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तूणीर : दिदिया जू मुस्कराई

तूणीर : दिदिया जू मुस्कराई

आजकल जिस तेजी से घटनाएं घटित हो रही हैं उसे देखकर लगता है कि हमारी सामाजिक स्थिति हो या राजनीति.. सब जगह बड़ा घालमेल हो रहा है। गठबंधन .. महागठबंधन .. मिलावट .. महा मिलावट।।

बाल बबुआ अपनी दिदिया जू के रोड शो के बाद दल और दलगत राजनीति के चलते सबसे बड़े प्रदेश में पैर जमाने की ऊहापोह और सारी चिंता व मशक्कत उनके हवाले करके स्वयं कागज के हवाई जहाज बनाकर संसद परिसर में गांधी जी के समक्ष, उन्हें उड़ाने पहुंच गए।

तुर्रा यह कि मित्र-मितान, मैया और गवैया सबको इस कागज के हवाई जहाज को रफैल का नाम देकर बचपन में बच्चों द्वारा उड़ाए जाने वाले हवाई जहाजों की भांति उड़ाने में ही आनंद आने लगा है।

किस्मत के मारे, दल के सारे नेता बेचारे, नितान्त बचकानी, बाल बुद्धि वाले बबुआ जी को आगे करके अपनी बुद्धि के मंद और कुंद होते जाने और अंदर चल रहे अंतद्र्वंद की तरफ ही इशारा करते दिख रहे हैं। अन्यथा कोई तो समझदारी दिखाता।

अब बबुआ जी की सोच तो यह भी है कि यदि चुनाव में वो, उनका दल और समर्थक जीतें तो ईव्हीएम सही .. नहीं तो चुनाव संस्थान ही शंकास्पद ।।

बीते जमाने के मतपेटी लूटने .. अनपढ़, लाचार मतदाताओं को डरा धमका कर मतदान अर्थात् लोकतंत्र को आसानी से लूट सकने के दिन, हिंसा और बदगुमानी या फिर लालच देकर स्वयं के जीतते रहने के दिन बार-बार उनके हृदय में टीस पैदा करते रहते हैं। केवल वही नहीं .. बड़े प्रदेश के साइकिल बबुआ .. हाथी से परेशान बुआ, दिल्ली के मफलर बबुआ, चारा प्रदेश के चारा खबुआ और उनके संगी साथी, सुदूर पूर्व की चिट फंड वाली दीदीगिरी, तेल अंगना के आबू बाबू, कहीं के लाबू कहीं के खाबू सब हो रहे हैं जनता की खुशहाली की संभावना देखकर बेकाबू। उनसे यह सहन नहीं हो रहा कि उनकी दो और तीन नंबर की दलाली के बिना ही जनता खुशहाल हो जाए।

तभी तो संवैधानिक मर्यादा को तार-तार करने में विश्वास रखने वाली दीदीगीरी जी सदल बल, दिल्ली आकर गांधी जी के सामने सद्बुद्धि और सद् विवेक मांगने का नाटक करती हैं तो तुरंत मफलर बाबू के साथ जंतर मंतर पर हाजिरी देने पहुँच जाती हैं। मफलर बाबू सुप्रीम कोर्ट में हार जायें तो अप्रत्यक्ष रुप से उसे भी कोसने लग जाते हैं।

सदैव झूठमूठ में जीने वाले बाल बबुआ भी रा(हुल) फेल में हर कदम पर लुढक़ते जाने के बाद अब सीएजी रिपोर्ट को भी बेकार बता देते हैं।

बाल बुद्धि की और उनके दल के सोच की बलिहारी.. इस मुद्दे पर फ्रांस सरकार गलत, भारत सरकार गलत, पूर्व और वर्तमान रक्षामंत्री की बात नहीं मानेंगे, सुप्रीम कोर्ट को नहीं मानेंगे, वायु सेना को भी नहीं मानेंगे, हम आरोप लगाएंगे और हम ही फैसला करके सबकी आंखों में धूल झोंकेंगे तथा स्वयं को जीता हुआ घोषित कर देंगे। यह और इनके छुटभैये, बड़भैये साथी.. आक्रोश, अराजकता फैलाने, सबके साथ असंयत, अपमानजनक व्यवहार करने वाले धूर्तता की सभी सीमाएं पार करने में जुटे हैं।

आज ही कहीं पढ़ा ।

यह धांधी परिवार तो सचमुच

परम शिवभक्त निकला ..

माँ के हाथ में बेलपत्र

बेटे के हाथ में बेलपत्र

दामाद के हाथ में बेलपत्र

बेल-पत्र= जमानत...

कहीं मामला और आगे ना बढ़ता जाए।

किस्से तो अनगिनत हैं पर अभी तो केवल एक आयल पेंट से बनाए गए लेंडस्केप की पेंटिंग का किस्सा।

इस पेंटिंग की कीमत है मात्र 28 करोड़ रुपये।....

भूतपूर्व रक्षा मंत्री भाग गए टिंटोनी ने अपने कार्यकाल में इसे खरीदा था वो भी सरकारी पैसे से।

अब जरा यह भी जान लीजिए कि इस अद्भुत अद्वितीय जादुई पेंटिंग को बनाने में अपना पूरा जीवन लगा देने वाले महान् कलाकार कौन हैं और इन कलाकार महोदय का नाम क्या है।

तो जनाब यह मोहतरमा हैं लालसाबेग एंटोनी। जी हाँ ! बाल बबुआ वाले भूतपूर्व रक्षामंत्री जी की घरवाली।

यह कलाप्रेमी रक्षामंत्री सेना के लिए हथियार की खरीदी के समय हाथ खड़े कर देते हैं। वहीं अपने ही घर में बनी हुई पेंटिंग को अपने ऑफिस में टांगने के लिए 28 करोड़ रुपये सरकार से झटक लेते हैं।

'फिर भी भाई लोग .. देश की आन बान शान और युवाओं के विश्वास पर खरे उतरे, अनथक परिश्रमी, विश्व के सर्वमान्य नेता को चोर चोर कहकर अनर्गल आलाप लगा रहे हैं।'

ये स्वयं को तो बना ही रहे हैं जनता को भी वैसा ही समझते हुए कर रहे है आंखों में धूल झोंकने का असफल प्रयास...!!

फिर भी कहते हैं हम हैं तुम्हारे खास...!!

हमें ही बंधाओ चुनाव में जीत की पक्की आस....!!

किंतु अनवरत् काम और विकास के उच्चतम कीर्तिमानों के समक्ष पूर्वकर्म .. घोटाले ही घोटाले ... बना रहे हैं इन्हें निराश . हताश . बदहवास !!

ऐसे में दिदिया जू की मुस्कराहट क्या कुछ कर पाएगी खास,

नहीं है किसी को उनसे भी ऐसी कोई आस।।

- नवल गर्ग

Naveen ( 1696 )

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