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विश्व स्वास्थ्य दिवस 2019 : इस बार की यह है थीम, जानें

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2019 : इस बार की यह है थीम, जानें

नई दिल्ली। विश्व में 7 अप्रैल को हर साल वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है। विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 193 सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इसका मकसद दुनिया में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं तक ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना है। 7 अप्रैल 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी। इसके दो साल बाद 1950 से हर वर्ष स्वास्थ्य दिवस मनाया जाने लगा। दिवस का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस बार वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम एवरीवन, एवरीवेयर हेल्थ फॉर ऑल रखा गया है। इसका मतलब हर व्यक्ति को हर जगह हेल्थ केयर मिले।

डब्ल्यूएचओ हर साल स्वास्थ्य दिवस पर एक थीम निर्धारित करता है। पिछले साल अवसाद की समस्या से संबंधित थीम रखी गई थी। इस साल स्वास्थ्य दिवस पर यूनिवर्सल थीम हेल्थ कवरेज : एवरीवन, एवरीवेयर रखा गया है। यानि की सभी वर्ग के लोगों को बिना किसी वित्तीय कठिनाई के बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले।

हम आपको बता दें कि 7 अप्रैल 1948 के दिन संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अन्य सहयोगी और संबद्ध संस्था के रूप में दुनिया के 193 देशों ने मिल कर स्विट्जरलैंड के जेनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन की नींव रखी थी। उसी साल डब्ल्यूएचओ की पहली विश्व स्वास्थ्य सभा हुई, जिसमें 7 अप्रैल, से हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का फैसला लिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाना है। हर इनसान का स्वास्थ्य अच्छा हो और बीमार होने पर हर व्यक्ति को अच्छे इलाज की सुविधा मिल सके। दुनियाभर में पोलियो, रक्ताल्पता, नेत्रहीनता, कुष्ठ, टीबी मलेरिया और एड्स जैसी भयानक बीमारियों की रोकथाम हो सके और मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा मिल सके, और इन समाज को बीमारियों के प्रति जागरूक बनाया जाए और उनको स्वस्थ वातावरण बना कर स्वस्थ रहना सिखाया जाए।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार तीन वर्ष की अवस्था वाले 3.88 प्रतिशत बच्चों का विकास अपनी उम्र के हिसाब से नहीं हो सका है और 46 प्रतिशत बच्चे अपनी अवस्था की तुलना में कम वजन के हैं जबकि 79.2 प्रतिशत बच्चे एनीमिया रक्ताल्पता से पीडि़त हैं। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 50 से 58 प्रतिशत बढ़ा है। कहा जाता है कि बेहतर स्वास्थ्य से आयु बढ़ती है। इंडिया हेल्थ रिपोर्ट 2010 के मुताबिक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सेवाएं अभी भी पूरी तरह से मुफ्त नहीं हैं और जो हैं उनकी हालत अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की काफी कमी है। अस्पतालों में बिस्तर की उपलब्धता भी काफी कम है। केवल 28 प्रतिशत लोग ही बेहतर साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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