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विशेष दिन : एक साथ पूजे जाएंगे शिव और शनि

विशेष दिन : एक साथ पूजे जाएंगे शिव और शनि

ग्वालियर। श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति की जाती है, लेकिन इस बार शनि अमावस्या और हरियाली अमावस्या एक साथ पडऩे से शिव और शनि साथ-साथ पूजे जाएंगे। कर्क राशि में चतुगृही योग बनने से इस मौके पर शिव और शनि की विशेष कृपा मिलेगी।

श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, लेकिन शनिवार को अमावस्या होने की वजह से इस बार हरियाली अमावस्या व शनिश्चरी अमावस्या का अद्भुत संयोग हो रहा है। बालाजी धाम के ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी ने बतााया कि 11 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या है, जो कि हरियाली अमावस्या के रूप में मनाई जाती है। हरियाली अमावस्या इस बार शनिवार को होने की वजह से शनिश्चरी अमावस्या भी हो गई है। इस दिन भक्त एक ओर जहां भगवान भोले और प्रकृति की पूजा करेंगे वहीं दूसरी ओर शनिदेव का पूजन कर अपने कष्टों से मुक्ति हासिल कर सकेंगे। इस मौके पर सूर्य, बुध, चन्द्र, राहु, कर्क राशि में तो मंगल व केतु मकर राशि में तथा शुक्र नीच राशि में रहेंगे। यह ग्रहों की गणना 11 अगस्त को सूर्य के समय अश्लेषा नक्षत्र के साथ रहेगी। हरियाली अमावस्या पर ग्रहों का यह महासंयोग शिव और शनि की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभकारी होगा। पितृ पीड़ा एवं शनि जनित पीड़ा शिव और शनि की भक्ति से दूर होगी।

कैसे करेंगे पूजन

शनि से पीडि़त जातक सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक करें। इससे रोग नाश होंगे व शत्रुओं पर विजय हासिल होगी। पितृ शांति के लिए पीपल पर सरसों के तेल का दिया जलाएं तथा दूध में काले तिल डालकर चढ़ाएं। शनि मंत्रों का जाप करें तथा दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करें।

राशि अनुसार उपाय

मेष-सरसों का तेल दान दें।

वृषभ- चौमुखा दीपक भैरव मंदिर में चढ़ाएं।

मिथुन-दीपक में काले उड़द व शक्कर जलाएं।

कर्क-पीपल पर दूध चढ़ाएं।

सिंह-उड़द व काले वस्त्रों का दान करें।

कन्या-कच्चे कद्दू का दान करें।

तुला- कुष्ठ रोगियों को भोजन कराएं।

वृश्चिक- शमी के वृक्ष का पूजन करें।

धनु- तिल व तेल का दान करें।

मकर-हनुमान चालीसा का पाठ करें।

कुंभ- पीपल पर दीपक रखें।

मीन- सरसों का तेल व लोहे का दान करें

सूर्य ग्रहण का असर नहीं

ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी ने बताया कि हरियाली अमावस्या को इस बार साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी है, लेकिन सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने से इसका असर भी यहां नहीं होगा और न मंदिरों के पट बंद होंगे और न ही कोई सूतक लगेगा, जिससे शनि और शिव मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहेगा।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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