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स्टार्टअप शुरू करने से पहले जानें यह प्रमुख बातें

स्टार्टअप शुरू करने से पहले जानें यह प्रमुख बातें

ग्वालियर। हम फाउंडेशन के इंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेल एवं सॉर्टेड स्क्वायर कोवोर्किंग के संयुक्त आयोजन मेंटर कंनेक्ट की द्वितीय सीरीज की शुरुआत की गयी। इस मेंटर कनेक्ट में डिजाईन थिंकिंग एवं मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड इंटरप्रेन्योरशिप के मास्टर ट्रेनर श्री इस्माइल अकबानी (हेड, ईडीसी सेल, सिम्बायोसिस इंस्टिट्यूट, पुणे) गेस्ट मेंटर के रूप में उपस्थित रहे। चर्चा का विषय डिजाईन थिंकिंग एवं कस्टमर साइकोलॉजी रहा। इसमें मानव केंद्रित डिजाईन एवं डिजाईन के जरिये अधिकतम ग्राहकों तक पहुंचने का विषय मुख्य बिंदु रहा।

इस विषय की शुरुआत में स्टार्टअप नेटवर्क के सदस्य श्री नीरज मंगल जी ने बताया कि 'आज की ज्वलन्त समस्याओं का हल डिजाईन और टेक्नोलॉजी के जरिये सम्भव है और इसके लिए डिज़ाइन थिंकिंग करना आवश्यक है।'

नेटवर्क के सदस्य सम्यक जैन ने बताया कि ये आयोजन में ग्वालियर स्टार्टअप नेटवर्क के सभी सदस्यों के लिए खास तौर और आयोजित किया गया है। मेंटर कनेक्ट का उद्देश्य शहर के स्टार्टअप्स को मेंटरशिप देना हैं एवं उन्हें रिसोर्सफुल बनाना है।

कार्यक्रम का संचालन संस्था सदस्य आदित्य राजा, पारस जैन एवं शबनम बानो ने किया। कार्यक्रम में हम फाउंडेशन के आकाश अरोरा, मनोज चौरसिया, नीरज मंगल एवं हर्षादित्य गर्ग विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस्माइल अकबानी द्वारा खास तौर पर समझाई गयी ये बातें:

1) डिजाईन थिंकिंग जरूर करें: स्टार्टअप शुरू करने से पहले प्रोडक्ट एवं प्रोसेस जरूर डिजाईन करें। इसे डिजाईन करते समय ग्राहक को जान ले और उसकी रोजमर्रा की समस्या को परख लें। इस एनालिसिस के बाद यदि आप मार्केट में अपने स्टार्टअप को लेकर आएंगे तो आप वास्तव में प्रॉब्लम सॉल्व कर पाएंगे। सिर्फ रिसर्च और सर्वे कर लेने भर से ही काम नहीं हो जाता, परन्तु जड़ तक पहुंचना बहुत जरुरी है। डिजाईन आपको वहाँ तक लेकर जाता है।

2) इमपैथी मैपिंग जरूर करें: श्री अकबानी ने इमपैथी मैपिंग को प्रैक्टिकल रूप से सिखाते हुए बताया कि कस्टमर को सही तरीके से समझने के लिए इमपैथी मैपिंग टूल का उपयोग करना सिखाया। कस्टमर इनसाइट जानने के लिए ये टूल ग्राहक के व्यवहार एवं एटीट्यूड की लिस्टिंग की जाती है और फिर डिजाईन थिंकिंग के जरिये प्रोसेस डिजाईन किया जाता है। इससे आपकी सक्सेस होने की सम्भावना बढ़ती है।

3) जोहरी मॉडल का करें उपयोग: इस मॉडल के जरिये उन सब रिसोर्सेज की लिस्टिंग की जाती है जिन्हें आप जानते हो, जिन्हें आप नहीं जानते हो, जिन्हें बाकी लोग जानते हैं और जिन्हें बाकी लोग नहीं जानते हैं। ऐसे में आपके ब्लाइंड स्पॉट्स आपको पता चलते हैं, यानि वो बातें जो आपके बारे में आपको नहीं पता पर बाकी सबको पता है या वो बातें जो कोई नहीं जानता। उन ब्लाइंड स्पॉट्स पर काम करके आप अपने आईडिया में छिपे ग्रे एरिया पर कार्य करे उसे एक बेहद अच्छा और काम करने योग्य बिज़नस आईडिया के रूप में विकसित कर सकते हैं।

4) डो जॉब्स फैलैसी को समझें: जॉन डो से स्टीव जॉब्स बनने के पीछे स्टैण्डर्ड बिज़नस प्लान को फॉलो न करें। उसको समय के हिसाब से बदलते रहें। मार्किट में बने रहने के लिए व्यापर व्यवस्था में बदलाव जरुरी है। ऐसे में फ्यूचर प्रोजेक्शन लेकर चलना सही नहीं, पर प्रेजेंट सिनेरियो को समझना ज्यादा जरुरी है।

5) आईडिया नही, अवसर को समझो: अधिकतर लोग अपना स्टार्टअप एक आईडिया के ऊपर बनाते हैं, पर ये गलती काफी लोगो को भारी पड़ता है। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि स्टार्टअप को आईडिया नहीं, अवसरों को देखकर शुरू किया जाये। यदि सही अवसर पर आपने स्टार्टअप शुरू किया, तो सही स्पेस में आप जल्दी ही सफलता प्राप्त कर लेंगे।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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