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तूणीर : कितने आदमी थे!... जे पूछ रए हैं तुमरे ज्ञानी नेताजी'

तूणीर : कितने आदमी थे!... जे पूछ रए हैं तुमरे ज्ञानी नेताजी

बड़े ही मजाकिया हैं जी आपके यहाँ के विरोधी दलों के छुटभैये, घुटभैये, लुटभैये या बड़े, बहुत बड़े और सबसे बड़े नेता जी भी।

उस शेर के बच्चे छप्पन इंचिया से पूछ रहे हैं कि बताओ एयर सर्जिकल स्ट्राइक में जैश ए मोहम्मद के कितने बंदे मारे? उसका सबूत मांग रहे हैं ससुरे !!

तमाशा देखो हमारी कमर तोड़ दी आपके जब्बर लोकप्रिय नेता ने। हमारी सुरक्षा को तार तार करके पूरे विश्व में हमें चारों ओर से अकेला और नंगा करके ऐसा धर दबोचा है कि चींईईईईईईई भी नहीं निकल पा रही है हमारे मुंह से और उधर तुम्हारे घननादी थोथे चने गरज रहे हैं कि सबूत लाईये। बलिहारी है भईया, इनकी अकलमंदी और नाटकीयता पर ।

मैंने दिन में भी सपने देखे...सच में दिन में भी... मैं अकेला नहीं हूँ मेरा अजीज दोस्त विदूषक सिंह पिद्दू मेरी मदद करेगा। पर वो भी मिल गया औरों के साथ ही। हमारे घर में घुसकर हमें मानसिक रूप से भी निपटा दिया है तुम्हारे छप्पन इंचिया ने।

या खुदा मैं लुट गया, मेरे सपने अब अपने ना रहे । मेरा इस्लामाबाद में रहना भी मुहाल हुआ जा रहा है।

यहाँ मेरे वतन में रहते हुए वहाँ के छप्पन इंचिया को याद करके मेरी सांसें फूली जा रही हैं। वहाँ वह छप्पन इंचिया लगातार, बिना खौफ के चिल्ला रहा है कि अभी जो पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ है जो कि प्रैक्टिस थी। रियलिटी तो अभी बाकी है।

या अल्लाह ! जब इसकी प्रैक्टिस इतनी खतरनाक थी तो रियल कार्यवाही क्या होगी? सोच सोच कर मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं।

अब समझ में आ रहा है कि मेरी जैसी जुबान बोलने वाले, वहाँ के बाल बबुआ की नींदें भी इस छप्पन इंचिया के मारे क्यों उड़ी हुई हैं। अजी ! बाल बबुआ ही क्यों बंगाल की जिद्दी निर्ममता दिद्दी, मध्यप्रदेश में सिरीमान बंटाढार जी, कश्मीर की मोहतरमा जी, उत्तर प्रदेश के बुआ भतीजे, दिल्ली में खेसरीदाल जी और सलिल लब्बल जी, हो रहे हैं बेहाल जी .. सभी की या तो नींद उड़ रही है या मुंह सूखा हुआ है। सूझ नहीं पड़ रहा कि आएं बाएं दाएं कहाँ क्या बोले ? बोलें तो क्या बोलें ? कि मुंह ही ना खोलें? कुछ ना पूछो भईया । इनकी तो हालत खराब हो गई है।

बेचारे, वक्त के मारे ! जो 14 फरवरी के पहले अपनी सरकार बनाने की डींगें हांक रहे थे, महामिलावटी ठगबंधन के गुणगान करने में जुटे थे, ये सभी 26 फरवरी की भारतीय वायु सेना की पराक्रमी, अदम्य साहस, सूझबूझ व शूरवीरता की अद्वितीय मिसाल- सफलतम एयर स्ट्राइक के बाद स्वयं को मेरी तरह ठगा सा महसूस कर रहे हैं। चलो ! मैं तो पड़ोसी देश का प्रधानमंत्री हूँ, लुटापिटा, क्रिकेट के खेल की तरह शतक लगाने के मंसूबे से गया और शून्य पर अपनी गिल्लियां तुड़वा कर वापिस लौटा इमरान खान ही सही पर तुम तो उस छप्पन इंचिया शेर के हमवतन हो भईया! तुम्हारी क्यों दम फूल रही है। शायद तुम समझ गए हो कि अब तो तुम्हारे वतन में तुम्हारे सिर पर दस्तक दे रहे आमचुनाव में इसकी सिंह गर्जना तुम्हारी 2014 से भी बुरी गत बनाकर छोड़ेगी। पर इसके लिए अपना तमाशा तो मत बनाओ। राजनीतिक स्वार्थ लाभ के लिए अपनी सेना के मनोबल को खत्म करने, गिराने से बाज आओ मेरे भाई। हमने सेना का राजनीतिकरण करके बर्बादी के अलावा क्या पाया है जरा सोचो मेरे हमसाया मुल्क के विपक्षी नेताओ। गंभीरता से सोचो। अपने क्षुद्र स्वार्थ की पूर्ति के लिए अपने देश के विकास की संभावनाओं को पलीता मत लगाओ।

चूंकि आप सभी विपक्षी लोग कमोबेेश थोड़ी बहुत हमसे नरम दिली रखते हो इसलिए सबको मेरी नेक सलाह है भईया ! इस छप्पन इंचिया से तनिक बचकर ही रहियो। जान है तो जहान है । इसकी घनघोर ईमानदारी की बीमारी और कुछ ना कुछ करते रहने के जुनून को देखते हुए यदि तुम्हें अपने ओटाले- घोटालों को बचाना है तो इससे उलझना, पंगा लेना छोड़ दो । देखो, मैंने भी अपने लाड़ले अजहर मसूद और हाफिज सईद तथा उनके अनुयाईयों को फिलहाल सीन से यह समझाकर ही अलग कर दिया है कि कुछ करने को आगे लंबी जिंदगी पड़ी है, अभी कैसे भी बच जाओ फिर बाद की बाद में देखी जायेगी।

तो भईया विपक्षी जी ! आपके हमसाया दुश्मन मुल्क के प्रधानमंत्री .. मुझ इमरान खान की नेक सलाह मानों और आपके इस दहाड़ते हुए सिंह को हराने या इससे उलझने, इसका रास्ता काटने से बचो, आज के समय की यही सबसे बड़ी समझदारी है। नहीं तो बाद में जे नई कहियो के पहले काये नहीं बताओ हतो।

काए ! अब मुड़ी पे हाथ धर के का सोच रए हो !!

-नवल गर्ग

Naveen ( 1696 )

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