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सुमित्रा महाजन बोली - राज्य और केन्द्र सरकार दिव्यांगों के कल्याण के लिये कृतसंकल्पित

985 दिव्यांगों को 95 लाख के जीवनोपयोगी सहायक उपकरण वितरित

सुमित्रा महाजन बोली - राज्य और केन्द्र सरकार दिव्यांगों के कल्याण के लिये कृतसंकल्पित

इंदौर। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की मुख्य आतिथ्य में सोमवार को इंदौर के रवीन्द्र नाट्यगृह में सामाजिक न्याय विभाग के तत्वावधान में 985 दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को 95 लाख रुपये मूल्य के जीवनोपयोगी सहायक उपकरण वितरित किये गये। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि शासन दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों की मदद के लिये कृतसंकल्पित है। दुर्भाग्य से कुछ लोगों में कुछ शारीरिक कमी रह जाती है। सरकार सहायक उपकरण के माध्यम से उस कमी को पूरा करने का प्रयास कर रही है। दिव्यांगजन शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपना जीवन स्तर सुधार सकते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने वरिष्ठ नागरिकों के लिये भी कई कल्याणकारी योजनाएँ शुरू की है, उनमें वृद्धावस्था पेंशन और वृद्धाश्रम प्रमुख हैं। दिव्यांगजन अपने आप को कमजोर न समझें। वे शासन, समाज और परिवार से सहयोग लेकर असाधारण काम कर सकते हैं। दिव्यांग तैराक शरद ने एशियाई खेल में पदक हासिल किया है। इसी प्रकार नृत्यांगना सुधा चन्द्रन ने कृत्रिम पैर से फिल्मों में असाधारण काम करके दिखाया है। कई दिव्यांग तो एवरेस्ट शिखर पर चढ़ चुके हैं।

इस अवसर पर केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने दिव्यांगों के लिये अनेक योजनाएँ शुरू की है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सकें। केन्द्र और राज्य शासन ने दिव्यांगों के लिये आरक्षण, पेंशन, सहायक उपकरण, विवाह प्रोत्साहन, अनुदान सहित स्वरोजगार ऋण आदि की सुविधा मुहैया कराई है। सैकड़ों विकलांगों ने योजनाओं का लाभ लेकर अपना जीवन स्तर सुधार लिया है। केन्द्र सरकार को पिछले चार वर्षों में छ: गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हो चुका है।

उन्होंने कहा कि देश में 1300 मूकबधिरों का काकलियर ट्रांसप्लांट किया गया है। मूकबधिर अब बोलने और सुनने लगे हैं। आज इस शिविर में 70 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्रायसिकिल दी जा रही है, जिसमें 25 हजार रूपये सब्सिडी है और 12 हजार रुपये स्वयं लगाना है। यह 12 हजार रूपये समाजसेवी संगठन भी दे सकते हैं। यह ट्रायसिकिल बैटरी से संचालित है। इसमें डीजल, पेट्रोल की कोई आवश्यकता नहीं है और आरटीओ के लाइसेंस की भी जरूरत नहीं पड़ती है। इस ट्रायसिकिल से दिव्यांगजन सुबह पेपर और दूध भी बांट सकते हैं। दोपहर को आइसक्रीम आदि भी बेच सकते हैं। एक बार चार्ज करने पर इस ट्रायसिकिल की बैटरी 65 किमी तक चलती है।

उन्होंने बताया कि देश में सभी दिव्यांगों के यूनिवर्सल आईडी कार्ड बनाये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान में यह काम सबसे तेजी से हो रहा है। समाज का सबसे कमजोर वर्ग दिव्यांग ही है। इसे संरक्षण की सख्त जरूरत है। उन्होंने शिविर में घोषणा की कि इंदौर में दिव्यांग पार्क बनाया जायेगा, जिसके लिये इंदौर विकास प्राधिकरण 50 करोड़ रुपये की सहयोग राशि देगा।

कार्यक्रम को महापौर मालिनी गौड़ ने भी सम्बोधित किया। इस शिविर में वंचित दिव्यांगो को सर्वेक्षण कर अगले शिविर में सहायक उपकरण वितरित किये जाएंगे। इस अवसर पर इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शंकर लालवानी, विधायक राजेश सोनकर, महेन्द्र हार्डिया, सुदर्शन गुप्ता, आयुक्त नि:शक्तजन कल्याण संदीप रजक और बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिक मौजूद थे।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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