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ग्वालियर के सत्येन्द्र बने इंग्लिश चैनल पार करने वाले पहले दिव्यांग एशियाई

ग्वालियर के अंतरराष्ट्रीय पैरा स्वीमर दिव्यांग सत्येन्द्र सिंह ने 12 घंटे 26 मिनट में 34 किलोमीटर लंबा इंग्लिश चैनल पार कर नया रिकॉर्ड बनाया है।

12.26 घंटे में 34 किमी लंबा इंग्लिश चैनल पार कर बनाया रिकार्ड

ग्वालियर | ग्वालियर के अंतरराष्ट्रीय पैरा स्वीमर दिव्यांग सत्येन्द्र सिंह ने 12 घंटे 26 मिनट में 34 किलोमीटर लंबा इंग्लिश चैनल पार कर नया रिकॉर्ड बनाया है। रिले स्पर्धा में उनकी टीम में भारत के तीन अन्य तैराक भी थे। महाराष्ट्र के चेतन राउत, बंगाल के रीमो शाह और राजस्थान के जगदीश चन्द्र ने तैराकी कर इंग्लिश चैनल पार की। इस सफलता के बाद सत्येंद्र इस रिकार्ड को बनाने वाले पहले दिव्यांग एशियाई बन गए हैं। यहां बता दें कि सत्येन्द्र सिंह पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने 75 फीसदी दिव्यांग होने के बाद भी यह गौरव प्राप्त किया है। ये वे ही सत्येन्द्र हैं जब अप्रैल 2017 में उन्होंने भोपाल में मध्य प्रदेश के खेल विभाग के अधिकारियों को इंग्लिश चैनल पार करने की इच्छा जताई थी तो अधिकारियों ने सत्येन्द्र की हंसी उड़ाते हुए भोपाल का बड़ा तालाब तैरकर पार करने का चैलेंज दिया था।

उसके बाद उन्होंने इस प्रतियोगिता में शामिल होने का निर्णय लिया और यह उपलब्धि हासिल की। वह तीन अगस्त को अकेले दम पर इंग्लिश चैनल को पार करने के लिए दोबारा पानी में उतरेगा। सत्येन्द्र पिछले साल अकेले इंग्लिश चैनल पार करने से रह गया था। ग्वालियर के सुरेशनगर निवासी सत्येंद्र बचपन से ही दिव्यांग हैं। जब वह 15 दिन के थे, उन्होंने ग्लूकोज ड्रिप के रिएक्शन के चलते अपने पैर खो दिए। बचपन से ही तैराकी का शौक था, लेकिन दिव्यांगता के चलते शुरुआती दौर में उन्हें खासी समस्याओं का सामना करना पड़ा। सत्येंद्र ने दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और अपने ग्राम गाता में बैसली नदी में शौकिया तैराकी करने लगे ।

मुख्यमंत्री ने की तारीफ

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ट्वीट करके सत्येन्द्र सिंह की हौसला अफजाई की है। उन्होंने लिखा है हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति से ज्यादा ऊंचे सपने कभी भी नहीं हो सकते हैं। मध्य प्रदेश के सपूत सतेन्द्र सिंह ने ये साबित कर दिया है। उन्होंने 4 सदस्यीय भारतीय पैरा-स्विमिंग टीम के एक हिस्से के रूप में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार कर लिया है। उन्हें और उनकी टीम को उनकी असाधारण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई ।

पिता हैं सुरक्षागार्ड

सत्येंद्र के माता-पिता और तीन भाई यहां सुरेश नगर के श्रीनगर कॉलोनी थाटीपुर में निवास करते हैं। पिता निजी फाईनेंस कंपनी में सुरक्षा गार्ड हैं। सत्येंद्र का जीवन बेहद गरीबी में बीता। सतेंद्र अभी अविवाहित हैं, जबकि उसके दो छोटे भाइयों का विवाह हो चुका है। चौथे नंबर का छोटा भाई संदीप अभी पढ़ाई कर रहा है। संदीप बताते हैं कि अब सत्येंद्र 15 अगस्त के बाद ही ग्वालियर आ पाएंगे। उन्हें 15 अगस्त को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

कोच डबास की बड़ी भूमिका

सत्येंद्र को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वीमर डॉ. बीके डबास की महती भूमिका रही है। उन्होंने सत्येंद्र के हुनर को पहचाना और आगे बढ़ाया। दिव्यांग तैराकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच तैयार करने वाले कोच डॉ. डबास भी उनके साथ गए थे।

पूर्व में यह भी रहीं उपलब्धियां

- विक्रम अवॉर्डी सत्येन्द्र अब तक कई तैराकी स्पर्धाओं में 16 मैडल जीत चुके हैं।

- 2017 में पैरा स्वीमर सत्येन्द्र ने अरब सागर में 36 किलोमीटर तैरकर इतिहास रचा था।

- उन्होंने 5 घंटे 42 मिनट में इस दूरी को पार किया था।

- कलकत्ता में 2009 में सत्येन्द्र ने पहला मैडल हासिल किया था।

- वह भारत के पहले ऐसे दिव्यांग है जो 75 फीसदी प्रभावित होने के बाद भी 36 किमी की तैराकी कम समय में पूरी कर पाए।




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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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