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...जब फूलन ने संसद पहुंचकर बिंद समाज को नए 'वोटबैंक' के रूप में उभारा

-मुलायम सिंह यादव ने सियासी प्रयोग में दस्यु सुंदरी फूलन को पहुंचाया था संसद

...जब फूलन ने संसद पहुंचकर बिंद समाज को नए

भदोही। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दस्यु सुंदरी फूलन देवी यानी बैंडिट क्वीन एक प्रयोग थी। यह प्रयोग समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने 1996 में किया था। उन्होंने 11 साल जेल में बगैर मुकदमे के रहने के बाद जेल से रिहा कर फूलन देवी को मिर्जापुर-भदोही संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। मुलायम सिंह का यह प्रयोग बेहद सफल रहा और फूलन देवी भाजपा के वर्तमान सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को पराजित कर संसद पहुंची। हाल ही में फूलन देवी की मां मूला देवी की तरफ से चंबल के विकास के लिए दिया गया मेनिफेस्टों मीडिया में सुर्खियां बना। भदोही शहर के पकरी चौराहे पर धूल फांकती फूलन की प्रतिमा आज भी उनकी याद दिलाती है।

बीबीसी रेडियो ने फूलन के चुनाव को किया था कवर

दस्यु सुंदरी का उस दौर में मिर्जापुर-भदोही क्षेत्र में जलवा था। चुनावों के दौरान उन्हें कवर करने बीबीसी की टीम उनके साथ चल रही थी क्योंकि फूलन के साथ दस्यु जीवन का ग्लैमर था। फूलन की एक झलक पाने को भीड़ उमड़ती थी। लोग देखना चाहते थे कि एक मामूली सी औरत ने बंदूक कैसे उठा लिया। गांवों में फूलन के आने की सूचना भर से काफी संख्या में लोग जुट जाते थे। मिर्जापुर-भदोही सीट से वह भाजपा उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह मस्त को दो बार ग्यारहवीं और तेरहवीं लोक सभा के चुनाव में पराजित कर सांसद बनी। हालांकि बाद में वीरेंद्र सिंह ने उन्हें सियासी पटखनी दी। देश के राजनीतिक इतिहास में संभवतः यह पहली घटना थी जब कोई दस्यु सुंदरी राजनेता बनकर संसद में पहुंची थी। फूलन देवी 1981 में तब दुनिया भर में चर्चा में आईं थीं जब बेहमई कांड में उन पर ठाकुर जाति के 22 लोगों की हत्या का आरोप लगा।

राजनीति में मुलायम का नया प्रयोग थीं फूलन

यूपी में जातीय राजनीति के भीष्म पितामह मुलायम सिंह यादव को वह पिता कहकर बुलाती थी। फूलन को 11 साल तक जेल में बगैर मुकदमा चलाए रखा गया था। बाद में यूपी की मुलायम सिंह सरकार ने उन्हें जेल से बाहर निकाल मिर्जापुर-भदोही से चुनाव लड़ाया।मुलायम सिंह का यूपी की सियासी पिच पर यह अहम दांव था क्योंकि उस दौरान काफी संख्या में दलित फूलन के पक्ष में लामबंद हो रहे थे। मुलायम की इस चाल से जहां दलित कट गए वहीं बिंद, मल्लाह और निषाद जाति के लोग मुलायम के पाले में आ गए। फूलन ने जातीय सेना का गठन किया था, जिसके चलते सियासतदारों के लिए खतरा महसूस हो रहा था। अगर फूलन जिंदा होती तो राजनीति में वह अपनी अलग पैठ बना कर बिंद, मल्लाह और निषाद समाज को एकजुट कर उसकी नेता बन जाती।

भदोही में स्थापित है फूलन की प्रतिमा

बीहड़ की जिंदगी के दौरान फूलन को पकड़ने में यूपी और एमपी की सरकारें नाकाम हो गईं थीं। इसके बाद 1983 में इंदिरा गांधी की सरकार ने फूलन से सशर्त समझौता किया कि सरकार उन्हें मृत्युदंड नहीं देगी और उनके साथ उनके परिवार को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसके बाद फूलन देवी ने बीहड़ की जिंदगी त्याग कर अपने दस हजार समर्थकों के साथ दस्यु जिंदगी को हमेशा के लिए अलविदा कहा। इसके बाद फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने फूलन के दस्यु जीवन पर बैंडिट क्वीन फिल्म बनाई जो अपने दौर की बेहद चर्चित फिल्म थी। आखिर शेर सिंह राणा नामक व्यक्ति ने 25 जुलाई सन 2001 को दिल्ली में उनके आवास पर गोली मारकर सांसद रहते हुए फूलन की हत्या कर दी।

भदोही शहर के पकरी तिराहे पर आज भी फूलन देवी की प्रतिमा लगी है जिसे देखकर लोगों की यादें ताजा हो जाती हैं कि बीहड़ की सुंदरी फूलन देवी कभी यहां से सांसद थीं। मिर्जापुर-भदोही की राजनीति के इतिहास में आज भी वह जिंदा है। दलित, पिछड़े समाज के लोगों में उन्हें याद किया जाता है। यही वजह है कि भदोही में तभी से बिंद, मल्लाह और निषाद जातियों का नया समीकरण उभरा है। फूलन देवी की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में रामरती बिंद को सांसद चुना गया। यही कारण है कि बिंद जाति के लोग राजनैतिक दलों की पहली पसंद बन गए हैं। यही वजह है कि भाजपा ने इस बार भी रमेश बिंद को भदोही से चुनाव मैदान में उतारा है। इसके पूर्व सपा छोटे लाल बिंद को चुनाव मैदान में उतार चुकी है।

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Swadesh Digital ( 8810 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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