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रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 20 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही, एंट्री के दौरान नहीं होती चैकिंग, खतरे में सुरक्षा

चारों तरफ से खुला है ग्वालियर स्टेशन, रेलवे नहीं देता ध्यान, बिना टिकट प्लेटफार्म पर घूमते हैं लोग

रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 20 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही, एंट्री के दौरान नहीं होती चैकिंग, खतरे में सुरक्षा

टिकट कार्यालय में बैठे रहते हैं टीटीई, अधिकारियों के आने पर निकलते हैं बाहर

ग्वालियर। देश के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों में से एक ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए न तो आपको किसी जांच से गुजरना होगा और न ही यहां आपको प्लेटफार्म टिकट ही खरीदना होगा। स्टेशन परिसर चारों ओर से खुला हुआ है। कोई भी कहीं से भी आराम से बिना रोक-टोक आ-जा सकता है। आलम यह है कि लाइन पार से शहर की ओर आने वाले यात्रियों के लिए स्टेशन पर बना फुटऑवर ब्रिज पार कर शहर में पहुंचने का सबसे सुगम रास्ता है।

रेलवे का इस स्टेशन के प्रति लापरवाह रवैया और सुरक्षा समेत अन्य कई अहम पहलुओं की अनदेखी का आलम यह है कि स्टेशन के प्लेटफार्म भीख मांगने वालों और आवारा पशुओं की आरामगाह बने हुए हैं। रेलवे अधिकारियों की मानें तो दिन भर में इस स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों में करीब 20 से 45 हजार यात्रियों का आवागम होता है। चार प्लेटफार्म वाले इस स्टेशन पर हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहते हैं। इसके बावजूद रेलवे की ओर से स्टेशन को सुरक्षा के लिहाज से फुलप्रूफ बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि स्टेशन परिसर के चारों ओर से खुले होने के कारण रेलवे को हर रोज हजारों रुपए के राजस्व का नुकसान होता है। इसके अलावा स्टेशन परिसर में वारदात होने की आशंका भी बनी रहती है। इसके अलावा रेलवे की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है। जानकारों की मानें तो रेलवे संपत्ति की चोरी के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि आरपीएफ की सख्ती के बाद ऐसे कई मामलों में आरोपियों को पकड़ लिया गया, लेकिन सबसे बड़ी कमी यह है कि स्टेशन परिसर चारों तरफ से खुला हुआ है।

प्लेटफार्म टिकट के बगैर प्रवेश

प्लेटफार्म एक और चार की ओर तीन से चार एन्ट्री प्वॉइन्ट हैं। इसकी वजह से यात्रियों को छोडऩे आने वाले अधिकतर लोग बगैर प्लेटफार्म टिकट के ही एन्ट्री कर जाते हैं। खास बात यह है कि एन्ट्री के दौरान कहीं भी चैकिंग नहीं की जाती है। सुरक्षा कर्मियों द्वारा त्योहार आदि से पहले ही जांच अभियान चलाया जाता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रेलवे स्टेशन पर रोजाना 20 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन प्लेटफार्म टिकट बमुश्किल एक से डेढ़ हजार के बीच ही बिकते हैं।

ओएचई लाइन पर चढ़ गया था युवक

पिछले दिनों एक युवक ओएचई लाइन पर चढ़ गया था। आरपीएफ के जवानों ने युवक को समझाकर नीचे उतारा था। स्टेशन पर 24 घंटे आरपीएफ के जवान मौजूद रहते हैं, लेकिन स्टेशन परिसर चारों तरफ से खुला होने के कारण वह भी कुछ नहीं कर पाते हैं।

आती हैं कई दिक्कतें

रेलवे स्टेशन परिसर चारों ओर से खुला होने के कारण कई दिक्कतें आती हैं, यह सच है और इसे रेलवे के स्थानीय अधिकारी भी मानते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल है, पर यदि स्टेशन परिसर की चारदीवारी हो जाए तो जाहिर तौर पर इससे बहुत लाभ होगा।

इनका कहना है

हमारे जवान हमेशा ही प्लेटफार्म पर गश्त करते हैं, लेकिन स्टेशन परिसर चारों तरफ से खुला है। फिर भी हम लोग किसी भी असामाजिक तत्व को अंदर नहीं आने देते हैं। ओएचई लाइन पर वैसे कोई नहीं जाता है। अधिकतर लोग मानसिक रोगी होते हैं। उनसे निपटने के लिए आरपीएफ के जवान हमेशा तैयार रहते हैं।

आनंद स्वरूप पाण्डे, आरपीएफ निरीक्षक

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