Latest News
Home > खेल > क्रिकेट > विपक्षी टीम के छक्के छुड़ा देने वाला योद्धा है युवराज

विपक्षी टीम के छक्के छुड़ा देने वाला योद्धा है 'युवराज'

सचिन श्रीवास्तव

विपक्षी टीम के छक्के छुड़ा देने वाला योद्धा है

योद्धा का नाम सुनते ही हमारे जेहन में एक ऐसी तस्वीर उभरती है जिसमें एक बाहुबली हथियारों से लैस होकर मोर्चे पर खड़ा हुआ है। क्रिकेट भी एक जंग है। इस युद्ध में हमारे जेहन में योद्धा के रूप में किसका चेहरा सामने आता है। नहीं, धोनी नहीं वह कुशल रणनीतिकार हैं, वह दिलेर सेनापति हैं जो आगे बढ़कर मोर्चा संहालता है। पर उतना ही शांत और खामोश भी रहता है। पर कौन है असली योद्धा? जिसके चेहरे पर एक आक्रामक गुर्राहट रहती हो? ऐसा कौन खिलाड़ी था? ऐसा जांबाज जो उस देश के गेंदबाज को छह छक्के उड़ा सकने की हिम्मत रखता हो, जहां क्रिकेट का जन्म हुआ हो। जी हां आपका सोचना बिलकुल सही है वह है 'युवराज सिंह'। युवराज ने कई बार चक्रव्यूह में फंसी टीम को योद्धा बनकर उबारा है। चाहे वह 2007 टी-20 विश्वकप में इंग्लैण्ड के खिलाफ मात्र 12 गेंद पर अर्धशतकीय रिकॉर्ड पारी हो या फिर 2011 विश्व कप में हरफनमौला प्रदर्शन (बल्ले से 362 रन और गेंदबाजी में 15 विकेट)। ऐसे कई उदाहण है जब युवराज सिंह ने भारतीय टीम के करोड़ों समर्थकों को मैच की दुखद घड़ी में मुस्कराने का मौका दिया हो।

अगर सौरभ गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को लडऩे का जज्बा दिया और नख-दंत दिए थे तो उस तेवर के प्रतिनिधि क्रिकेटर युवराज सिंह थे। उसी युवराज ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है। यह सही है कि युवी काफी समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे। मौजूदा विश्व कप की भारतीय टीम में भी उन्हें नहीं चुना गया।

युवराज सिंह ने मुश्किलों से कभी हार नहीं मानी। इस जिंदादिल क्रिकेटर के 25 साल के कॅरियर में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन वो कभी हालात के आगे झुका नहीं। हमेशा एक योद्धा के रूप में डटकर मुकाबला किया।

विश्व कप के दौरान ही युवी की तबीयत बिगडऩे लगी थी। लेकिन उन्होंने किसी को इसका अहसास नहीं होने दिया। फिर साल 2011 में ही खबर आ गई कि युवी को कैंसर है। यह खबर उनके समर्थकों के साथ-साथ युवी के लिए भी चौंकाने वाली थी। फिर भी परिवार और खास दोस्तों की वजह से युवराज ने कैंसर को हराया और बाकी लोगों को इसकी प्रेरणा दी। युवराज सिंह कैंसर पर 'द टेस्ट ऑफ माई लाइफ' नामक किताब भी लिख चुके हैं।

हमारा यह योद्धा, जो असल जीवन में भी जांबाज है, भावुक भी है। याद कीजिए 2011 विश्व कप फाइनल का वो लम्हा जिस समय धोनी ने विजयी छक्का मारा था उसके बाद मैदान पर ही युवराज बच्चों की तरह फूट-फूट कर रोए थे। युवराज सिंह को परिभाषित करना आसान नहीं है। पर अपने कॅरियर के खत्म होने की सूचना देते हुए युवराज के लिए कुछेक शब्द तो बनते ही हैं- जीवट, दिलेर, जांबाज योद्धा...और इससे मिलते-जुलते न जाने कितने ऐसे ही शब्द। युवराज सिंह, आपको सिर्फ क्रिकेट ही परिभाषित कर सकता है। करोड़ों भारतीय समर्थक आपको कभी नहीं भूलेंगे न ही वो गेंदबाज जिन्होंने आज राहत की सांस ली होगी। वैसे भी योद्धा भुलाए नहीं जाते हैं योद्धा तो युगों-युगों तक याद किए जाते हैं और याद किए जाते रहेंगे।

Tags:    

Swadesh Digital ( 0 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Share it
Top