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ग्वालियर में त्रिकोणीय संघर्ष के आसार, भाजपा-कांग्रेस के साथ बसपा भी मैदान में

ग्वालियर में त्रिकोणीय संघर्ष के आसार, भाजपा-कांग्रेस के साथ बसपा भी मैदान में

ग्वालियर। नाम निर्देशन पत्र शुरू होने के साथ ही ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में त्रिकोणीय संघर्ष की तस्वीर साफ होती दिख रही है। भाजपा-कांग्रेस के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने भी बलवीर कुशवाह को चुनाव मैदान में उतारा है। वैसे, इस समुदाय से भाजपा के पास दो बड़े नेता हैं और उनमें एक दूसरी बार भारत सिंह कुशवाहा विधायक चुने गए हैं, जबकि पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा महज 157 वोट के अंतर से हार गए थे। कुशवाहा वोट बैंक में बसपा कितनी सेंध लगा पाएगी, यह आने वाला वक्त बताएगा।

ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में अभी तक बसपा जातिगत हिसाब से अनुसूचित जाति के ही व्यक्ति को चुनाव लड़ाती रही है लेकिन इस बार जातिगत वोटबैंक को अपने पक्ष में लाने के लिए कुशवाहा समाज से बाबूलाल कुशवाहा को चुनाव मैदान में उतारकर सामाजिक रूप से भाजपा और कांग्रेस पर दबाव बनाने की चाल चली है। महल के अलावा जब कोई दूसरा व्यक्ति चुनाव मैदान में रहता है तो कुशवाहा समाज पारपंरिक रूप से भाजपा के पक्ष में मतदान करता आया है । इसीलिए वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भी ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा से भारत सिंह कुशवाहा दूसरी बार विधायक चुने गए जबकि पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा मालूली अंतर से हार गए थे। भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरना भी था। कुशवाहा समाज के नेता अजमेर सिंह कहते हैं कि संसदीय क्षेत्र में ढ़ाई लाख करीब कुशवाहा(काछी) मतदाता हैं।

बसपा के वोटबैंक को भेदना पड़ेगा : चुनाव में बसपा के पारंपरिक वोट बैंक को भेदे बिना किसी का भी काम नहीं बनने वाला। भाजपा के रणनीतिकारों को अब इस दिशा में सोचना पड़ेगा। क्योंकि बसपा का स्वयं का वोटबैंक करीब डेढ़ लाख वोट का है। एक समय में जब फूल सिंह बरैया बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ते रहे हैं उन्हें भी डेढ़ से दो लाख के बीच वोट मिलते रहे हैं। अगर बसपा के पारंपरिक वोट बैंक के साथ कुशवाहा समाज भी जुड़ गया तो निसंदेह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सिरदर्द पैदा करेगा। हालांकि भाजपा की सबसे मजबूत ताकत उसका संगठन है। इसी संगठन के सहारे वह चुनाव मैदान में है। इसकी काट न बसपा के पास है और न कांग्रेस के । प्रो.योगेन्द्र मिश्रा कहते हैं कि मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित रहेगा। भाजपा के पास सांगठनिक क्षमता और कुशल रणनीतिकार हैं यह दोनों चीजें उसे लाभ देंगी। उनका कहना है कि भाजपा के पास देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं की फौज है उसका मुकाबला किसी के पास नहीं है।

नामांकन की आखिरी तारीख के बाद रंग आएगा चुनाव में : ग्वालियर में 12 मई को चुनाव होना है। इस लिहाज से नामांकन फार्म जमा होने की तारीख 23 अप्रैल निकलने के बाद ही चुनाव में रंगत आएगी। प्रारंभिक दौर से ही जानकार मान रहे हैं कि ग्वालियर भाजपा का गढ़ है, इसे भेद पाना हर किसी के बूते की बात नहीं है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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