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अखाड़ों के शाही प्रवेश के साथ कुम्भ की अनौपचारिक शुरुआत 25 से होगी

अखाड़ों के शाही प्रवेश के साथ कुम्भ की अनौपचारिक शुरुआत 25 से होगी

तीर्थराज प्रयाग में 15 जनवरी से चार मार्च तक आयोजित होने वाले कुम्भ मेले की अनौपचारिक शुरुआत 25 दिसम्बर को ही हो जाएगी। इस दिन से मेला क्षेत्र में अखाड़ों का शाही प्रवेश प्रारम्भ हो जाएगा। पहले दिन श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा और श्री पंच अग्नि अखाड़ा का शाही प्रवेश होगा। शनिवार को जूना और अग्नि के अलावा आवाहन अखाड़ों के साधु-संतों ने मेला क्षेत्र में धर्म ध्वजा स्थापित की।

तीनों अखाड़ों के संतों ने आज मध्याह्न में कुम्भ मेला क्षेत्र में अपनी-अपनी छावनियों में वैदिक मंत्रों के साथ धर्म ध्वजा की स्थापना की। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़ा के संरक्षक महन्त हरि गिरि महाराज ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि गेरुआ रंग की धर्म ध्वजा सनातन धर्म और हमारे राष्ट्र का प्रतीक है। अनेक देवी देवताओं की पूजा अर्चना करके मेला क्षेत्र में इसे स्थापित कर चालीस दिन निवास करने के लिए अनुमति ली जाती है।

उन्होंने बताया कि धर्म ध्वजा के साथ 52 सिद्धियों का वास होता है। इनमें 52 मणियां भी विद्यमान रहती हैं। इसीलिए इसकी ऊंचाई 52 हांथ रखी जाती है। उन्होंने बताया कि धर्म ध्वजा को सहारा देने के लिए उसमें बाधी गयीं चार रस्सियां आद्य शंकराचार्य भगवान द्वारा स्थापित चारों पीठ को इंगित करते हैं।

अखाड़ों का शाही प्रवेश 25 से

महंत हरि गिरी ने आगे बताया कि कुम्भ मेला क्षेत्र में अखाड़ों का शाही प्रवेश 25 दिसम्बर से शुरु हो जाएगा। पहले दिन श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा और श्री पंच अग्नि अखाड़ा कीडगंज में यमुना तट स्थित मौज गिरि आश्रम से मेला क्षेत्र में शाही प्रवेश करेगा। वहीं श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा का शाही प्रवेश 27 दिसम्बर को है।

इसके बाद श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी पहली जनवरी और श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी दो जनवरी को शाही प्रवेश करेगा। श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा और श्री शंभू पंच अटल अखाड़ा का मेला क्षेत्र में शाही प्रवेश एक साथ तीन जनवरी को निर्धारित है। इसी तरह श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन और श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल क्रमशः 10, 11 और 13 जनवरी को कुम्भ मेला क्षेत्र में शाही प्रवेश करेंगे।

कुम्भ की हमेशा से यह परम्परा रही है कि मेला शुरू होने से पहले सभी अखाड़ों की शाही सवारी निकलती है और संत समाज गाजे बाजे के साथ कुम्भ क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। अखाड़ों के शाही प्रवेश का जुलूस बहुत बड़ा होता है, जिनमें हजारों साधु-संत और नागा संन्यासी शामिल रहते हैं। अखाड़ों के आचार्य और महामंडलेश्वर रथों पर सवार होकर शाही अंदाज में मेला क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। जुलूस में हाथी, घोड़े और बैंडबाजे भी भारी संख्या में रहते हैं। यह दृश्य बड़ा ही अनुपम होता है। इसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु सड़क के किनारे खड़े रहते हैं। कुम्भ प्रशासन के अधिकारी मेला क्षेत्र में प्रवेश करते ही साधु-संतों का माला पहनाकर स्वागत करते हैं। इस बार इसका सिलसिला 25 दिसम्बर से शुरू हो रहा है। इससे पहले विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों ने पिछले माह के अंतिम सप्ताह से प्रयागराज में जूटना प्रारम्भ किया था। अखाड़ों की भाषा में इसे नगर प्रवेश कहा जाता है।

कुम्भ के दौरान तीन शाही स्नान

विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, आचार्य और महामंडलेश्वर कुम्भ मेला के दौरान प्रतिदिन पवित्र संगम में तीन बार स्नान करते हैं। लेकिन, पूरे मेले की अवधि में तीन प्रमुख स्नान पर्वों (मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी) के अवसर पर ये शाही स्नान करते हैं। यह दृश्य इतना रोमांचक होता है, जिसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आधी रात ही इकट्ठा हो जाते हैं। इस बार शाही स्नान की तिथियां क्रमशः 15 जनवरी, चार फरवरी और दस फरवरी को हैं। (हि.स.)

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Swadesh Digital ( 10031 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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