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ग्वालियर से गुजरने वाली ट्रेनों में बिक रहा अमानक पानी, अधिकारी मौन

स्टेशन से चढ़ाए जाते हैं एलपीजी सिलेण्डर, कोई नहीं करता कार्रवाई

ग्वालियर से गुजरने वाली ट्रेनों में बिक रहा अमानक पानी, अधिकारी मौन

ग्वालियर/वेब डेस्क। ट्रेनों में रेल नीर की बजाय अवैध कम्पनियों के पानी की आपूर्ति का खेल नया नहीं है। ग्वालियर से गुजरने वाली दर्जन भर से अधिक ट्रेनों में धड़ल्ले से अवैध पानी का कारोबार किया जा रहा है।

यात्रियों की जेब काट कर लाखों रुपए कमाए जा रहे हैं। पानी कारोबारी और रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ट्रेनों में अवैध पानी की सप्लाई का कारोबार जोरों से चल रहा है। रेलवे स्टेशन पर रोजाना केरला व झेलम एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में अवैध पानी के कार्टूनों की सप्लाई हो रही है। इसमें अधिकतर ट्रेनें लम्बी दूरी की हैं। रेलवे के आए दिन चैकिंग अभियान में ट्रेनों में अवैध पानी की बोतलें पकड़ी जाती हैं। रेलवे कार्रवाई के लिए भी लिखता है, लेकिन ठेकेदारों की सेटिंग इतनी मजबूत है कि उन पर कार्रवाई नहीं होती। ठेकेदार रेल नीर की बजाय अवैध कम्पनियों की पानी की बोतलें ट्रेनों में यात्रियों को बेचते हैं। इससे उनको ज्यादा मुनाफा होता है, जबकि रेल नीर में कम लाभ होता है।

ग्वालियर व मुरैना से चढ़ाया जाता है अमानक पानी

रेलवे सूत्रों का कहना है कि उत्तर मध्य रेलवे में प्रतिबंध के बावजूद ट्रेनों में सप्लाई होने वाला लोकल कम्पनी का पानी अधिकारियों की सांठगांठ से ट्रेनों में चढ़ाया जा रहा है क्योंकि ग्वालियर व मुरैना से चढऩे वाले इस अमानक पानी की सप्लाई में कुछ अधिकारियों का भी हिस्सा होता है, इसलिए कारोबारी फिर से बेखौफ होकर अपना कारोबार कर रहे हैं।

कार्रवाई के डर से बाथरूम में छुपा लेते हैं कार्टून

पानी के ठेकेदार अपनी चतुराई से पानी के अवैध कार्टूनों को पेंट्रीकार में न रखते हुए बाथरूम में छुपा देते हैं, ताकि रेलवे की कार्रवाई के दौरान इन पानी के कार्टून पर किसी की नजर न पड़े।

रेल नीर है पहली प्राथमिकता

मेल व एक्सप्रेस से लेकर लम्बी दूरी की सुपरफास्ट ट्रेनों में रेल नीर की उपलब्धता अनिवार्य है। जोन के अधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के इस आदेश को कूड़ेदान में डाल दिया है। ग्वालियर से गुजरने वाली अधिकतर ट्रेनें ऐसी हैं, जिनमें रेल नीर की जगह लोकल कम्पनी का पानी मिलता है। आलम यह है कि छह रुपए का लोकल पानी ट्रेन में तय कीमत से पांच रुपए और महंगा 20 रुपए में बेचा जा रहा है। मुनाफे के खेल में पूरा महकमा अपनी-अपनी सहभागिता निभा रहा है।

रेलवे का एक कर्मचारी देता है कार्रवाई की सूचना

सूत्रों की मानें तो जब भी ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की पेंट्रीकार या फिर स्टॉलों पर कार्रवाई की जाती है, उस कार्रवाई की खबर रेलवे का एक कर्मचारी फोन पर पहले से ही दे देता है। इसके चलते कार्रवाई सिर्फ नाम की रह जाती है।

दोपहर व रात में होता है पूरा खेल

ट्रेनों में अवैध पानी चढ़ाने का खेल दोपहर व रात को खुलेआम किया जाता है। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी रेलवे अधिकारियों को नहीं है। सूत्रों की मानें तो रेलवे अधिकारी ही अवैध पानी की सप्लाई करने वालों का हौसला बढ़ा रहे हैं।

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