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अखंड साम्राज्य योग में विराजेंगी मां भवानी, भक्तों का करेंगी मंगल

इस बार नाव पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा पूरे नौ दिन का होगा नवरात्र महोत्सव

अखंड साम्राज्य योग में विराजेंगी मां भवानी, भक्तों का करेंगी मंगल

ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे हैं, जो 18 अक्टूबर तक चलेंगे। हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का शुभारंभ होता है, जो नवमी तक चलता है। इन नौ दिनों में माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जिनमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ अलग-अलग रूप हैं। ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी के अनुसार इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के होंगे। मां दुर्गा हर नवरात्र में अलग-अलग वाहन पर सवार होकर आती हैं। इस बार मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आएंगी, जिससे भक्तों का मंगल ही मंगल होगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार मां अखण्ड साम्राज्य योग में विराजेंगी। वृश्चिक लग्न एवं लाभ अमृत के चौघडिय़ा मुहूर्त में नवरात्र में माता की घटस्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा। नवरात्र प्रारंभ होने के साथ ही बाजारों में तेजी और खरीदारी का दौर शुरू हो जाएगा।

माता के भक्तों को होगा लाभ:- ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार माता की घटस्थापना एवं मूर्ति स्थापना के समय अखण्ड साम्राज्य योग बन रहा है। इस योग से माता के भक्तों को असीम कृपा की प्राप्ति होगी।

नवरात्र में होने वाले शुभ कार्य:- शारदीय नवरात्र में हर तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। नवरात्र के नौ दिन बहुत ही शुभ होते हैं। इन दिनों में किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है। इन खास दिनों में लोग गृह प्रवेश और नए वाहन की खरीदारी कर सकते हैं।

गजलक्ष्मी रूप में होगी हाथी की पूजा

महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक चलता है। महालक्ष्मी व्रत में 16 दिनों तक व्रत और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस वर्ष महालक्ष्मी व्रत का समापन दो अक्टूबर को गजलक्ष्मी स्वरूप में हाथी पूजा के साथ होगा। ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी ने बताया कि इस दिन महालक्ष्मी जी की पूजा आठ स्वरूपों में की जाती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस दिन व्रत करके लकड़ी की चौकी पर रेशमी वस्त्र बिछाएं। इसके बाद देवी की सवारी हाथी को स्थापित करें। इसके बाद अखण्ड ज्योति स्थापित कर सोलह प्रकार से हाथी की पूजा करें। हाथी को मेवा, मिठाई, दूध और बर्फी का भोग लगाएं। नए पीले सूत में 16-16 की संख्या में 16 गांठें लगाकर लक्ष्मी जी को अर्पित करें फिर बेसन से बने सोलह श्रंृगार चढ़ाएं। इसके उपरांत रात में चन्द्रमा निकलने पर तारों को अघ्र्य देते हुए महालक्ष्मी को अपने घर आने के लिए निमंत्रण दें।

दिन के अनुसार मां की पूजा

-10 अक्टूबर, नवरात्र का पहला दिन, घट व कलश स्थापना, मां शैलपुत्री व मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।

-11 अक्टूबर, नवरात्र का दूसरा दिन, मां चन्द्रघंटा की पूजा।

-12 अक्टूबर, नवरात्र का तीसरा दिन, मां कुष्मांडा की पूजा।

-13 अक्टूबर, नवरात्र का चौथा दिन, मां स्कंदमाता की पूजा।

-14 अक्टूबर, नवरात्र का पांचवां दिन, मां सरस्वती की पूजा।

-15 अक्टूबर, नवरात्र का छठवां दिन, मां कात्यायनी की पूजा।

-16 अक्टूबर, नवरात्र का सातवां दिन, मां कालरात्रि, मां सरस्वती की पूजा।

-17 अक्टूबर, नवरात्र का आठवां दिन, मां महागौरी, दुर्गा अष्टमी एवं नवमी पूजन।

-18 अक्टूबर, नवरात्र का नौवां दिन, नवमी हवन, नवरात्र जागरण।

-19 अक्टूबर, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी पर्व, शस्त्र पूजन।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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