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बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठी कान्हा की नगरी

बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठी कान्हा की नगरी

कांवडिय़ों नेे शिवालयों में किया अभिषेक

मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बम-बम भोले एवं जयशिव शंकर की गंूज के बीच शिव भक्तों की टोली अपने आराध्य का पूजन-अर्चन एवं अभिषेक करने के लिए प्रात:काल से ही शिव मंदिरों की ओर निकल पड़ी। सुबह से ही देवालयों में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।

शहर के रंगेश्वर, भूतेश्वर, पिपलेश्वर, गोकर्णनाथ, वृंदावन के गोपेश्वर, नीलकंठ, गर्तेश्वर, नंदगांव के आसेश्वर, महावन के चिंताहरण, अत्यंत प्राचीन, प्रसिद्ध एवं चमत्कारी माने जाते हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में पारद के शिव भी कल्याणकारी हैं। गंगा से कांवड़ लेकर आए कांवडिय़ों ने शुक्रवार को प्रभु धाम के रंगेश्वर, भूतेश्वर, गोकर्णनाथ आदि मंदिरों में जल चढ़ाया। प्रमुख मंदिरों में खूब भीड़ रही। दोपहर तक जलाभिषेक का दौर चला और सांध्य बेला में सेवायतों ने मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया-संवारा। इस अवसर पर हजारों ब्रजवासियों ने भी अपने पास के मंदिरों में पहुंचकर दर्शन, परिक्रमा, ध्यान, भोग अर्पण करके पुण्य कमाया। भक्तों द्वारा बेलपत्र, फल, फूल आदि के साथ शिव प्रतिमाओं का जलाभिषेक किया गया।

कांवडिय़ों ने गंगाजल से शिव प्रतिमाओं का जलाभिषेक किया। भगवान शिव के भक्तों ने पूरे मनोयोग से महादेवजी का पूजन किया। महिला-पुरूषों ने व्रत धारण कर शिव उपासना की। नवविवाहित महिलाओं तथा पुत्ररत्न प्राप्त करने वाली माताओं ने शिव मंदिरों में जेहर चढ़ायीं। सुबह से लेकर देर रात्रि तक बम-बम भोले के जयकारों से शहर गूंजता रहा। सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख शिव मंदिरों पर पुलिस बल तैनात रहा।


वहीं वृन्दावन के सुप्रसिद्ध प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में कई राज्यों के भक्तों ने यमुना स्नान करने के साथ ही यमुना जल से भगवान शिव का अभिषेक करने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। भोर होते ही राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा एवं उत्तरप्रदेश के भक्तजन बड़ी संख्या में टोलियां बनाकर प्रभु शिव की आराधना से पूर्व यमुना के तट पहुॅचे। यहां भक्तिभाव के साथ भक्तों ने यमुना में स्नान कर प्लास्टिक, कांच, धातुओं के बर्तनों एवं बोतलों में यमुना जल भरकर ब्रज के पांच प्रमुख शिवालयों पर यमुना जलाभिषेक करने के संकल्प के साथ धर्म परंपरा की शुरूआत की। सर्वप्रथम भक्तों ने नगर के गोपेश्वर मंदिर में यमुना जल से अपने आराध्य देव भगवान शिव को अभिषेक किया। इस दौरान मंदिर हर-हर महादेव जयशिव शंकर जय भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। कई स्थानों पर महाशिवरात्रि का पर्व कल (आज) भी मनाया जायेगा।

Naveen ( 1696 )

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