Home > विशेष आलेख > इस उम्र में हो बच्चों के साथ मित्र जैसा व्यवहार

इस उम्र में हो बच्चों के साथ मित्र जैसा व्यवहार

इस उम्र में हो बच्चों के साथ मित्र जैसा व्यवहार

आधुनिक समय में तकनीकी का अहम किरदार है। जिसका असर बड़ों के साथ-साथ बच्चों पर भी पड़ता है। मोबाइल और इंटरनेट के बिना बच्चों को अधूरापन लगने लगता है। इसके पीछे का कारण है बच्चों का इंटरनेट का आदी होना। इसका सबसे ज्यादा असर किशोरों पर पड़ता है। इस उम्र में बच्चों को संभालना आसान काम नहीं है। छोटे बच्चों के साथ दोस्ती करना बहुत आसान है लेकिन बढ़ती उम्र यानि किशोरावस्था में उनका दोस्त बनना बहुत मुश्किल है। लेकिन हर समय डांट फटकार ही नहीं लाड़-प्यार और बच्चों की प्रसंशा भी आवश्यक है। क्योंकि प्रेम और प्रसंशा कहीं न कहीं आत्मविश्वास को बढ़ाती है।

पारदर्शी बनें

यह बात बिल्कुल सही है कि मां-बाप बच्चे के पहले अध्यापक होते हैं। आप जो भी करेंगे बच्चे उसे जरूर करेंगे। बच्चो के साथ दोस्ती बनाएं रखने के लिए उनके सामने खुद पारदर्शी बने रहें। अगर कोई गलती हो जाए तो बच्चों से इसके लिए माफी मांगने में भी कोई बुराई नहीं है। घर में अच्छा वातावरण बना रहेगा तो बच्चे माता-पिता के करीब आ जाएंगे।

थोड़ी आजादी भी दें

हर बात के लिए बच्चे पर नियम लागू करना भी ठीक नहीं है। बच्चा कुछ भी करें उससे वकीलों की तरह हर बार सवाल न करे। उनके लिए घुटन का माहौल बन जाता है। बच्चे को थोड़ा स्पेस भी दें। अगर उनकी किसी बात को लेकर आपको चिंता महसूस होती है तो उनसे बात करें।

एक साथ बिताएं वक्त


अगर आप यह सोच रहे हैं कि चिंता सिर्फ बड़ों को ही होती है तो आप गलत भी हो सकते हैं। बच्चे भी बहुत सी बातों को लेकर परेशान हो जाते हैं। आप उन्हें नजर-अंदाज करेंगे तो वह अकेले पड़ जाएंगे। आपसे दूरी बना लेंगे। किशोरावस्था में बच्चो को आपकी ज्यादा जरूरत होती है इसलिए उन्हें समय देना बहुत जरूरी है। कभी-कभी उनके साथ ट्रिप का प्लान भी करें। कुकिंग,गार्डनिंग,पिकनिक,आदि के जरिए आप उनके करीब आ सकते हैं।

बच्चे के मन में विश्वास जगाएं

मां-पिता होने के नाते बचपन से ही बच्चे के मन में विश्वास जगाएं । जो बात बच्चा आपसे कर रहा है, उसे अपने तक रखकर बच्चे को सही रास्ता भी दिखाएं। जिससे वह अपना डर आपसे आसानी से सांझा कर सकेगा और आप भी उससे जुड़ी हुई हर गतिविधि को बारीकी से जान पाएंगे।

मित्रों से मिलें

अक्सर बच्चों के माता-पिता अपने कामों के चलते इतने वीजी होते हैं कि उनके बच्चों के पढ़ाई और उनकी जरूरत के अलावा दूसरी ओर उनका ध्यान ही नहीं जाता जवकि जितना बच्चों से आपकी मित्रवत व्यवहार रखते हैं वैसा ही व्यवहार उनके मित्रों के साथ भी रखना चाहिए। जिससे यदि आपके बच्चे आपसे कुछ बातें छुपाते भी हैं तो आप उनके मित्रों से जान सकें। समय-समय पर बच्चों के मित्रों से मिलें उन्हें अपने घर बुलाए। उनसे उनसे उनके लक्ष्य के बारे में पूछें। ऐसा करने से बच्चों के मित्र आपसे बिना झिझक के बात कर सकें गे और आपके प्रति उनके मन में एक साकारात्म भाव जाग्रत होगा।

सोशल मीडिया पर बच्चें से जुड़ें

तकनीकी दौर में सोशल मीडिया का उपयोग सभी उम्र के लोग करते है। विचारों को व्यक्त करने का सबसे अच्छा माध्यम सोशल मीडिया बना हुआ है। सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़कर आपके उनके विचारों को काफी हद तक जान सकते हैं। अच्छे विचारों के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें।

Naveen ( 1696 )

Swadesh Contributors help bring you the latest news and articles around you.


Share it
Top