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भय्यूजी आत्महत्या मामला पांच दिनों में 15 से ज्यादा के बयान

संत भय्यूजी महाराज की मौत के बाद पुलिस ने पांच दिन के भीतर 15 से ज्यादा लोगों के बयान लिए लेकिन 'महाराज से पर्दा नहीं उठा।

भय्यूजी आत्महत्या मामला पांच दिनों में 15 से ज्यादा के बयान

इंदौर । संत भय्यूजी महाराज की मौत के बाद पुलिस ने पांच दिन के भीतर 15 से ज्यादा लोगों के बयान लिए लेकिन 'महाराज से पर्दा नहीं उठा। महाराज से जुड़े लोगों ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। पुलिस उन संदेहियों से भी पूछताछ करने में कतरा रही है, जो भय्यूजी महाराज को लगातार कॉल कर रहे थे। सीएसपी ने डॉ. आयुषी से तो मंगलवार रात ही पूछताछ पूरी कर ली, जबकि कुहू के बयान 5 दिन बाद बयान लिए गए। जब तक वह परिजन के दबाव में आ चुकी थी। मामले में पुलिस ने कुंछ लोगों से पूछताछ की है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं ।

इसके अलावा एक बड़ा खुलासा हुआ है कि उनके फोन पर कुछ ऐसे कॉल आते थे जिसको लेकर भय्यू जी विचलित हो जाते थे। फोन करने वाले से महाराज अकेले में बात करते थे। यह भी पता चला है कि महाराज ने सात-आठ महीने में अपनी कई संपतियों का निपटारा कर दिया था। वे सब कुछ समेटकर बेटी को लंदन भेजकर सेट करने के प्रयास में थे। महाराज के इस कदम पर उनकी दूसरी पत्नी के परिवारवाले दखल दे रहे थे।

पुणे का अमोल भी संदेही

अमोल अविनाश चव्हाण (पुणे स्थित आश्रम का सेवादार) भी मुख्य संदेही है। वह भय्यूजी महाराज के लगातार संपर्क में था। उसने रविवार रात और सोमवार दोपहर दिनभर कॉल किए थे। सीएसपी ने उसके बयान ही नहीं लिए। शनिवार दोपहर वह पुणे चला गया।

अमोल के फोन से 21 इनकमिंग और 22 आउट गोइंग कॉल व 2 एसएमस आए हैं। महाराज की सास रानी शर्मा के मुताबिक महाराज रविवार रात को उस वक्त तनाव में थे जब अमोल उन्हें बार-बार कॉल कर रहा था। सोमवार को पुणे जाते वक्त भी अमोल की दोपहर 12 से 6 बजे के बीच 11 बार बातें हुईं। इसके बाद भय्यूजी महाराज रास्ते से लौट आए।

बुटिक संचालिका की भूमिका संदिग्ध

पलासिया निवासी बुटिक संचालिका और भय्यूजी महाराज की सोमवार दोपहर राऊ स्थित रेस्तरां में मुलाकात हुई थी। सीएसपी ने उसके बयान लिए और कहा कि वह उसके बेटे साहिल और भय्यूजी महाराज की बेटी कुहू के एडमिशन के बारे में चर्चा करने गई थी।

सीएसपी और बुटिक संचालिका की भूमिका संदिग्ध है। जांच के दौरान पता चला कि बुटिक संचालिका 6 जून से महाराज को कॉल कर रही थी। महाराज की कॉल डिटेल में 6 जून से 11 जून तक 22 आउट गोइंग और 9 इनकमिंग कॉल व एक एसएमएस मिला है। मौत के पहले वाले दिन यानी सोमवार को तो उस महिला ने 6 बार कॉल किए थे। इसी तरह 8 जून को उसके फोन पर 8 बार बातचीत हुई।

विनायक जानते हैं राज

पुलिस ने विनायक के बयान लिए लेकिन ठोस जानकारी नहीं जुटा पाई। आश्रम और आर्थिक जानकारियां जुटाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। सीएसपी के मुताबिक विनायक ने बताया कि सब कुछ सामान्य था।

विनायक दुधाले ही भय्यूजी महाराज के सबसे विश्वसनीय सेवादार रहे हैं। उनके बोलने पर वे कुहू के पास डेढ़ महीने पुणे रहे थे। डॉ. आयुषी और कुहू के बीच चल रही कलह की वे हर बात जानते हैं। भय्यूजी महाराज उनसे बात करते वक्त अन्य कर्मचारी और डॉ. आयुषी को भी कमरे से निकाल देते थे। वे भय्यूजी महाराज के जीवन में चल रही हर बात की जानकारी रखते थे।






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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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