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इस बार आसान नहीं ज्योतिरादित्य की डगर !

-भाजपा उम्मीदवार केपी यादव रह चुके हैं सिंधिया के करीबी, परिचित हैं हर चाल से

इस बार आसान नहीं ज्योतिरादित्य की डगर !

अशोकनगर। गुना संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया की डगर इस बार आसान नहीं दिख रही। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस महासचिव सिंधिया के मुकाबले केपी यादव को उतारकर उनकी मुश्किल बढ़ा दी है। केपी यादव कभी सिंधिया के बेहद करीबी रहे हैं। उन्हें मालूम है कि सिंधिया कब कौन सी चाल चलते हैं। ज्योतिरादित्य के पिता पूर्व केंद्रीयमंत्री माधवराव सिंधिया की कांग्रेस में धाक रही है। 30 सितंबर 2001 को गुना से तत्कालीन कांग्रेस सांसद माधवराव सिंधिया के निधन से इस सीट पर 2002 में हुए उपचुनाव में ज्योतिरादित्य करीब साढ़े चार लाख मतों से जीते थे। इसके बाद वह लगातार जीत की हैट्रिक बना चुके हैं। मगर इस बार वह चौका लगा पाते हैं, यह कह पाना अभी मुश्किल है। गुना को सिंधिया खानदान का गढ़ माना जाता है। इसलिए कुछ लोग ज्योतिरादित्य को यहां से अपराजेय योद्धा मान रहे हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के वक्त ज्योतिरादित्य यहां से करीब सवा लाख मतों से जीत पाये थे। ज्योतिरादित्य का यह पांचवां चुनाव है। भाजपा ने हर बार यहां से उम्मीदवार बदला है। मगर स्थानीय उम्मीदवार की बात आने पर अशोकनगर को महत्व दिया है। इसका कारण अशोकनगर जिले में सिंधिया के प्रभुत्व को कम करना है। गुना और शिवपुरी जिले की सीटों में सिंधिया को अच्छी बढ़त नहीं मिलती है। वह यहां से पिछड़ भी जाते हैं। मगर अशोकनगर उनका साथ देता है। पिछले चुनाव में अशोकनगर जिले सिंधियां ने सत्तर हजार से अधिक मतों से बढ़त की थी। भाजपा ने इस गढ़ को कमजोर करने के लिए अशोक नगर के केपी यादव पर दांव लगाया है। केपी डेढ़ साल पहले तक सिंधिया की आंखों के तारा थे। वह उनके बेहद करीबी माने जाते रहे हैं। मुंगावली उपचुनाव में टिकट कटने से वह भाजपा में शामिल हो गए थे। केपी अगर अशोकनगर जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में सिंधिया के वोट बैंक में सेंध लगा पाए तो निश्चिततौर पर परिणाम चौंकाने वाला होगा।

गुना संसदीय क्षेत्र में तीन जिले हैं। इस सीट में शिवपुरी जिले की शिवपुरी, कोलारस और पिछोर, गुना जिले की गुना और बमोरी, अशोकनगर जिले की मुंगावली, चंदेरी और अशोकनगर विधानसभा सीटें आती हैं। विधानसभा चुनाव में गुना, शिवपुरी और कोलारस पर भाजपा ने कब्जा किया है। पिछोर, बमोरी और अशोकनगर जिले की तीनों सीटों पर कांग्रेस विजय हुई है। इससे पहले कांग्रेस और भाजपा के पास चार-चार सीटें थीं।

भाजपा उम्मीदवार केपी इस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और पूर्व मंत्री रामपाल सिंह के करीबी हैं। विधानसभा चुनाव के समय ईसागढ़ नगर परिषद अध्यक्ष भूपेन्द्र द्विवेदी के भाजपा में शामिल होने से अशोकनगर में पार्टी का आधार मजबूत हुआ है। विधानसभा चुनाव में हारने के बावजूद दोनों नेताओं ने कांग्रेस के छक्के छुड़ा दिए। सिंधिया के लिए परेशानी वाली बात यह है कि कोलारस विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी भी सिंधिया का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। रघुवंशी शिवपुरी से भी विधायक रह चुके हैं। तीनों नेताओं का अपने-अपने जिले में व्यापक प्रभाव है।

लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रहे सिंधिया गुना पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहे। मगर उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे क्षेत्र में सक्रिय हैं। लगातार दौरे कर रही हैं। प्रियदर्शनी राजे का एक प्रवास तो नौ दिन का रहा। सिंधिया के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कांग्रेस ऊपरी तौर पर भले ही एक दिख रही हो पर अंदरखाने कई हिस्सों में बंटी हुई है। गुना लोकसभा क्षेत्र में तीन सीटों पर दिग्विजय सिंह समर्थकों की तादाद अच्छी खासी है। पिछोर से केपी सिंह कक्काजू मंत्रिमंडल में जगह न मिलने का दोषी सिंधिया को ही मानते हैं।

गुना लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को शहरी क्षेत्रों में हमेशा बढ़त मिली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस आगे निकल जाती है। मगर इस बार परिस्थितियां बदली नजर आ रही हैं। गांवों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की तारीफ हो रही है। इस वक्त लोग अपने राज्य की कांग्रेस सरकार से भी नाखुश हैं। लोगों का कहना है कि किसानों की कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया गया है। समर्थन मूल्य पर फसल नहीं खरीदी जा रही।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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