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पानी का टैंकर लेकर निकले भाइयों की हत्या

पानी का टैंकर लेकर निकले भाइयों की हत्या

बेलागांव में पड़े मिले शव

ग्वालियर/न.सं.घर से हर रोज की तरह पानी का टैंकर निकले दो भाइयों के शव लावारिस हालत में खून से लथपथ बेलागांव में पड़े मिले हैं। अज्ञात हत्यारों ने सुनसान स्थान पर बुलाकर दोनों भाइयों की हत्या को अंजाम दिया है। सिर में पीछे चोट के गहरे घाव साफ दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने शवों को अंत: परीक्षण के लिए विच्छेदन गृह में रखवाकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। गिरवाई थाना प्रभारी वीरसिंह ठाकुर ने बताया कि गोल पहाड़िया, किशन बाग, गणेश मंदिर के पास रहने वाले दुर्गा प्रसाद कुशवाह के बेटे धीरज उर्फ धीरेन्द्र 30 वर्ष और दीपू कुशवाह 20 वर्ष स्वयं का पानी का टैंकर चलाने का काम करते थे। शनिवार को दोनों भाई बेला की बावड़ी पर किसी के ऑर्डर पर पानी का टैंकर लेकर निकल थे। शाम के समय धीरेन्द्र और दीपू के शव गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित बेलागांव में लावारिस हालत में पड़े मिले हैं। धीरेन्द्र और दीपू की अज्ञात हत्यारों ने सुनसान स्थान बेलागांव के कच्चे रास्ते पर स्थित नाले के पास हत्या कर दी और शव फेंककर फरार हो गए। दोनों भाइयों के सिर में पीछे की ओर गहरे घाव हैं। संभवत: हत्यारों ने दोनों भाइयों को वेलागांव में बुलाकर हत्या को अंजाम दिया है। शवों के पड़े होने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। धीरेन्द्र व दीपू के सिर में चोट के निशान किसके हैं? इसका पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने शवों को विच्छेदन गृह में रखवाने के बाद मौत के कारणों की जांच-पड़ताल प्रारंभ कर दी है।

दस मिनट पहले पिता से हुई थी बात पुलिस ने दी बेटों की मौत की खबर सदमे में बस्ती और परिवार, हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस


दस मिनट पहले ही पिता ने बेटों से मोबाइल पर बात की थी। जब पिता ने दोबारा फोन लगाया, तो दोनों ही बेटों ने फोन रिसीव नहीं किया। इस पर किसी अनहोनी की आशंका के चलते पिता उनको तलाश करते हुए बेला की बावड़ी पहुंच गया। किसी अनहोनी की आशंका में लगातार बेटों को फोन लगा रहे दुर्गाप्रसाद के उस समय होश उड़ गए, जब पुलिस ने उन्हें बताया कि दोनों बेटों की मौत हो चुकी है। इस घटना से परिवार और बस्ती में मातम पसर गया है।

दुर्गाप्रसाद ने बातचीत के दौरान कहा कि दोपहर ढाई बजे का समय होगा, जब मेरी दीपू से बात हुई थी। उसने कहा था कि हम टैंकर लेकर बेला की बावड़ी पहुंच गए हैं। इस पर दुर्गाप्रसाद निश्चिंत हो गए, लेकिन उनका मन पता नहीं क्यों बैचेन था और एक बार फिर दस मिनट बाद उन्होंने दीपू को फोन लगाया। इस बार दीपू का मोबाइल स्विच ऑफ था। बड़े बेटे धीरेन्द्र को फोन लगाया तो लगातार घंटी जाने के बाद भी उसका मोबाइल रिसीव नहीं हुआ। इस पर दुर्गाप्रसाद दोनों बेटों को तलाश करते हुए बेला की वाबड़ी पहुंच गए। इधर पुलिस को वेलागांव में दो शव पड़े होने की सूचना मिली तो वह मौके पर पहुंच गई। बेटों से बात नहीं होने पर परेशान पिता दुर्गाप्रसाद लगातार फोन लगा रहे थे। पुलिस ने धीरेन्द्र का फोन बजते ही उठाया और दूसरी तरफ से बात कर रहे दुर्गाप्रसाद ने जब आरक्षक का जवाब सुना तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। पहली बार तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ और पुलिस द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचे तो मंजर देखकर उनके मुंह से शब्द ही नहीं निकले। किसी तरह पुलिस कर्मियों ने दुर्गाप्रसाद को संभाला और ढांढस बंधाकर अन्य लोगों को सूचना दी। पानी का टैंकर बुलाने के बहाने जवान बेटों की हत्या किसने की? अभी पता नहीं चल सका है। हत्या की वजह और हत्यारे दोनों ही बेसुराग हैं।

पानी का टैंकर भरने को लेकर हुआ था विवाद

दुर्गाप्रसाद ने बताया कि छह माह पहले गयाजीत कुशवाह से पानी का टैंकर पहले भरने को लेकर उनके बेटों का विवाद हो गया था। इसके अलावा उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। उनके बच्चों की हत्या किसने की है? भगवान ही जाने। अब पुलिस ही पता लगाए कि हत्या किसने की है?

सौ रुपए अग्रिम देने की थी चर्चा

बस्ती में लोग चर्चा कर रहे थे कि दीपू को पानी का टैंकर ले जाने के लिए कोई सौ रुपए अग्रिम दे गया था। फिलहाल पता नहीं लग सका है कि भाइयों को अग्रिम सौ रुपए किसने दिए थे? मृतक घर से थोड़ी ही दूरी पर टैंकर को पानी से भरते थे।

संभलने का नहीं दिया मौका

हत्यारों ने दोनों भाइयों को संभलने का भी मौका नहीं दिया और हत्या करने के बाद शव पास-पास पटककर फरार हो गए। सिर में चोट के अलावा शरीर में कहीं भी चोट के निशान नहीं हैं। पुलिस भी परेशान है कि आखिर हत्या की वजह क्या हो सकती है?


Naveen ( 1446 )

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