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शाह की डिनर डिप्लोमेसी

शाह की डिनर डिप्लोमेसी

नई दिल्ली। एक्जिट पोल के नतीजों ने राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा उलटफेर करके रख दिया। एनडीए, यूपीए और तीसरे मोर्चे की ओर से मतगणना के बाद बनने वाली तमाम राजनीतिक संभावनाओं के मद्देनजर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने डिनर डिप्लोमेसी के माध्यम से एनडीए की एकजुटता दिखाते हुए सरकार गठन की ओर रणनीतिक संकेत दिए तो समूचे विपक्ष ने ईवीएम पर कूटनीतिक दांव चला है। अशोका होटल में पूरा एनडीए कुनबा आत्मविश्वास से सरावोर था तो 21 दलों के विपक्षी कुनबे ने चुनाव आयोग जाकर ईवीएम का राग अलापते हुए ईवीएम के साथ-साथ वीवीपैट के मतों की गणना कराने की मांग की।

पक्ष-विपक्ष के तमाम दावों के बावजूद असल मुद्दा संख्या बल को लेकर है जो मतगणना के बाद ही निर्धारित हो पाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ने दिखाया कि वे अजेय हैं। उनके प्रदर्शन को देखते हुए पूरा का पूरा एनडीए कुनबा यह मानकर चल रहा है कि उसे नई सरकार में सवार होना है। जबकि विपक्ष के समक्ष एक से बढ़कर एक कई ऐसी चुनौतियां हैं जिनसे पार पाना आसान नहीं होगा। बहरहाल, जनमानस में ईवीएम की गड़बड़ी की आशंका बिठाना उसके समक्ष बड़ी चुनौती है। उसके लिए विपक्ष ने मतगणना से पहले ही इस तरह की आशंका जाहिर कर दी है ताकि मतगणना के बाद नतीजे एनडीए के पक्ष में आए तो वह तर्क सिद्ध करेगा कि विपक्ष ने तो इस तरह की गड़बड़ी की शिकायत चुनाव आयोग से पहले ही कर दी थी। तभी वीवीपैट के मतों की गणना कराने की मांग सोची समझी रणनीति के तहत है।

उत्त्र प्रदेश के चंदोली, मउ, झांसी जैसे स्थानो ंपर ईवीएम को इधर से उधर दूसरे स्थानों पर लाते समय विपक्षी दलों ने इस पर जोर का हल्ला बनाया। यह हल्ला देश के कई अन्य जगहों पर भी बनता दिखा। जिसमें बिहार के सारण में तो ट्रक में भरी ईवीएम को सपा कार्यकर्ताओं ने रोका और इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की। बाद में काफी मशक्कत क ेबाद चुनाव आयोग को अपनी सफाई देनी पड़ी कि चुनाव के समय खाली पड़ी ईवीएम को वापस स्थानों पर ले जाया गया। और यह चुनाव के बाद होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है। जिन ईवीएम को मतगणना में प्रयोग में लाना है वे पूर्णतया सुरक्षित स्ट्रांग रूम में बंद करके रखा गया है।

इन सारी घटनाओं के बाद विपक्षी दलों में हताशा का भाव भी उभरा। खासतौर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में। तभी कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा को कार्यकर्ताओं के लिए संदेश देना पड़ा कि वे अपुष्ट खबरों या मनगढ़ंत एक्जिट पोल के नतीजों पर ध्यान देने के बजाए स्ट्रांग रूम में अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान लगाएं। अमित शाह ने डिनर डिप्लोमैसी के बाद यूपीए पर बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त ले ली है। मतगणना से पहले ही हताश-निराश विपक्ष जब तक कि संभल पाए, अमित शाह मानकर चल रहे हैं कि बाकी का काम वे दो दिनों में कर ले जाएंगे। शह और मात के खेल में शाह हर कदम पर आगे खड़े नजर आ रहे हैं। तभी तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणामों को लेकर कयासबाजी है कि क्या विपक्ष को उलझाने के लिए ही अमित शाह के दो कदम पीछे हटने की रणनीति थी? क्योंकि कांग्रेसी खेमे में इस तरह की कयासबाजी जोर पकड़ रही है कि नरेंद्र मोदी के वापस सत्ता में आते ही उसे कम से कम तीन राज्यों में सरकार से हाथ धोना पड़ सकता है।

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