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पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की नाराजगी का सोशल मीडिया में उड़ा मजाक

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की नाराजगी का सोशल मीडिया में उड़ा मजाक

नई दिल्ली। खुद को असम में ब्रह्मपुत्र नद पर बने बोगीबील पुल के उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाये जाने पर भड़के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का अब सोशल मीडिया में मजाक उड़ाया जा रहा है। लोगों ने एचडी देवगौड़ा पर व्यंग्य करते कई तरह की टिप्पणियां की हैं।

शकुंतला अय्यर लिखती है कि हम अपने पूधानमंत्री देवगौड़ाजी को याद रखेंगे कि उन्होंने हमे एक सीएम पुत्र, एक विधायक-मंत्री पुत्र, एक विधायक बहू, एक फिल्म अभिनेत्री बहू, एक फिल्म अभिनेता पोता, फिल्म प्रोड्क्शन कंपनी सहित बहुत-सी सौगातें दीं।

नंदन बारदोलाई लिखते है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देवगौड़ा, मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों को याद दिलाया कि केवल शिलान्यास के पत्थर पर नाम लिखवाने के लिए परियोजनाएं शुरू नहीं की जानी चाहिए, देशहित में ऐसी परियोजनाओं को पूरा किए जाने की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

एक राष्ट्रीय अखबार ने कॉर्टून बनाते हुए दिखाया, जिसमें एचडी देवगौड़ा बोगीबील पुल के नीचे एक पोस्टर लगा के सो रहे हैं, जिस पर लिखा है- इस पुल का शिलान्यास मैंने किया था।

दरअसल सोशल मीडिया पर एचडी देवगौड़ा के मजाक बनने की शुरुआत तब हुई, जब उन्होंने बोगीबील पुल के राष्ट्र को समर्पित किए जाने के समारोह में खुद को नहीं बुलाये जाने और खुद का नाम प्रमुखता से नहीं लिये जाने पर अपनी नाराजगी जताई। अपनी चिरपरिचित शैली में उन्होंने तंज कसा, "ऑय्यो रामा, अब मुझे कौन याद रखेगा।"

देवगौड़ा ने बयान देते हुए याद दिलाया कि कश्मीर तक रेलवे लाइन, दिल्ली मेट्रो और असम में बोगीबील पुल परियोजना को स्वीकृति उनके प्रधानमंत्रित्वकाल में दी गई थी। इसीलिए उनके योगदान को भी याद किया जाना चाहिए। बोगीबील पुल परियोजना को देवगौड़ा के प्रधानमंत्री रहते 22 जनवरी, 1997 को स्वीकृति दी गई थी।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र नद पर बने बोगीबील पुल को राष्ट्र को समर्पित किया। इस पुल का काम अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए साल 2002 में शुरू करवाया था। यह भारत का सबसे लंबा और एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है। असम में ब्रह्मपुत्र नद पर डिब्रूगढ़ में बने बोगीबील पुल को यूरोपीयन तकनीकी से बनाया गया है| इसका जीवनकाल 120 साल तक होने का अनुमान लगाया गया है। इस ब्रिज के शुरू होने से दिल्ली-गुवाहाटी के बीच की दूरी तीन घंटे कम हो जाएगी। इतना ही नहीं युद्ध के समय वायुसेना के फ्लाइटर प्लेन भी इसके रोड को रनवे के रूप में उपयोग में ला सकते हैं।

असम में बने इस बोगीबुल ब्रिज में दो रेलवे ट्रैक हैं| तीन लेन रोड भी है। 4.94 किलोमीटर लंबे इस पुल की आरंभिक लंबाई 4.3 किलोमीटर तय की गई थी। इसे बनाने में करीब 5 हजार 900 करोड़ रुपये का खर्च आया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने ब्रह्मपुत्र नद पर बोगीबील सड़क और रेल पुल के निर्माण के लिए लगभग 35400 मीट्रिक टन इस्‍पात की आपूर्ति की है।

Swadesh Digital ( 9414 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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