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दिल्ली में दूषित पानी बनेगा चुनावी मुद्दा?

-दूषित हवा के बाद अब दूषित पानी -भाजपा ने पानी पर बढ़ाई केजरीवाल की परेशानी

दिल्ली में दूषित पानी बनेगा चुनावी मुद्दा?

नई दिल्ली। दिल्ली में आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अघोषित चुनावी बिगुल बजा दी है। अगले साल फरवरी महीने में होने वाले चुनावों की जमीन तैयार करने के लिए पार्टी का चिंतन-मनन से लेकर कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने का कार्य जोरों पर है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने दिल्ली को लेकर सक्रियता दिखाई है। पार्टी की दिल्ली इकाई के संगठनात्मक ढांचे को तैयार किया जा रहा है। जिसमें 19 से अधिक समितियां बनाई गईं हैं। दिल्ली के हर कद्दावर नेता को एक समिति का दायित्व सौंपा गया है। मोटे तौर पर नई दिल्ली से सांसद मीनाक्षी लेखी महिलाओं के बीच जाकर जनसंपर्क करेंगी। दक्षिण दिल्ली से सांसद ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की पहुंच बढाएंगे तो चांदनी चौक से सांसद व स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन बौद्धिक वर्ग के साथ तालमेल बिठाएंगे। इसी तरह प्रवेश वर्मा और हंसराज हंस को पिछड़ा व अनुसूचित वर्ग में पैठ बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। जनसंपर्क का यह कार्य निरंतर व लगातार चलते रहना है। इसके इतर पार्टी की दिल्ली इकाई ने केजरीवाल सरकार को घेरने की योजनाबद्ध तरीके से रणनीति तैयार की है।

राफेल मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज करने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले कांग्रेस को घेरा। अब केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के दिल्ली में दूषित पानी पर दिए गए बयान के बाद भाजपा की दिल्ली इकाई ने केजरीवाल सरकार को घेर है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों से जो पानी के सैम्पल आए हैं उस पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग दूषित पानी से डरे और भयभीत हैं। केजरीवाल धृतराष्ट्र बने आंखों पर पट्टी बांधे निश्चिंत होकर समय पास कर रहे हैं।

दरअसल, भाजपा को दिल्ली की सत्ता गवांए दो दशक से ज्यादा समय हो गया। दिल्ली के लोकप्रिय नेता मदनलाल खुराना के बाद कोई ऐसा नेता नहीं आया जो सर्वस्वीकार हो। शीला दीक्षित ने भाजपा से सत्ता छीनकर पंद्रह साल शासन किया। फिर नाटकीय तरीके से आप पार्टी का जन्म हुआ, और उसकी सरकार मेट्रो की स्पीड में दौड़ रही है। एक समय अजेय हो चुकी भाजपा का रथ भी आप पार्टी ने दिल्ली में ही रोका था। 2015 में भाजपा ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में भाजपा सरकार बनाने तो दूर महज तीन सीटों पर सिमट गई थी। कांग्रेस तो शून्य के स्कोर पर पहुंच गई थी। भाजपा अबकी बार दिल्ली को चुनौती मानकर चल रही है। इसकी तैयारी अब जमीन पर दिखने लगी है। पूरी दिल्ली इकाई प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के नेतृत्व में यूनिट की तरह कार्य करती नजर आ रही है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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