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वायनाड 'मोपलिस्तान' का सत्य, इतिहास और राहुल गांधी

वायनाड से क्या महागठबंधन में बिखराव ?

वायनाड मोपलिस्तान का सत्य, इतिहास और राहुल गांधी

नई दिल्ली/ विशेष प्रतिनिधि। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश की परंपरागत सीट अमेठी के अलावा केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। महाराष्ट्र के वद्र्धा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल के वायनाड से चुनाव लडऩे के फैसले को पलायन करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बहुसंख्यक सीट छोड़ अल्पसंख्यक मतों से जीत का सहारा ढ़ूंढने लगे हैं। इसके इतर बड़ा बयान वामपंथी दलों की ओर से आया है। इस सवाल के साथ कि क्या राहुल गांधी वामपंथी दलों को हराने के मकसद से ही वायनाड पहुंचे हैं? केरल में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल होने के नाते इस तरह की बात भी चल रही है कि कांग्रेस के इस कदम से महागंठबंधन में दरार आ गई है। सवाल यह भी है कि दक्षिण में कांग्रेस को अगर संदेश देना ही था तब क्या राहुल गांधी को कर्नाटक से चुनाव नहीं लड़ाया जा सकता था? रणनीति 20 सीटें जीतने को लेकर है। बताया जा रहा है कि वायनाड कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की सीमा पर स्थित है। कांग्रेस अध्यक्ष यहां से अगर चुनाव लड़ेंगे तो समूचे दक्षिण भारत में कांग्रेस की हवा बनेगी। कांग्रेस अगर उत्तर भारत में कमजोर है तो इसकी भरपाई वह दक्षिण भारत से कर लेना चाहती है। तभी वायनाड से कांग्रेस अध्यक्ष को उतारे जाने की रणनीति है। वायनाड के इर्द-गिर्द जिन 20 सीटों पर कांग्रेस ने अपना ध्यान लगाया है उससे वामपंथी दलों का लाल हो जाना स्वाभाविक है। इस लिहाज से महागठबंधन की राह अब और कठिन होती दिख रही है। क्या ममता बनर्जी भी कभी कांग्रेस के वामपंथी दलों के साथ बढ़ती नजदीकी के चलते उससे अलग नहीं हो गई थी?

वायनाड सीट पर अगर जातिगत समीकरण को देखा जाए तो यहां 49.48 प्रतिशत हिन्दू, 28.65 प्रतिशत मुसलिम तथा 21.34 प्रतिशत ईसाई हैं। वामपंथी उत्तर भारत में तो हाशिए पर हैं। ऐसे में केरल एक मात्र उनकी उम्मीद की किरण है जिसे कांग्रेस ढहा दे रही है। तब कांग्रेस किस मुंह से वामपंथियों के साथ गठबंधन का राग अलापेगी? वायनाड सीट से राहुल गांधी के चुनाव लडऩे पर सीपीआई नेता डी. राजा का बयान आया जरूर है पर यह उतना सख्त नहीं है जैसे कि सख्ती की चर्चा की जा रही है। अब देखना है कि केरल में आमने-सामने आकर कांग्रेस पश्चिम बंगाल में वामपंथियों के साथ क्या रूख अपनाती है?

वायनाड का सत्य, इतिहास और राहुल गांधी

लेखक एवं संगीतज्ञ डॉ. ईश्वरचंद्र करकरे ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी देते हुए बताया कि पाकिस्तान की मांग तो 1930 के बाद उठी लेकिन अखंड भारत मे केरल प्रदेश के अंतर्गत एक छोटा सा प्रान्त था जिसका नाम था 'मोपली'। सन 1921 में ही यहां इस्लामी जनसंख्या 50 प्रतिशत हो गई थी। सन 1921 में ही यहां 'मोपलिस्तान' नाम से एक अलग इस्लामी देश की मांग उठने लगी थी। इसी दौरान यहां हिंदुओं का कत्लेआम हुआ, जो आज भी जारी है। 1927 में संघ की स्थापना हुई और 1930 में हिन्दू महासभा की। इन दोनों संगठनों ने 'मोपलिस्तान' का जमकर विरोध किया। अगर विरोध न होता तो 15 अगस्त 1947 को ही कांग्रेस, मुस्लिम लीग व कम्युनिस्ट पार्टी के सहयोग से ये एक तीसरा देश खड़ा हो जाता। विशेष ध्यान देने की बात ये है कि मोपलिस्तान की राजधानी है 'वायनाड'। जहां कांग्रेसियों व कम्युनिस्टों ने चौराहे पर खुले आम गाय काटी थी। अभी हम सभी समझ सकते हैं कि हमारे जनेऊधारी, मंदिर में जाने वाले, तिलक चंदन लगाने वाले, पूजा करने वाले, अपना गोत्र बताने वाले तथा स्वयं को हिन्दू ब्राहम्ण बताने वाले अब वहां से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं।








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