके कारण वातावरण शुद्ध रहता है। उन्होंने बताया कि हिन्दू परिवारों में वैदिक रीति से परिवार की मंगल कामना के लिए हवन और व्यापक यज्ञ किए जाते हैं। वास्तव में हवन सामग्री में मिक्स किए गए घी और देसी घी की आहुति से जो ज्वलनशील पदार्थ हवा में शामिल होते हैं, वह भी वातावरण को शुद्ध करने का ही काम करते हैं, क्योंकि उनमें मौजूद प्राकृतिक तैलीय पदार्थ धूल के कणों को अपने से चिपकाकर हवा में मौजूद महीन धूल के कणों से बनी धुंध को छांटने का काम करता है। इसलिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यही सलाह है कि इस दिवाली लोग तेल के दीये जलाएं ।



Updated : 2012-11-12T05:30:00+05:30
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