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...जब लोकबंधु राजनारायण ने इंदिरा गांधी को दिया था 'हार' का पहला दर्द

...जब लोकबंधु राजनारायण ने इंदिरा गांधी को दिया था

लखनऊ। अपने राजनैतिक जीवन में इंदिरा गांधी लाेकसभा चुनाव में सिर्फ एक बार हारीं वह भी अपने गढ़ से। उन्हें कांग्रेस की परम्परागत सीट रायबरेली से वर्ष 1977 के चुनाव में पहली बार हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय लाेकदल के प्रत्याशी लोकबंधु राजनारायण ने उन्हें 55,202 मताें से हराया था। इस हार के बाद इंदिरा गांधी ने फिर कभी रायबरेली से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई।

पहली बार प्रधानमंत्री को पक्ष रखने के लिए जाना पड़ा अदालत

राजनारायण और इंदिरा गांधी का पहली बार 1971 के चुनाव में इसी रायबरेली में मुकाबला हुआ था। तब संयुक्त साेशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजनारायण काे भराेसा था कि वे जीतेंगे लेकिन जब रिजल्ट निकला ताे इंदिरा गांधी ने एक लाख से ज्यादा मताें से राजनारायण काे हरा दिया था। इसके बाद चुनाव में धांधली का आराेप लगाते हुए राजनारायण अदालत पहुंच गए। लंबा मामला चला। इस मसले की खासियत यह थी कि पहली बार देश की प्रधानमंत्री काे अपना पक्ष रखने के लिए इलाहाबाद हाइकाेर्ट में जाना पड़ा था।

न्यायमूर्ति जगमाेहन ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाया और 1971 के उनके चुनाव काे रद्द कर दिया। साथ ही उनके छह साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन 'आपातकाल' की घोषणा कर दी। इस तरह 21 मार्च 1977 तक 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। हालांकि मार्च 1977 में सत्ता से बाहर हाेने के एक साल के भीतर इंदिरा गांधी चिकमंगलूर सीट से उपचुनाव जीतकर फिर सांसद बन गईं।

आपातकाल के बाद देश भर में थी इंदिरा गांधी के खिलाफ लहर

उस समय इंदिरा गांधी काे दुनिया की ताकतवर राजनीतिक हस्तियाें में माना जाता था। लोकतंत्री सेनानी जागेश्वर प्रसाद ने 'हिन्दुस्थान समाचार' को बताया कि 1977 के चुनाव में देशभर में ​इंदिरा गांधी के खिलाफ लहर थी। आपातकाल के बाद जब देश में लाेकसभा चुनाव हुआ, ताे कांग्रेस काे बुरी हार का सामना करना पड़ा। इंदिरा गांधी के साथ-साथ उनके बेटे संजय गांधी भी चुनाव हार गये थे। 1977 में इंदिरा गांधी चुनाव कराने के लिए तैयार नहीं थीं लेकिन उन्हें खुफिया हवाले से जानकारी दी गई कि अगर इस समय चुनाव कराये जाएं ताे कांग्रेस 340 सीटें जीत सकती है लेकिन हुआ इसका उलटा। आपातकाल से जनता नाराज थी, विपक्ष एक होकर जनता पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़ रहा था। जयप्रकाश नारायण ने सभी काे एकजुट किया था। इसका नतीजा यह हुआ कि रायबरेली से चुनाव लड़ने पर भारतीय लाेकदल के प्रत्याशी लोकबंधु राजनारायण ने इंदिरा गांधी को 55,202 मताें से हराकर उन्हें पहली 'हार' का दर्द दे दिया।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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