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तूणीर : मियाँ बंटाढार जी - कहाँ गए सब यार जी

तूणीर : मियाँ बंटाढार जी - कहाँ गए सब यार जी

इस समय पूरा देश और दुनिया , पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले के तेरहवें दिन, 26 फरवरी को पाकिस्तान स्थित बालाकोट में बने जैश - ए - मोहम्मद के आतंक के प्रमुख प्रशिक्षण केन्द्र एवं अन्य स्थानों पर स्थित आतंक की नर्सरियों को तबाह करने के लिए भारतीय वायुसेना द्वारा की गई प्रतिरोध के चरित्र वाली गैर - सैन्य कार्यवाही ( नान मिलिट्री प्री एम्पटिव एक्शन) की शत प्रतिशत सफलता से प्रसन्न है, गदगद है । पूरे देश में जोश और उत्साह है। सही तरीके से चतुराई पूर्वक की गई इस कार्यवाही से देश की आम जनता भी कलेजे में ठंडक महसूस कर रही है। हमारी सामरिक कुशलता और सूझबूझ वाली विदेश नीति के मियां बंटाढार जी भी कायल होकर पस्त हौसले के साथ उल्टी सांसें लेने पर मजबूर हैं। इस्लाम के नाम पर बने उनके अपने अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने भी उन्हें बिना भाव दिए हमारी श्रद्धेय विदेशमंत्री को ससम्मान अतिथि के रूप में आमंत्रित करके मियां जी की बोलती बंद कर दी है। मियाँ जी क्रिकेट की ऐसी पिटी गेंद हो गए हैं जिन्हें सब मिलकर लगातार कूटते हुए सफलता के चौके छक्के लगा रहे हैं। किसी संप्रभुता प्राप्त देश की ऐसी दुर्दशा शायद ही कभी देखी गई हो।

भारत के रण कौशल तथा सफल कूटनीति का ही सुफल है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हमारे नापाक पड़ोसी पर तेज दबाव बनाया जा रहा है। वह अलग-थलग पड़ गया है। सब उसे डांट रहे हैं, सुधर जाओ। जिन आस्तीन के सांपों को वर्षों से पाल रहे हो, इतने सालों से संसार भर के दूसरे देशों में भी मौत और दहशत का तांडव करवा रहे हो । यह खेल अब बंद करो। जिहाद के नाम पर पागलपन में आकंठ डूबे असुरों को पाल पोषकर बेकसूर, मासूम लोगों की जान से खिलवाड़ करने की पोल पट्टी अब नहीं चलेगी। यदि तुमने इन्हें नेस्तनाबूद नहीं किया तो अब दुनिया तुम्हें छोड़ेगी नहीं। जिस प्रकार से चौतरफा दबाव इस नापाक पड़ोसी, बंटाढार मियाँ पर इस समय है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। वह बुरी तरह घबराया , बौखलाया हुआ है, दिन का चैन, रात की नींद, दिल का सुकून सब हराम हो गए हैं। ऐसा भी पहली बार ही दिख रहा है।वह हमसे वार्ता के लिए घिघिया रहा है - चिचिया रहा है। उसके अपने आका भी मौन हैं।

बेचारा बंटाढार मियां वैसे ही आर्थिक तंगी का शिकार है। पुराने जमाने के किसान, गरीब, मजदूर की तरह यह आधुनिक नापाक मुल्क, सिर से पैर तक कर्जे के बोझ से दबा हुआ है। कटोरा लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भीख मांगने को मजबूर है। कर्जे का ब्याज चुकाने के लिए कर्जा लेने के लिए दर दर भटकते, विषम आर्थिक दुष्चक्र में फंसे मियाँ बंटाढार जी अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से बुरी तरह घिर गए हैं । भारत में बैठे उनके हमदम जाहिरा दोस्त विदूषक सिंह पिद्दू जी की बोलती बंद है। कल तक हर बात पर जनता से ताली ठुकवाने वाले पिद्दू जी स्वयं अपना माथा ठोकते हुए गा रहे हैं -- मियाँ जनाब! अब ना निबिहै प्रीति ये तेरी मेरी -- मेरे घर में ही हो गई खटिया खड़ी मेरी। टी व्ही पर पिद्दू जी के मित्र बकुल बेशर्मा के शो का लोगों ने बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मित्र गण भी इनसे दामन छुड़ा कर हमारा साथ देते हुए, इनकी पनाहगाह में दबे - छिपे मानवता के दुश्मनों की पागलपंती बंद कराने के लिए मियाँ जी की कान खिंचाई कर रहे हैं।

भारत में घाटी में अथवा अन्य कहीं छुपे बैठे नापाक पड़ोसी के हमराज़ भी बुर्के में मुंह छुपाए, जमींदोज हो गए हैं इस डर से कि कल हमारी बारी है। यह प्रधानसेवक तो सब पर भारी है। 27 फरवरी को नापाक पड़ोसी देश ने सीमा पर छुटपुट घुसपैंठ करने की असफल कोशिश की है। लेकिन हमारी मुस्तैद फौज ने उनको मुंहतोड़ उत्तर दे दिया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इनकी अच्छी लानत मलामत हो गई।

ऐसा लगता है कि नापाक पड़ोसी श्रीमान् बंटाढार के रूप में अवतरित होकर स्वयं का बंटाढार करने पर आमादा हो गये हैं। बात तो इतनी बिगड़ गई है कि हमेशा इनकी राजनीति पर सवारी करने वाली इनकी फौजी सत्ता भी अब शांति वार्ता के लिए मिमिया रही है।

दूसरी तरफ हमारे यहां सारे वोट लालायित स्वार्थी तत्व देश की जनता के मिजाज व जज्बे को भांपकर मौखिक रूप से स्वयं को सेना व सरकार के साथ होने की दम भर रहे हैं। अब कोई हमारी सैन्य सूझबूझ और हासिल की गई उपलब्धि का प्रमाण मांगने की हिमाकत भी नहीं कर पा रहा लेकिन जिस प्रकार से इस नापाक पड़ोसी के घर में घुसकर , सफलतापूर्वक दुष्ट दमन करने के शौर्य के लिए चहुं ओर जनता प्रधान सेवक का गुणगान कर रही है, वह भी इन्हें पच नहीं रहा। उनका स्यापा यह है कि सारी प्रशंसा प्रधान सेवक को या उसके साथियों को ही क्यों मिल रही है । सब इक होकर माथापच्ची कर रहे हैं , अंदर ही अंदर यह मानने को मजबूर हो गए हैं कि इस चुनाव में तो फिर से पगड़ी प्रधान सेवक के माथे पर ही सजेगी। मध्य प्रदेश में भी सब कुछ उलटी पलटी हो रही है। ऐसा लगता है कि वर्तमान एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री और उनकी टीम पर श्रीमान् बंटाढार भारी पड़ रहे हैं। रोज ट्रांसफर की लंबी लिस्ट । वर्ष 2003 तक इहाँ का बेड़ा गर्क कर चुके यह श्रीमान इतने जबर हो गए हैं कि मंत्री गण विधानसभा में जो कहते हैं बंटाढार भाईसाहब अपनी रौ में बहकर उसको गलत बताकर उन्हें डांट पिलाने से भी नहीं चूकते। इनका वर्तमान रूतबा और जलाल देखिए कि राजनीति का बेड़ा गर्क करने वाले यह श्रीमान , भोपाल में हुए इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के 79 वें अधिवेशन में भी वामधारा में डुबकी लगाकर इतिहास को नए सिरे से गढऩे की वकालत कर आते हैं। इस कांग्रेस में अलीगढ़ से पधारे हों या जे एन यू से , सब के सब तथ्यों पर आधारित, स्थापित इतिहास का रूख बदलने की बात करते नहीं थकते। इसे इनकी विद्वता कहें या दिमागी खाज का लाइलाज रोग कि यहाँ कृष्णकालीन वृंदावन को मुगल काल में स्थापित होना बता रहे हैं जनाब हबीब जी। मतलब यह कि हमारे यहाँ भी कहीं-कहीं बंटाढार बिरादरी के लोग मौजूद हैं।

-नवल गर्ग

Naveen ( 1696 )

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