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क्या हिन्दुओं से माफी मांगेंगे दिग्विजय सिंह?

क्या हिन्दुओं से माफी मांगेंगे दिग्विजय सिंह?

नई दिल्ली। हिन्दुओं पर अगर किसी ने सबसे ज्यादा आरोप लगाए हैं तो वे हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह। समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद और प्रज्ञा ठाकुर निर्दोष करार दिए गए हैं। उनके खिलाफ ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे कहा जाए कि वे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे। लेकिन अपुष्ट और मिथ्या तथ्यों के आधार पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इन निर्दाेषों को जिन शब्दों से नवाजा, वह शर्मसार है। दिग्विजय सिंह ने क्या-क्या नहीं कहा? हिन्दू आतंकवाद के सरगना। उनके सहयोगी तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने तो मर्यादा ही पार कर दी थी। तभी केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस को उनकी कथनी और करनी की याद दिलाते हुए माफी मांगने की नसीहत दी है। 2014 तक कांग्रेस हिन्दुओं को पानी पी-पीकर कोसती रही थी लेकिन 2014 के आम चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ राष्ट्रवादी सरकार क्या बनी उसके नेताओं को हिन्दुओं की अहमियत समझ में आने लगी है। तभी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित उसके सभी बड़े नेता मंदिरों व धर्मस्थलों में शरणागत हैं। कांग्रेस की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा गंगा यात्रा, अयोध्या यात्रा करने को मजबूर हुई हैं। खुद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कोसने वाले दिग्विजय सिंह अब मंदिरों में मठों में हवन करते-कराते देखे जा रहे हैं। लानत है ऐसे झूठ व अवसरवादिता पर।

अरूण जेटली की चेतावनी व हिन्दुओं से माफी मांगने की मांग पर उठे सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह मानो अपनी कथनी को भूल गए। और उल्टे सवाल करते दिखाई दे रहे हैं कि किस कांग्रेसी नेता ने हिन्दुओं पर आतंकवादी होने का आरोप लगाए? कई चैनलों ने दिग्विजय सिंह के 2014 के पहले के बोलों को उजागर किया। चैनलों ने उनके जहरीले बयानों को जब पब्लिक डोमेन में लाया तो वे मध्य प्रदेश के झाबुआ में बोलते दिख रहे हैं। वे संघ कार्यकर्ताओं पर मिथ्या आरोप गढ़ते दिख रहे हैं। हिन्दू आतंकवाद की नई परिभाषा गढ़ते दिख रहे हैं। दिग्विजय सिंह अपनी कथनी से पलट सकते हैं लेकिन कैमरे नहीं। दिग्विजय सिंह अभी भी कैमरों में कैद हैं। हां ये अलग बात है कि दिग्विजय सिंह सरीके कांग्रेसी नेताओं का मुसलमान वोटों से काम नहीं चला तो मंदिरों की तरफ रूख कर लिए।

कांग्रेस समाज में दीवार खड़ा करने का काम कर रही है। हिन्दुओं और मुसलमानों को आपस में लड़ाने का काम कर रही है। गरीबी हटाने के नाम पर गरीबी की परिभाषा गढ़ रही है। पर देश के गरीबों नहीं मालूम कि गरीबियत का क्या मानदंड उसने बनाया है? गरीबी हटाने का नारा 1971 से सुना और देखा जा रहा है पर गरीबी नहीं हटी। हां, गरीबों को ही हटाने का काम जरूर समझ में आ रहा था तभी गरीबों ने कांग्रेस को हटा दिया। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया है कि आप कांग्रेस को हटा दीजिए गरीबी खुद हट जाएगी।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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