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भारतीय अपराधियों की पसंदीदा जगह ब्रिटेन

भारतीय अपराधियों की पसंदीदा जगह ब्रिटेन

- डॉ. कविता सारस्वत

कुछ दिन पहले खबर आई कि पीएनबी घोटाले के प्रमुख आरोपी नीरव मोदी ने ब्रिटेन से शरण मांगी है। इसके पहले ललित मोदी, विजय माल्या और संगीतकार नदीम सैफी जैसे कई लोग ब्रिटेन में शरण ले चुके हैं। बात सिर्फ इन तीन-चार चुनिंदा लोगों की ही नहीं है, देखा जाये तो भारत के अपराधी ब्रिटेन को अपने लिए सुरक्षित शरणस्थल महसूस करने लगे हैं। पिछले 5 सालों में लगभग साढ़े पांच हजार भारतीय लोगों ने ब्रिटेन में शरण पाने के लिए आवेदन किया है। हालांकि इसमें सभी लोग अपराधी नहीं हैं, लेकिन इनमें अपराधियों की संख्या भी काफी है। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत के अपराधियों के लिए ब्रिटेन एक सुरक्षित शरणगाह क्यों बनता चला जा रहा है।

भारत में अपराध करो, धोखाधड़ी करो और मौका मिलते ही फरार होकर ब्रिटेन से शरण मांग लो। फिर वहां की सरकार के रहमो-करम पर आजाद जीवन का आनंद लेते रहो। ये कैसी विचित्र स्थिति है, जो कहीं न कहीं यह सोचने के लिए मजबूर करती है कि क्या कायदा-कानून मानने वाला कोई देश दूसरे संप्रभु देश में अपराध करने वाले को मुक्तहस्त शरण दे सकता है। क्या इन अपराधियों को शरण देकर वह अपराध की मानसिकता को बढ़ावा नहीं देता। दरअसल, ब्रिटेन ने यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स (ईसीएचआर) पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत कहा गया है कि अगर वहां की अदालत को ऐसा लगता है कि किसी अपराधी को उसके देश में प्रत्यर्पित किए जाने पर मौत की सजा दी जा सकती है या प्रताड़ित किया जा सकता है, तो अदालत प्रत्यर्पण के अनुरोध को खारिज कर सकती है। यह दस्तावेज राजनीतिक वजहों से होने वाले प्रत्यर्पण को भी रोकता है।

विजय माल्या, ललित मोदी जैसे अपराधियों ने अपने खिलाफ चल रहे प्रत्यर्पण के मामले में यही दलील दी है कि भारत भेजे जाने पर उन्हें राजनीतिक तौर पर प्रताड़ित किया जा सकता है इसी तरह गुलशन कुमार मर्डर केस के आरोपित संगीतकार नदीम सैफी का तर्क था कि भारत भेजे जाने पर उसे सांप्रदायिक आधार पर झूठे केस में फंसा कर मौत की सजा दी जा सकती है। अब पीएनबी घोटाले के आरोपित नीरव मोदी ने भी ब्रिटेन में शरण पाने के लिए अर्जी दी है और उसने भी यही तर्क दिया है कि भारत में उसे राजनीतिक वजहों से प्रताड़ना का शिकार होना पड़ सकता है। जहां तक भारत और ब्रिटेन के बीच अपराधियों को शरण मिलने की बात है तो याद रखना चाहिए कि भारत और ब्रिटेन के बीच 1993 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। लेकिन, इस संधि को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए भारत सरकार ने अपनी ओर से कभी भी गंभीर कोशिश नहीं की। इसकी वजह से ब्रिटेन ने भी इस संधि को एक अनुपयोगी संधि की तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया। हालांकि,

जब ब्रिटेन ने इस संधि के तहत हत्या के एक आरोपित मनिंदर सिंह कोहली के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया, तो भारत सरकार ने 2008 में कोहली को उसके हवाले कर दिया। लेकिन, अगर भारत के अनुरोधों की बात की जाए, तो ब्रिटेन ने अभी तक प्रत्यर्पण के किसी भी अनुरोध पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। गोवा में बाल शोषण के एक मामले के आरोपित ब्रिटिश नागरिक रेमंड वर्ली के प्रत्यर्पण का मामला भी अभी तक ब्रिटेन ने रोक रखा है। इसी तरह विजय माल्या, ललित मोदी, म्यूजिक डायरेक्टर नदीम सैफी आदि के प्रत्यर्पण के मामलों पर भी ब्रिटेन सरकार अपनी ओर से कोई पहल नहीं की है। मामला अदालत के पास है और अदालत की कार्यवाही धीरे-धीरे चल रही है। ये कार्यवाही जबतक पूरी नहीं होगी, तब तक भारत के ये सभी अपराधी वहां खुली हवा में घूमते रहेंगे।

देखा जाए तो भारतीय अपराधियों के ब्रिटेन में शरण लेने की सबसे बड़ी वजह भी यही है। इन शातिरों को यह बात अच्छी तरह से मालूम है कि जब तक वहां की अदालत प्रत्यर्पण के अनुरोध पर अपनी ओर से कोई फैसला ने दे दे, तब तक ब्रिटेन उन्हें अपनी शरण में सारी सुविधाएं उपलब्ध कराता रहेगा और वे आजाद जिंदगी का मजा लेते रहेंगे। अदालती कार्यवाही की सुस्त रफ्तार की वजह से उन्हें लंबे समय तक मामले को खींचते रहने का मौका मिलेगा। साफ है कि अगर कोई अपराधी फरार होकर वहां पहुंच जाता है और वहां की सरकार से शरण प्राप्त कर लेता है, तो उसे भारत वापस लाना बहुत ही कठिन है।

ऐसे में अभी जरूरत भारत और ब्रिटेन के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि की समीक्षा की भी है। भारत सरकार को चाहिए कि वह ब्रिटेन पर दबाव डालकर उसे इस संधि के नियमों पर दोबारा विचार करने के लिए कहे, ताकि अपराधियों को वहां शरण न मिल सके। वस्तुतः इससे विचित्र स्थिति और क्या हो सकती है कि एक संप्रभु देश के अपराधी को दूसरा संप्रभु देश अपने यहां न केवल शरण दे रहा है, बल्कि सारी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है। होना तो ये चाहिए कि कोई भी अपराधी पूरी दुनिया में अपराधी ही समझा जाए और उसे किसी भी स्थिति में किसी भी सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिले। अभी नीरव मोदी ने ब्रिटेन में शरण पाने के लिए अर्जी दी है। भारत सरकार को चाहिए कि वह वहां की सरकार से बात कर इस आवेदन को मंजूर न होने दे। जिससे कि देश की संपत्ति को चूना लगाने वाले इस अपराधी को पकड़ कर भारत लाया जा सके और उसे उसके करतूत के लिए उचित दंड मिल सके।


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Swadesh Digital ( 0 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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