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मुश्किल है इस बार मेला में शिल्प बाजार लगना

ग्वालियर। जिस प्रकार ग्वालियर का व्यापार मेला अपने आप में एक विशिष्ट पहचान रखता है। ठीक उसी प्रकार संत रविदास म.प्र. हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लि. की ओर से मेला में लगाया जाने वाला शिल्प बाजार भी सैलानियों के लिए बहुत खास होता है। शिल्प बाजार में देश के कोने-कोने से शिल्पी आकर अपनी कला का परिचय देते हैं और यहां से अच्छा खासा व्यापार भी करके जाते हैं, लेकिन आने वाले शिल्पियों और शहर के कला पे्रमियों के लिए बुरी खबर यह है कि इस बार का शिल्प बाजार खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। बजट नहीं होने के कारण शिल्प बाजार लगेगा या नहीं? इसका अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।

ग्वालियर व्यापार मेला के पास लगने वाला शिल्प बाजार एक से दस जनवरी के बीच शुरू हो जाता है। यह बाजार दस दिन तक संचालित होता है। इस बाजार में 150 से 200 शिल्पी आते हैं और लाखों-करोड़ों रुपए का व्यापार भी करते हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार इस बाजार को शुरू होने के लिए कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, जबकि शिल्प बाजार परिसर पूरा का पूरा उजाड़ पड़ा हुआ है। इस स्थान पर बड़ी-बड़ी झाडिय़ां उग आई हैं और दुकानें बेरंग हो गई हैं। वहीं शिल्पियों को लाने के लिए अभी तक कोई रणनीति तैयार नहीं हुई है और न ही शिल्पियों को बुलाने की कोई योजना बनाई गई है।

अद्भुत कला देखने को मिलती है इस बाजार में

शिल्प बाजार में देश के कोने-कोने से शिल्पी आते हैं और अपने हाथों से बनाई हुई अपनी अद्भुद कला का प्रदर्शन करते हैं। इस बाजार में बिकने वाली हर वस्तु खास होती है, जो बाजार में मिलना किसी भी सूरत में संभव नहीं है। शिल्प बाजार का लोग वर्ष भर इंतजार करते हैं और इसके लगने पर जमकर खरीदारी भी करते हैं।

शिल्पियों के लिए बहुत कुछ होता है नि:शुल्क

शिल्प बाजार में आने वाले शिल्पियों को सरकार द्वारा आने-जाने और दुकान लगाने की व्यवस्था नि:शुल्क की जाती है। शिल्पियों को बस यहां आकर रहना होता है और अपना व्यापार करना होता है। यह गरीब शिल्पी यहां से इतना कमाकर ले जाते हैं कि वह वर्ष भर अपनी आजीविका को चला लेते हैं, लेकिन इस बार शिल्प बाजार खटाई में पडऩे से शिल्पियों के सामने भी रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो सकती है।

इनका कहना है

'शिल्प बाजार लगाने के लिए हमारे पास अभी तक न तो किसी प्रकार की कोई अनुमति है और न ही बजट है। शिल्प बाजार लगेगा या नहीं? अभी हम कुछ नहीं कह सकते।'

गोविंद आंग्रे

म.प्र. हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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