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महात्मा गांधी हत्याकांड की दोबारा जांच कराने की मांग संबंधी याचिका खारिज

महात्मा गांधी हत्याकांड की दोबारा जांच कराने की मांग संबंधी याचिका खारिज

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महात्मा गांधी हत्याकांड की दोबारा जांच कराने की मांग पर फिर से विचार करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट इसके पहले भी इस मांग को खारिज कर चुका है। याचिकाकर्ता ने इसी फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी।

बीते 28 मार्च,2018 को सुप्रीम कोर्ट ने महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच करने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इस याचिका में कोई मेरिट नहीं है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अमेरिका से लाए गए कुछ दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपने की कोशिश की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लेने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता ने कहा था कि ये दस्तावेज भारत सरकार ने बैन कर रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो दोबारा जांच का आदेश तब तक नहीं दे सकता जब तक इस बात के पुख्ता साक्ष्य नहीं मिलते कि रहस्यमयी चौथी गोली से गांधी जी की हत्या हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि इतनी देर के बाद याचिका क्यों की गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आपकी यह याचिका क्यों सुनी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा था कि आपने जिस फोटोग्राफ को साक्ष्य के रूप में पेश किया है, उसे साक्ष्य कैसे माना जाए जब फोटोग्राफर ही जिंदा नहीं है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अमरेंद्र शरण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो ये बताए कि महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और ने की हो। उन्होंने कहा था कि याचिकाकर्ता द्वारा किया गया चार गोली की थ्योरी के पक्ष में कोई साक्ष्य नहीं है। अमरेंद्र शरण ने यह भी कहा था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो ये साबित करे कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे किसी और का हाथ था। इसलिए अब इस मामले की दोबारा जांच की कोई जरूरत नहीं है।

दरअसल मुंबई के पंकज फड़नीस ने याचिका दायर कर कहा था कि अमेरिका के पास काफी गोपनीय जानकारी थी। इसे छुपाया गया। महात्मा गांधी की हत्या में ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है, इसलिए इसकी दोबारा जांच होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इतने साल बाद गवाह और सबूत कहां से आएंगे। क्या इस केस में पर्याप्त सबूत हैं कि दोबारा जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। क्या लिमिटेशन एक्ट के तहत इतने दिनों बाद इस मामले की दोबारा जांच की जा सकती है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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