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सफल जीवन के लिए सकारात्मक विचारों का होना बेहद जरूरी - पी. नरहरि

सफल जीवन के लिए सकारात्मक विचारों का होना बेहद जरूरी - पी. नरहरि

स्वदेश वेब डेस्क। हम सबको हमेशा सकारात्मक और आत्म प्रेरित रहना चाहिए। सकारात्मक विचारों, सुझावों, ऊर्जा का अपने जीवन में स्वागत करना चाहिए। इस तरह सकारात्मक ऊर्जा मात्र व्यक्ति को खुशहाल और स्वस्थ बनाती है। हर व्यक्ति के मस्तिष्क की दो अवस्था होती है, चेतन और अवचेतन। सकारात्मकता व्यक्ति के अवचेतन मस्तिष्क को सकारात्मक सिग्नल भेजती है, जिससे वह व्यक्ति के सुधार के लिए काम करता है।

आज का जीवन दिनों दिन मशीनी होता जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति को सुनिश्चित करना चाहिए की वह अवचेतन अवस्था को पर्याप्त आहार प्रदान करे। इसके लिए हमारे पास ढेर सारे साधन मौजूद हैं। सबसे अच्छा साधन सुबह जल्दी उठ कर सैर या दौड़ पर जाना है। साँस क्रिया से भी हम ऐसा कर सकते है। हमें इस प्रकार सांस लेना चाहिए की वह व्यक्ति के नियंत्रण में रहे। ऐसा करने से हम सकारात्मक और आत्म प्रेरित होते है। ब्लड प्रेशर और दिमाग से जुड़ी समस्त बीमारियों को साँस के व्यायमों द्वारा नियंत्रित रखा जा सकता है। योगासन के द्वारा भी सांस को नियंत्रित किया जाता है, इस प्रकार हमारा तन-मन स्वस्थ रहता है।

हमेशा खुशहाल और ऊर्जावान बने रहना हमें आत्मप्रेरित रखता है। किसी भी परिस्थिति में हमें हमेशा खुश रहने का प्रयास करना चाहिए। तनावपूर्ण परिस्थिती में भी तर्क और हास्य के उपयोग से हम निश्चिन्त और आराम से रह सकते है। एक ही स्थान पर बैठ कर आँखे बंद करके सांस से जुड़े व्यायाम करने से हर व्यक्ती आराम से रह सकता है और किसी भी तनावपूर्ण परिस्थिति से उबर सकता है। अपना आपा ना खोना और नकारात्मक स्थिति ना बनाने से सहकर्मियों और साथियों के बीच भी उत्साह बना रहता है। एक सकारात्मक सोच अपने मित्रों, पारिवारिक सदस्यों और सहकर्मियों के बारे में सकारात्मक विचार रखने से आती है। सकारात्मकता हमें स्वस्थ रखती है और एक अच्छी नींद में सहायक है। समस्त बीमारियां एक अच्छी नींद के द्वारा दूर की जा सकती हैं। साथ ही दुसरों के बारे में अच्छा सोचने और अच्छी अपेक्षा रखने से रिश्तों में सामंजस्य भी बना रहता है।

जिन लोगों ने आपको कष्ट पहुँचाया है या जिन्होंने आपको गहरा घाव दिया है उन्हें क्षमा करने से जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। हमें दूसरों के द्वारा दिए गए कष्टों का भार साथ लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। क्षमा कर देने और क्षमा माँग लेने से हमारा मन प्रसन्न रहेगा। जीवन में आगे बढ़ने का एकमात्र मार्ग आत्मप्रेरित रहना है। मौजूदा कार्यों के बारे में सोचने और उन्हें पूर्ण करने के प्रयास करते हुए लक्ष्य की और आगे बढ़ते रहना ही जीवन में सही है। हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिए। इस प्रकार हमारे कार्य को पूर्ण करने के प्रयास हमें जीवन जीना सीखाते है। छोटे-छोटे कार्य पूर्ण करने से हम जीवन यात्रा पूरी करने का प्रयास करते है। जो शुरू किया उसे अवश्य ही पूर्ण करना चाहिए। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी यात्रा संभल कर, धीरे धीरे पूर्ण करनी चाहिए। हर बार अपेक्षित सफलता मिले ये ज़रूरी नहीं, लेकिन हमें प्रयास अवश्य करना चाहिए। विफलता भी सही है, हमें विफलता को भी स्वीकार करना चाहिए, जिससे हम हर परिस्थिति में प्रसन्न रह सकें हम विफलता से ही सीखते है। इसलिए हमें कार्यपूर्ती के लिए, अपनी क्षमता अनुसार प्रयास करने चाहिए।

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