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भ्रष्टाचार के खेल पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष की चोट

भ्रष्टाचार के खेल पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष की चोट

एमवीडीए के निर्माण कार्यो की गुणवत्ता को परखने के लिए पहुंचे मोक्षधाम

मथुरा। निजाम बदल गया लेकिन सरकारी विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की मानसिकता नहीं बदली है। मथुरा में होने वाले विकास कार्यो की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग ब्रज तीर्थ विकास परिषद कर रहा है। इसके बाद भी ठेकेदार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे ही एक निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता के खुलासे के बाद कार्य पर रोक लगा दी है। मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए गुरूवार को टीम भी वृंदावन पहुंची।

वृंदावन के परिक्रमा मार्ग में लगभग 1.50 करोड़ की लागत से मोक्षधाम की बाउंड्रीवॉल, टीन शेड, विश्राम के लिए हॉल आदि का निर्माण मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा कराया जा रहा है। इस कार्य को गाजियाबाद के ठेकेदार करा रहे है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा को इस कार्य में बेहद घटिया गुणवत्ता की सामग्री लगाए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थी। इस पर वो अचानक कार्य स्थल पर पहुंच गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य में जो ईंटे, सीमेंट और बजरी लगाई जा रही थी वो बेहद घटिया स्तर की थी।

हाल ये था कि हाथ लगाते ही दीवार भरभराकर गिर गई। इस पर उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए तत्काल कार्य को रूकवा दिया और इसकी शिकायत शासन स्तर पर कर दी। इस मामले में गुरूवार को आवास विकास के अभियंता राजीव गुप्ता तकनीकि टीम के साथ कार्य स्थल पर पहुंचे और यहां से सामग्री के सैंपल व अन्य जांच की। हालांकि उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।

इधर विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता अजीत प्रताप सिंह ने भी मामले का संज्ञान लेकर निर्माण को तुड़वा दिया और सभी निर्माण सामग्री का सैंपल लेकर जांच को भेज दिया है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य रूकवा दिया है।

ठेकेदारों और अफ सरों को दी थी चेतावनी

ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा भ्रष्टाचार को लेकर बेहद सख्त है। उन्होंने सभी ठेकेदारों और अफसरों की बैठक बुलाकर सख्त हिदायत दी थी कि वो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न करें। इस पर किसी भी शिकायत पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी। इससे पहले भी जवाहर बाग के सौंदर्यीकरण में भी घटिया निर्माण सामग्री का खुलासा हुआ था जिस पर निर्माण एजेंसी को बदलने का निर्णय शासन ने लिया था।

Naveen ( 1696 )

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