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इन लग्नों में करें दीपावली पूजन, लक्ष्मी जी ठहरेंगी आपके द्वार

59 साल बाद इस दिवाली पर बना ऐसा महासंयोग पंचमहापुरुषयोग शुक्र का मालव्य योग रहेगा लाभकारी गुरु शनि दुर्लभ योग इस वर्ष दीपावली को बनाएगा धन धान्य बुधवार की दिवाली बढ़एगी बैंक बैलेंस वहीं ग्लैमर, मीडिया व्यापर, जगत शेयर व प्रॉपर्टी के लिए रहेगी यादगार

इन लग्नों में करें दीपावली पूजन, लक्ष्मी जी ठहरेंगी आपके द्वार

नई दिल्ली/स्वदेश वेब डेस्क। कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। यह महागणपति, महालक्ष्मी एवं महाकाली की पौराणिक अथवा तांत्रिक विधि से साधना-उपासना का परम पवित्र पर्व है। इस दिन उद्योग-धंधे के साथ-साथ नवीन कार्य करने एवं पुराने व्यापार में खाता पूजन का विशेष विधान है। ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार अमावस्या तिथि 06 नवम्बर दिन मंगलवार को ही रात में 10 बजकर 06 मिनट से लग जा रही है जो 07 नवम्बर 2018 दिन बुधवार को रात में 09 बजकर 19 मिनट तक रहेगी, इस प्रकार उदया तिथि में अमावस्या का मान सूर्योदय से ही मिल रहा है।

हम आपको बता दें कि प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग मिल रहा है। इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है तथा प्रदोष काल में ही दीप प्रज्वलित करना उत्तम फल दायक होता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी ने बताया कि दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते है, जहां दिन विष्णु स्वरुप है वहीँ रात माता लक्ष्मी स्वरुपा हैं ,दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी कहते है कि धर्म शास्त्रों के अनुसार दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्त्व पूर्ण होता है । इसके अतिरिक्त इस दिन सूर्योदय से स्वाति नक्षत्र पूरा दिन व्याप्त रहेगी। साथ ही सूर्योदय से रात 07:24तक आयुष्मान योग तथा धूम्र योगा व्याप्त रहेगा। बुधवार के दिन दीपावली एवं अमावस्या का पूजन बाजार जगत के लिए उत्तम एवं शुभदायक होगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार धर्मशास्त्रोक्त दीपावली 'प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में विहित है, जिसमे प्रदोष काल का महत्त्व गृहस्थों एवं व्यापारियों हेतु महत्त्वपूर्ण होता है और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। इस वर्ष अमावस्या व्यापिनी महानिशिथ काल का आभाव है। वैसे महानिशीथ काल की पूजा स्थिर

लग्न सिंह में मध्यरात्रि 12:09 से 03:03 बजे के मध्य की जा सकती है । इस प्रकार निशा पूजा काली पूजा तांत्रिक पूजा के लिए स्थिर सिंह में किया जाएगा जो अति महत्त्वपूर्ण,अति शुभ एवं कल्याणकारी मुहुर्त्त है। शेष रात्रि भोर में सूप बजाकर दरिद्र का निस्तारण एवं लक्ष्मी का प्रवेश कराया जाएगा।

प्रदोष काल शाम 05:42 से 07:37 बजे तक रहेगा।

दिवाली शुभ मंगलकारी मुहूर्त्त

(1) स्थिर कुम्भ लग्न दिन में 01:43 से 03:13 बजे तक रहेगा |

(2) प्रदोष काल व्यापिनी स्थिर वृष लग्न शाम को 06:11 बजे से लेकर 08:15 बजे

तक विद्यमान रहेगा।

चार राशियों की चमकेगी किस्मत

मिथुन राशि :- अत्यंत श्रेष्ट किस्मत बदलेगी

सिंह राशि :- समृद्धि कार्य पूर्ण होंगे, रातों रात राजनैतिक कद बढ़ेगा

तुला राशि :-जीवन में भरेंगे खुशियों के रंग, धन की नहीं होगी कमी

कुम्भ राशि :-बड़ा सकारात्मक परिवर्तन होगा अगर आप राजनैतिक जुड़े होते हो तो पार्टी आपको प्रत्याशी बना सकती है

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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