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लक्ष्मीबाई बलिदान मेला में जीवंत हुआ रानी का पराक्रम

रणभेरी बजते ही तोपें गरज उठीं, तलवारें चमक उठीं, घोड़ों की टापों से सारा वातावरण गूंज उठा।

मंच पर 60 मिनट में 300 कलाकारों ने किया अभिनय

रानी लक्ष्मीबाई की शहादत देख दर्शकों की आंखों से बहने लगी अश्रुधारा

ग्वालियर | रणभेरी बजते ही तोपें गरज उठीं, तलवारें चमक उठीं, घोड़ों की टापों से सारा वातावरण गूंज उठा। युद्ध के इस जीवंत दृश्य को देखकर दर्शकों को ऐसा लगा, मानो सचमुच बलिदान मेला प्रांगण में युद्ध आरंभ हो गया हो। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत को नमन करने के लिए सोमवार को लक्ष्मीबाई समाधि के सामने मैदान में वंदेमातरम् समूह द्वारा यह महानाट्य प्रस्तुत किया गया। भव्य नाट्य मंचन दर्शकों में एक आग पैदा कर गया। इसमें बाल कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

इस महानाट्य प्रस्तुति में निर्देशक चन्द्रप्रताप सिंह सिकरवार ने शहर के छात्र-छात्राओं से अभिनय कराया। घोड़े, ऊंट, बैलगाड़ी आदि का उपयोग कर नाटक को जीवंत रूप दिया गया। नाटक में झांसी की रानी एवं गंगाधरराव के विवाह का दृश्य सबसे खुशनुमा और उल्लासित करने वाला था। रंग-बिरंगी आतिशबाजी से वीरांगना मेला प्रागंण नहा उठा। नृत्य संगीत से सारा वातावरण प्रफुल्लित हो उठा। बुंदेली रानी के इस महानाट्य में सामूहिक नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति दी गई। इस महानाट्य में ऊधम सिंह बुंदेला की बगावत को प्रमुखता से दिखाया गया, जिसमें वह अपनी बुंदेली भाषा में हमें न तंग करो काहे पन्हैया सी देत हो.. के माध्यम से निर्देशक स्थानीय भाषा देने मेें सफल रहे। नाटक में ग्वालियर की सिंधिया रियासत द्वारा रानी के साथ किए गए असहयोग को भी रेखांकित किया गया। अंत में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए रानी वीरगति को प्राप्त हुईं। यह दृश्य देखकर लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे।

2 से 25 वर्ष के कलाकार थे शामिल

रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर 'खूब लड़ी मर्दानी नाटक के मंचन में 300 कलाकारों ने 60 मिनट में प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक में 2 वर्ष से लेकर 25 वर्ष की उम्र के कलाकारों ने जीवंत अभिनय किया।

झलकियां :--

दर्शकों की भीड़ को चीरते हुए रानी घुड़सवारी करती हुई निकली।

रथ की सवारी, बैलगाड़ी और रानी की बारात के समय हुई आतिशबाजी।

कलाकारों के साथ लोग सेल्फी लेते रहे।

राज्यपाल भी कलाकारों के अभिनय को देखकर तालियां बजाती रहीं।

हाईड्रोलिक मशीन से हुई फूलों की बारिश।





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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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