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स्वास्थ्य के शत्रु से मित्रता क्यों?

डॉ. सुखदेव माखीजा

स्वास्थ्य के शत्रु से मित्रता क्यों?Image Credit : healthline

सामाजिक,पारिवारिक तथा व्यक्तिगत जीवन में शत्रु से मित्रता करने से न केवल अनेक समस्याएँ सुलझ जाती हैं अपितु पारस्परिक कटुता भी समाप्त हो जाती है परन्तु युवावस्था में धूम्रपान के शौक से जो युवा मित्रता करते हैं बाद में वही शौक उनके स्वास्थ्य का घोर शत्रु बन जाता है। मानव शरीर का ऐसा कोई भाग अथवा अंग नहीं है जिस पर तम्बाकू जन्य व्यसन का दुष्प्रभाव न होता हो। परन्तु प्राणवायु को संधारित करने वाले जीवनदायी अंगों फेफड़ों पर इस व्यसन का विषजन्य प्रभाव प्राणघातक होता है। तम्बाकू तथा उसके विषैले धुएँ में पाए जाने वाले विषैले रसायन मानव शरीर के श्वसन तंत्र पर जो घातक प्रहार करते हैं उनसे उत्पन्न जटिल रोग निम्नानुसार हैं -

फेफड़ों का कैंसर- इस प्राणघातक रोग के मुख्य कारक तम्बाकू से उत्सर्जित धुंएँ के कैंसरकारी कोम्प्लेक्स केम्मिकल्स होते हैं। साँस अवरोधित करने वाले इस रोग में श्वसन नलिकाओं में विकार उत्पन्न हो जातें हैं जिसके कारण सामन्य ब्रोंकाइटिस की खांसी कुछ समय बाद दमे के दौरे के रूप में आकर फेफड़ों की कार्य क्षमता को कम कर देते हैं।

तपेदिक -दीर्घ अवधि तक तम्बाकू सेवन तथा धूम्रपान करने से शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता कम हो सकती है जिसके परिणाम स्वरुप तपेदिक होने की आशंका अधिक हो जाती है। घर अथवा कमरे के अन्दर बार बार धूम्रपान करने से वहां उत्पन्न वायु प्रदूषण के कारण उस स्थान पर रहने वाले ऐसे निर्दोष व्यक्ति एवं मासूम बच्चे भी पैसिव स्मोकिंग का शिकार हो जाते हैं धुएं को सांस के साथ लेने के कारण श्वसन क्षमता कमजोर होने लगती है जिससे सामान्य कार्य शक्ति कम हो जाती है। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस-2019- मुख्य उदेश्य इस संकल्प की पूर्ती के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शासकीय तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से जन जागरूकता हेतु दिशा निर्देश प्रतिपादित किये हैं जो निम्नानुसार हैं - स्वस्थ शरीर हेतु स्वस्थ श्वसन तंत्र के महत्व के बारे में जन सामान्य को अवगत कराना। तम्बाकू एवं इसके उत्पादनों के प्राणघातक प्रभावों के सम्बन्ध में जन जन को जागरूक करना।

फेफड़ों के धूम्रपान जन्य कैंसर के बारे में विशेष चेतावनी जारी करना। तम्बाकू उत्पादन तथा इसके सार्वजनिक उपयोग को नियंत्रित करना। धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों की संख्या लगभग एक करोड़।

प्रत्यक्ष सेवन से उत्पन्न विभिन्न रोगों के कारण प्रतिवर्ष मृत्यु संख्या ? लगभग 70 लाख अप्रत्यक्ष द्वितीय धूम्रपान (पैसिव स्मोकिंग) के कारण रोग ग्रस्त निदोर्षो की प्रतिवर्ष मृत्यु संख्या लगभग 10 लाख द्वितीयक धूम्रपान के शिकार बच्चों की संख्या ? लगभग 28 लाख मानव मृत्यु के कारणो में हर छठवीं मृत्यु तम्बाकू सेवन है।

उपरोक्त तथ्यों से उपजित अत्याधिक चिंता का बिन्दु यह है कि विश्व में प्रति सेंकण्ड एक मृत्यु तम्बाकू जन्य शारीरिक जटिलताओं के कारण होती है। इनमें लगभग 10 लाख वे निर्दोष व्यक्ति होते हंै जो धूम्रपान करने वालों के शौक एवं व्यसन के कारण द्वितीयक धूम्रपान के शिकार हो जाते हैं। इनमें लगभग 28 प्रतिशत वे मासूम बच्चे भी होते हैं जिन्हें अपने ही अभिभावकों एवं परिजनों के व्यसन का दण्ड भुगतान पड़ता है। चूकिं द्वितीयक धूम्रपान में घातक गैसेस फेफडों में सीधे प्रवेश करती हैं अत: विशेषकर बच्चों में इस प्रकार का धूम्रपान प्रत्यक्ष धूम्रपान से बहुत अधिक हानिकारक होता है।

तम्बाकू एक धीमी गति का विष है। तम्बाकू सेवन पर निर्भरता विभिन्न रोगों का एक जटिल संकुल है। इसमें शरीर की क्रियात्मक, वैचारिक एवं व्यावहारिक घटकों के विकार संयुक्त रूप से संलिप्त होते हंै। अत: इस एडिक्शन का उपचार प्रबन्धन भी अत्यधिक कठिन होता है। परन्तु एक आशात्मक पहलू यह भी है कि तम्बाकू निर्भरता साधक योग्य है। भय, प्यार, उपहार एवं उपचार के चार सिद्धातों पर आधारित बहुआयामी उपायों से इस व्यसन से मुक्ति सम्भव है। सामुदायिक चिकित्सा विज्ञान के एक सर्वे के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दिए गए 4 मिनट के परामर्श से 10 से 20 प्रतिशत व्यक्ति तम्बाकू सेवन छोड़ देते हंै। वहीं चिकित्सक द्वारा दिए गए 60 सेकंड के परामर्श से 70 प्रतिशत व्यक्ति तम्बाकू सेवन से मुक्ति पा सकते हैं।

तम्बाकू मुक्ति के व्यक्तिगत, व्यवहारिक उपाय

तम्बाकू छोडऩे की इच्छा शक्ति, तत्काल एकल प्रयास में छोडऩा, चरण बद्ध मुक्ति से ज्यादा प्रभावी है। तम्बाकू युक्त खाद्य उत्पाद, तम्बाकू, गुटका, पान, सिगरेट बीड़ी आदि अपने पास एवं घर में न रखें। धूम्रपान के आदी व्यक्ति माचिस / लाइटर पास न रखें। अन्य व्यक्तियों को तम्बाकू मुक्ति हेतु प्रेरित करें। 'सोशल मीडियाÓ के इस युग में प्रचार प्रसार के प्रत्येक माध्यम पर आजकल व्यसनमुक्ति से सम्बंधित सामग्री प्रचुरता के साथ उपलब्ध है। व्यावसायिक 'कौन्सिलर्सÓ की भी कोई कमी नहीं है। स्वयंसेवी संघठन सामाजिक कार्यकर्ता भी इस विकराल समस्या के निवारणार्थ हर सम्भव प्रयासरत हैं। परन्तु तम्बाकू के व्यसनग्रस्त व्यक्ति की स्वयं की दृढ़ इच्छाशक्ति से ही इस अत्मघाती व्यसन से पूर्ण मुक्ति का प्रभावशील उपाय सम्भव है।

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