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पुलिस विभाग में स्थानांतरण बने मजाक, थाना प्रभारी हुए चकरघिन्नी

पुलिस विभाग में स्थानांतरण बने मजाक, थाना प्रभारी हुए चकरघिन्नी

स्थानांतरण के फेर में फंसकर खाकी बनी फुटबॉल

ग्वालियर, न.सं.

मुरार थाना प्रभारी सुदेश तिवारी का एक बार फिर स्थानांतरण कर दिया गया है। एक सप्ताह के भीतर उनका यह तीसरा स्थानांतरण है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा मजाक है। इसी तरह गिरवाई थाना प्रभारी को दो दिन बाद पुन: थाने की कमान मिल गई है। जिलों से लेकर पूरे प्रदेश में हर विभाग में इन दिनों स्थानांतरण की बयार चल रही है। पुलिस विभाग भी स्थानांतरण के फेर में फंसकर फुटबॉल गया है।

पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने एक बार फिर कुछ थाना प्रभारियों को इधर-उधर किया है। मुरार थाने की कमान संभाल रहे सुदेश तिवारी को अब डबरा सिटी थाने का प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले उन्हें बिलौआ थाने भेजा गया था, लेकिन खाकी पर खादी भारी पड़ गई तो सुदेश तिवारी को बोरिया बिस्तर समेटकर सीट संभालने से पहले मुरार आना पड़ा था। इसके बाद एक बार फिर उनका स्थानांतरण हुआ और इस बार सुदेश तिवारी को मंडला भेजा गया था, जो एक दिन में ही बदलकर मुरार थाने में यथावत रखा गया। इससे यह बात साफ हो गई है कि इस समय पुलिस विभाग में लेन-देन का खेल चरम पर है। इसी तरह वीरसिंह ठाकुर को पुलिस लाइन के बाद पुन: चार दिन बाद गिरवाई थाने की कमान सौंपी गई है। मिर्जा आसिफ बेग को पुलिस लाइन से कम्पू थाना प्रभारी बनाया गया है। हीरासिंह चौहान पुलिस लाइन से गोला का मंदिर थाना और राकेश कुमार वर्मा को पुलिस लाइन से पिछोर थाने की कमान सौंपी गई है।

देवेन्द्र सिंह एसडीओपी डबरा मुनीश एसडीओपी बेहट बने

थाना प्रभारियों के अलावा गुरुवार को नगर पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी के स्थानांतरण भी किए गए हैं। उप पुलिस अधीक्षक ग्वालियर देवेन्द्र सिंह कुशवाह को एसडीओपी डबरा बनाया गया है। विश्वविद्यालय नगर पुलिस अधीक्षक मुनीश राजौरिया अब एसडीओपी बेहट की कमान संभालेंगे। रमेशचन्द भोज एसडीओपी बेहट से नगर पुलिस अधीक्षक विश्वविद्यालय बनाए गए हैं। इसी तरह एसडीओपी डबरा उमेश सिंह तोमर उप पुलिस अधीक्षक ग्वालियर बनाए गए हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय की तिकड़ी चर्चा में

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इन दिनों दूसरे जिलों से लाई गई तिकड़ी का जलबा है। सूत्र बताते हैं कि शहर में अभी जो भी स्थानांतरण हो रहे हैं, उनका रास्ता इनकी तरफ से होकर ही जाता है। भेंट चढ़ाते ही मनपंसद थाना लोगों को मिल रहा है। इस समय कुछ भैया खुश हैं, जबकि कुछ को स्थानांतरण का यह गोरखधंधा देखकर पीड़ा हो रही है। आंख बंद करके चल रहे गोरखधंधे को सब देख रहे हैं। वह अपनी इसी में भलाई समझ रहे हैं।

Naveen ( 1696 )

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