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17 सीढिय़ां, चंद सेकेण्ड और थम गई नंदकिशोर की सांस

शरीर पर कहीं भी नहीं थे गिरने के निशान!

ग्वालियर, न.सं.

सुबह करीब आठ बजे हजीरा थाने में कडक़ड़ाती ठंड में संतरी ड्यूटी पर था और अन्य स्टाफ कामकाज में व्यस्त था। तभी एफआरबी नंदकिशोर बाथम और महिला को लेकर थाने पहुंची। हवलदार ने दोनों की बात सुनने के बाद शिकायत लिखने के लिए कागज महिला को दिया ही था कि चंद सेकेण्डों में थाने का दृश्य ही बदल गया। संतरी और हवलदार को चकमा देकर नंदकिशोर थाने की छत पर चढ़ गया, जहां से उसने छलांग लगा दी। नंदकिशोर की सांस थाने में ही थम गई। मृतक का अंत:परीक्षण जेएमएफसी सुनीत अग्रवाल व संजय जैन, डॉ. सार्थक जुगरान, फोरेंसिक विशेषज्ञ नितिन प्रसाद के पैनल द्वारा किया गया। अंत:परीक्षण की वीडियो रिकार्डिंग भी की गई।

नंदकिशोर बाथम निवासी लधेड़ी ने संतरी प्रमोद व हवलदार वीरेन्द्र तिवारी को चकमा दिया और थाने की 17 सीढिय़ां इतनी फुर्ती से चढ़ा कि उसे वर्दीधारी प्रमोद भी नहीं पकड़ सका। छत पर पहुंचते ही नंदकिशोर ने भागने के प्रयास में छत से छलांग लगा दी। छत से जमीन पर गिरते ही नंदकिशोर की सांस थम गई। ड्यूटी पर तैनात हवलदार वीरेन्द्र तिवारी का कहना है कि नंदकिशोर पर महिला आरोप लगा रही थी कि वह राह चलते कभी उसका हाथ पकड़ लेता है तो कभी छेड़छाड़ करता है। शनिवार को भी महिला किसी चिकित्सक के यहां लूटपुरा में झाडू-पौंछा का काम करने जा रही थी तभी उसका रास्ता नंदकिशोर ने रोक लिया और हर बार की तरह छेड़छाड़ करने लगा, जबकि हवलदार वीरेन्द्र तिवारी से मृतक नंदकिशोकर का कहना था कि वह उसी महिला के साथ ही रहता है। पुलिस कहानी को पूरी तरह समझ पाती इससे पहले ही सब कुछ नंदकिशोर की मौत के साथ ही खत्म हो गया। चंद मिनटों में ही सब कुछ इतनी जल्दी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। नंदकिशोर का परिवार पुलिस की कहानी पर कतईं विश्वास करने को राजी नहीं है। भाई राजकुमार और ताऊ के बेटे गणेश का कहना है कि पुलिस ने नंदकिशोर को पीटा था, इसलिए उसकी मौत हुई है। मृतक के परिवार को रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता, कांग्रेस नेता सुनील शर्मा की ओर से ढाई हजार के अलावा दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता और मां के लिए नौकरी का शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

रिपोर्ट करोगी तो मर जाऊंगा

नंदकिशोर ने महिला से थाने में ही कहा था कि मेरी रिपोर्ट करेगी तो मैं मर जाऊंगा, लेकिन पुलिस ने उसकी बातों पर यकीन नहीं किया और महिला की शिकायत दर्ज करने लगी। नंदकिशोर ने हवालात में बंद होने से बचने के लिए दौड़ लगा दी और छत से नीचे कूद गया।

विच्छेदन गृह से थाने तक पुलिस बल तैनात

नंदकिशोर की मौत से कहीं उपद्रव न हो। इस दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने शव विच्छेदन गृह से लेकर हजीरा थाने तक भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया था। पुलिस बल ने अंतिम संस्कार तक मोर्चा संभाले रखा, लेकिन कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और परिजनों ने पुलिस प्रशासन की बात को मान लिया।

सुबह चार बजे घर से निकला था नंदकिशोर

मृतक के छोटे भाई राजकुमार ने स्वेदश से बातचीत में बताया कि हर रोज की तरह नंदकिशोर सुबह चार बजे ड्यूटी पर ट्रिपल आईटीएम जाने के लिए घर से निकला था। नंदकिशोर को पांच हजार रुपए गिनकर दिए थे, जो उसने मुझे रखने के लिए दिए थे। नंदकिशोर ट्रिपल आईटीएम महाविद्यालय में रसोई में काम करता था। पुलिस ने न तो मोबाइल दिया और न ही उसके पैसे मिले हैं।

दो घण्टे बाद मिला मृतक का घर

पुलिस अभिरक्षा में नंदकिशोर की मौत के बाद पुलिस उसका घर तलाशने के लिए निकल पड़ी। बताया गया है कि दो घण्टे की मशक्कत के बाद घर तो मिल गया, लेकिन घर पर मां और बहन मिलने के कारण पुलिस की परेशानी और बढ़ गई कि उन्हें कैसे बताएं कि नंदकिशोर अब इस दुनिया में नहीं रहा। किसी तरह पेंटर का काम करने वाले छोटे भाई राजकुमार को सूचना दी गई।

दो माह में पिता-पुत्र की मौत

राजकुमार ने बताया कि दिसम्बर में पिता गेंदालाल की मौत हुई थी। हम दोनों भाई मिलकर किसी तरह परिवार चला रहे थे। अब भाई भी दुनिया में नहीं रहा। हम तो बर्बाद हो गए। घर में वृद्ध मां और छोटे भाई नरेश व हेमंत और बहन है।

पुलिस पर डंडों से पीटने का आरोप

नंदकिशोर के ताऊ के लडक़े गणेश और भाई राजकुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने डंडों से पीटकर भाई की हत्या कर दी। पुलिस ने हमें बताया कि उसे पकडक़र लाए थे। कभी कह रहे थे कि वह स्वयं थाने पर आया था। अब न्यायिक जांच के बाद ही वास्तविकता का पता लग सकेगा।

हजीरा चौराहे पर ये डटे रहे

एसडीएम नरोत्तम भार्गव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमनसिंह राठौर, सत्येन्द्रसिंह तोमर, नगर पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र सिंह कुशवाह, गीता भारद्वाज, थाना प्रभारी सुदेश तिवारी, यदुवीर सिंह तोमर, अरविंद दांगी सहित भारी संख्या में पुलिस बल हजीरा चौराहा पर तैनात था।

Naveen ( 374 )

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