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नए चिकित्सा महाविद्यालयों को मान्यता दिलाने के फेर में जीआरएमसी की मान्यता खतरे में

नए चिकित्सा महाविद्यालयों को मान्यता दिलाने के फेर में जीआरएमसी की मान्यता खतरे में

14 चिकित्सकों का किया स्थानांतरण

ग्वालियर, न.सं.

राज्य शासन प्रदेश के सात नए चिकित्सा महाविद्यालयों में इस वर्ष से शैक्षणिक शत्र शुरू करने की तैयारी में है, लेकिन नए चिकित्सा महाविद्यालयों को मान्यता दिलाने के चक्कर में शासन ने स्टेट समय के गजाराराजा चिकित्सा महाविद्यालय की मान्यता को खतरे में डाल दिया है।

प्रदेश में नए चिकित्सा महाविद्यालयों को शुरू करने से पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की टीम द्वारा निरीक्षण किया जाता है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर मान्यता दी जाती है। एमसीआई ने प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों का निरीक्षण करना भी शुरू कर दिया है। इसी के चलते नए चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सा शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए पहले से चल रहे चिकित्सा महाविद्यालयों से शिक्षकों को नियम विरुद्ध तरीके से प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। इसी के चलते गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के 14 चिकित्सा शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर शिवपुरी, शहडोल, खंडवा, दतिया व विदिशा चिकित्सा महाविद्यालय में स्थानांतरित किया गया है। इनमें शहडोल चिकित्सा महाविद्यालय में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के मेडिसिन के सहायक प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार गर्ग व सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमेर शर्मा, सर्जरी के डॉ. श्याम गुप्ता एवं निश्चेतना से डॉ. शक्ति सिंघल व डॉ. सौरभ श्रीवास्तव को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। वहीं विदिशा चिकित्सा महाविद्यालय में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से फॉर्माकोलॉजी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. तूलिका सिंघल एवं पैथोलॉजी की सहायक प्राध्यापक डॉ. रीता भूषण को भेजा गया है। इसी तरह खण्डवा चिकित्सा महाविद्यालय में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अस्थिरोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. देवेश बांदिल, बाल एवं शिशु रोग विभाग के डॉ. रूप शर्मा, मेडिसिन के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप कुमार कंनोजिया एवं टीबी एण्ड चेस्ट विभाग से डॉ. अंकुर अग्रवाल को भेजा गया है, जबकि शिवपुरी चिकित्सा महाविद्यालय में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के एनाटोमी की सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रीति पंचोली एवं चर्मरोग के डॉ. दीपक शर्मा को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। दतिया चिकित्सा महाविद्यालय में पीएसएम सहायक प्राध्यापक डॉ. रिचा चंगुलानी को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया।

चर्म रोग विभाग की मान्यता भी खतरे में

चर्म रोग विभाग में करीब दो वर्ष पूर्व प्रोफेसर डॉ. पी.के सारस्वत के सेवानिवृत्त होने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुभव गर्ग पर ही विभाग का दारोमदार था। पिछले दिनों डॉ. गर्ग को सीधी भर्ती के तहत असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर बनया गया था, साथ ही डॉ. दीपक शर्मा को असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त कर दिया था, लेकिन डॉ. शर्मा के जाने के बाद फिर से पद रिक्त हो गए हैं।

आदेश में ही उलझा महाविद्यालय प्रशासन: शासन ने महाविद्यालय प्रशासन को हाल ही में सीधी भर्ती के तहत नियुक्त हुए नए चिकित्सकों को नए महाविद्यालयों में भेजने के निर्देश दिए थे। इस पर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय ने 11 फरवरी को आदेश जारी करते हुए चिकित्सकों को 11 फरवरी की ही सुबह 9 बजे ज्वाइन करने के निर्देश दे दिए। इतना ही नहीं आदेश में संबंधित चिकित्सकों को गत 10 फरवरी को ही रिलीव करने की बात कही गई, जबकि आदेश 11 फरवरी के हैं। इसको लेकर अब इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई विभागों की मान्यता पर आ सकता है संकट

गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के निश्चेतना विभाग में एमसीआई के मापदंडों के अनुसार पद खाली थे, लेकिन इसके बाद भी प्रदेश सरकार ने दो और असिस्टेंट प्रोफेसरों को नए चिकित्सा महाविद्यालयों में भेजने का आदेश जारी कर दिया है, जबकि एमसीआई ने गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय को यह कहते हुए सीट बढ़ाने से मना कर दिया है कि उसके यहां फैकल्टी कम है। निश्चेतना विभाग में पहले से दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी है, जो महाविद्यालय प्रशासन पूरा नहीं कर पाया है। उल्टा अब दो असिस्टेंट प्रोफेसर कम हो गए। यह स्थिति तब है, जब एमसीआई ने महाविद्यालय प्रशासन को पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया था कि जिन महाविद्यालयों में फैकल्टी नहीं होगी, उन्हें मान्यता नहीं देने पर एमसीआई विचार करेगी। अगर ऐसा हुआ तो निश्चेतना विभाग के चक्कर में सर्जरी, गायनिक, अस्थि रोग विभाग सहित अन्य विभागों की मान्यता भी खतरे में आ जाएगी।

Naveen ( 0 )

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