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विजयपुर विधायक की प्रसूता बेटी के ऑपरेशन के लिए नहीं मिले डॉक्टर, एंबुलेंस भी आई ढाई घंटे लेट

विजयपुर विधायक की प्रसूता बेटी के ऑपरेशन के लिए नहीं मिले डॉक्टर, एंबुलेंस भी आई ढाई घंटे लेट

श्योपुर। गर्भवती बेटी का प्रसव करवाने जिला अस्पताल आए विजयपुर विधायक सीताराम आदिवासी को अस्पताल की बदहाल सेवाओं ने 5 घंटे तक चकरघिन्नी कर दिया। इसके बाद भी विधायक की बेटी का प्रसव नहीं हुआ। पहले तो जांच कराने के लिए डेढ़ घंटे इधर-उधर भटके। जांच हो गईं तो ऑपरेशन के लिए एनेस्थीसिया देने वाला डॉक्टर ही अस्पताल में नहीं मिला। व्यवस्थाओं से हार मानकर भाजपा विधायक ने बेटी को रेफर करा लिया तो ढाई घंटे तक एंबुलेंस ही नहीं आई।

भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी की बेटी धोड़ीबाई (26) पत्नी सोनू आदिवासी निवासी मयापुर 9 माह की गर्भवती हैं। सोमवार की सुबह 10:30 बजे प्रसव पीड़ा उठने के बाद विधायक बेटी को लेकर जिला अस्पताल आए थे। विधायक ने करीब 35 मिनट तक डॉक्टर का इंतजार किया। डॉक्टर सीमा शाक्य ने चेकअप के बाद सोनोग्राफी की जांच लिख दी। इसके बाद विधायक अपनी गर्भवती बेटी को लेकर सोनोग्राफी जांच केन्द्र पर गए, लेकिन वहां जांच का नंबर नहीं आया। इसके बाद विधायक अपनी समस्या लेकर सिविल सर्जन डॉ. आरबी गोयल के पास पहुंचे। सिविल सर्जन के हस्तक्षेप के बाद विधायक की बेटी की सोनोग्राफी जांच हुई।

सोनोग्राफी रिपोर्ट देखने के बाद डॉ. सीमा शाक्य ने धोड़ीबाई के शरीर में पानी की कमी बताते हुए ऑपरेशन से प्रसव की बात कही। इसके बाद विधायक बेटी को लेकर ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठ गए। कुछ देर बाद नर्सों ने विधायक को बताया कि एनेस्थीसिया डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं है और आने की संभावना शाम तक नहीं है। इसलिए विधायक ने अपनी बेटी का प्रसव शिवपुरी कराने की कहकर उसे रेफर करा लिया। रेफर कराने में विधायक को 1:15 बज गया।

एंबुलेंस के लिए किया सवा दो घंटे इंतजार

रेफर कराने के बाद विधायक ने दोपहर 1:15 बजे एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं आई। विधायक को एंबुलेंस प्रबंधन ने जवाब दिया कि एक एंबुलेंस कोटा व दो गांवों में प्रसूताओं को छोड़ने गई हैं। करीब ढाई दो घंटे तक विधायक ने एंबुलेंस का इंतजार किया। पौने चार बजे एंबुलेंस आई तब विधायक अपनी बेटी को लेकर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना हुए।

तीन में से दो छुट्टी पर, एक शिविर में

जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया इंजेक्शन लगाने वाले तीन स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, लेकिन इनमें से सोमवार को एक भी अस्पताल में नहीं था। एक डॉक्टर वीरेंद्र शाक्य तो नसबंदी शिविर में थे। इसके अलावा दो अन्य डॉक्टर योगेश रावत व डॉ. कीर्ती बंसल हैं, जो छुट्टी पर चल रहे हैं। डॉ. कीर्ती बंसल को सवा दो महीने से अस्पताल ही नहीं आईं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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