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गुरु पूर्णिमा सदगुरु के पूजन का है पर्व

गुरु पूर्णिमा सदगुरु के पूजन का है पर्व

ग्वालियर। गुरु के प्रति आभार का दिन .... मध्य प्रदेश शिक्षक संघ डबरा के तत्वाधान में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम मुख्य अतिथि के रूप में श्री दीपक भार्गव एवं मुख्य वक्ता के रूप में श्री ओम प्रकाश जी भदोरिया मौजूद रहे

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु : गुरु देवों महेश्वरः !

गुरु साक्षात् परब्रम्हा तस्मे श्री गुरुये नमः !!

भारतीय संस्कृति में अनादि काल से ही गुरु को विशेष दर्जा प्राप्त है ! गुरु की महानता का परिचय सन्त कबीर ने बहुत अच्छे से इस दोहे में दिया है !

गुरु गोबिन्द दोउ खड़े काके लागु पाए !

बलिहारी गुरु आपके जो गोबिन्द दियो मिलाय !!

गुरु शब्द का महत्व तो गुरु शब्द से ही निमित है संस्कृत में " गू " का अर्थ है अन्धकार ( अज्ञान ) और

" रु " का अर्थ है हटाने वाला यानि प्रकाश ....गुरु का अर्थ है अन्धकार को हटाने वाला , माता पिता हमारे जीवन के प्रथम गुरु है ! जो हमारा पालन पोषण करते है हमे बोलना सिखाते है ! तथा वो सभी संस्कार देते है ! जिनके द्वारा हम समाज में रहने योग्य बनते है उसके आगे जीवन में सार्थकता प्रदान करने के लिए जिस ज्ञान एवं शिक्षा की आवश्यकता होती है वह गुरु से प्राप्त होती है !!

आषाढ़ मॉस की पूर्णिमा का दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है ! हिन्दू धर्म में इस का विशेष महत्व है .

गुरु जो स्वम् पूर्ण होते है ! जो पूर्ण है वही पूर्णत्व की प्राप्ति दुसरो को करा सकते है ! पूर्णिमा के चंद्रमा की भांति जिसके जीवन में प्रकाश है ! वही तो अपने शिष्यो के अन्तःकरण में ज्ञान रूपी चन्दर की किरणे बिखेर सकता है !

गुरु वहीँ जो हमारे जीवन को सही राह पर ले आये ! गुरु हमारे भीतर संस्कारो का सर्जन करता है और दुर्भवनाओ का विनाश करता है अतः गुरु पूर्णिमा सदगुरु के पूजन का पर्व है ! यह किसी व्यक्ति की पूजा नही अपितु ज्ञान का आदर है ज्ञान का पूजन है !!!

वर्तमान युग में गुरु और शिष्य की परम्परा में कुछ विसंगतियां आ गयी है यह जरुरी नही देह धारी गुरु को माना जाये ! मन में सच्ची लगन और श्रद्धा हो तो गुरु को कही भी पाया जा सकता है ! एकलव्य ने मिटटी की प्रतिमा बना कर गुरु को अपने भीतर जागृत किया और एक महान धनुर्धर बना , दातेत्र ने 24 गुरु बनाये यानि 24 जगह से ज्ञान प्राप्त किया ! उन्होंने संसार में मौजूद हर उस वनस्पति प्राणी ग्रह नक्षत्र को अपना गुरु बनाया जिससे कुछ सीख सके , लोक मान्यता है कि वेद व्यास जी का जन्म भी आषाढ़ी पूर्णिमा के ही दिन हुआ था, इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। बहुत से लोग इस दिन व्यास जी के चित्र का पूजन और उनके द्वारा रचित ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। बहुत से मठों और आश्रमों में लोग ब्रह्मलीन संतों की मूर्ति या समाधी की पूजा करते हैं। सरस्वती शिशु मंदिर डबरा में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत से एक सैकड़ा शिक्षक बंधु भगिनी मौजूद थे श्रीमती ममता राठौर प्रांतीय उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश शिक्षक संघ श्री शिवकुमार शर्मा जी श्री देवेंद्र सागर जी श्री जय दयाल शर्मा जी श्री सत्येंद्र श्रीवास्तव जी श्री निशा अग्रवाल जी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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