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सीएम योगी बोले - पाक, भूटान, नेपाल और म्यांमार में भी गोरखनाथ की मान्यता

सीएम योगी बोले - पाक, भूटान, नेपाल और म्यांमार में भी गोरखनाथ की मान्यता

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वृहत्तर भारत में महायोगी गोरखनाथ के प्रति अपार आस्था है। उन्हें लोग साक्षात शिव स्वरूप के रूप में मानते हैं। वह उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में गुरुवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' की मौजूदगी में 'युग परिवर्तक महायोगी गोरखनाथ' विषयक त्रिदिवसीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि गुरु गोरखनाथ की मान्यता भारत के साथ पाकिस्तान, भूटान, नेपाल तथा म्यांमार में है। वहां की काफी लोकगाथाओं में हैं। उनकी उपस्थिति इतिहास और साहित्य की दृष्टि में अलग-अलग कालखंड में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में पांच वर्ष पहले पाकिस्तान के नम्बर से फोन आता था। मैं फोन काट देता था। इसके बाद फिर सिंगापुर से एक सिख परिवार आया था। तब उन्होंने बताया कि पाकिस्तान गया था। जब मैं वहां गया तब पेशावर के पास पहाड़ी पर यात्रा चल रही थी। तब अचरज हुआ। तब मैं कॉल कर रहा था। वहां भी गोरखनाथ से जुड़ाव पाकिस्तान में भी हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल गोरखनाथ की आस्था का एक बड़ा केन्द्र है। काठमांडू में आज भी मत्स्येन्द्रनाथ की पूजा होती है। मृगस्थली नेपाल में गोरक्षनाथ जी का मन्दिर है। वहां पर रोज पूजा होती है। नेपाल में तीन कालखंड में उनकी उपस्थिति रही है। काठमाण्डु में मृगस्थली में एक समय राजा बौद्ध हो गए थे। तब गोरखनाथ खुद नेपाल गए। मान्यता है राजा ने उनकी भी उपेक्षा की। तब गुरु गोरखनाथ ने वहां मेघों को बांध दिया था। नेपाल में तब 12 वर्ष बारिश नहीं हुई थी। तब राजा ने माफी मांगी। आज तक इसको लेकर वहां हर वर्ष बड़ा आयोजन होता है।

गोरक्षनाथ जी ने देवीपाटन पाटेश्वरी मन्दिर की स्थापना की थी। देवीपाटन में नाथ सम्प्रदाय का मंदिर है। यहां आज भी नेपाल से वासन्तिक नवरात्र में नेपाल से हजारों श्रद्धालु आते हैं। नेपाल के दान से यह जुड़ाव है। 10वीं शताब्दी में नवीन नेपाल की स्थापना गुरु गोरखनाथ ने की थी। उनके नाम से मुद्रा अभी भी गुरु जी के नाम से हैं। बंगाल, उड़ीसा, त्रिपुरा में बड़ी आबादी नाथ सम्प्रदाय से जुड़ी हुई है। भारत में ऐसा कोई प्रांत नहीं है, जहां गोरखनाथ की स्वीकारोक्ति ना हो। त्रिपुरा में 35 प्रतिशत व असम की 15 प्रतिशत आबादी गोरखनाथ की अनुयायी है। सम्पूर्ण देश में नाथ परम्परा के मठ व संत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में जब सन्त ज्ञानेश्वर ने ज्ञानेश्वरी लिखी थी। जब उनसे पूछा गया ज्ञान कहां से मिला है। तो उन्होंने बताया कि उनको नाथ परम्परा से यह ज्ञान मिला था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयटम्बूर में मेरे सम्प्रदाय से जुड़े लोग आए थे। मैं मिलने गया। सब लोग नाथ सम्प्रदाय से जुड़े थे। वहां भी लाखों की संख्या में वहां भी अनुयायी थे। आप जिसे परिजात कहते हैं उसका एक नाम गोरख इमली भी है। मैं एक वैद्य से चर्चा कर रहा था। उन्होंने बताया कि किसी भी औषिधि का अर्क होता है। अर्क की एक पद्धिति है। गोरख इमली भी उससे जुड़ी है। एक पक्ष योग भी है।

महर्षि पतंजलि ने योग का दर्शन दिया था। मगर गुरु गोरखनाथ को उसको शुद्धि के रूप में सभी के लिए जरूरी बताया था। उन्होंने इस प्रक्रिया के बारे में बताया था कि इसके सात आयाम हैं। योग के उच्च सोपान तक पहुंचने के लिए उन्होंने आयाम बनाया था। शरीर के सात साधन है। पहला शोधन, जिसमें षट्कर्म होते हैं। दृढ़ता दूसरा जिसमें आसन का अभ्यास। स्थिर ता के लिए प्राणायाम, धैर्य। यही क्रियाएं अहम हैं। शरीर के चन्द्र और सूर्य के बीच समन्वय ही हठयोग है। गोरखनाथ कहते हैं कि मन की चंचल वृत्तयों को काबू करना मुश्किल है। इसी कारण आप प्राणों को साधकर प्राणायाम करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मलिक मोहम्मद जायसी ने भी अपने यहां गोरखनाथ का मंदिर बनाया था। उनका दृष्टिकोण राष्ट्र प्रेम का रहा है। उनका कोई साम्प्रदायिक दृष्टिकोण नहीं है। जाति व भाषा का बंधन नहीं है। हर भाषा में उनका साहित्य मिलेगा। उनका साहित्य भरा पड़ा है। इसको संकलित करने की आवश्यकता है। हर एक स्तर पर आपको उनकी विद्यमानता देखने को मिलती है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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