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खाली कुर्सियां देख मायूस हैं सर्कस के कलाकार, सर्कस को छोड़ करना चाहते हैं व्यापार

ग्वालियर।सर्कस का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में हवा में झूलते लोग, रस्सी पर नाचती लड़कियां, साईकिल चलाते हुए बन्दर, कुत्ते, आदि जानवरों का चल रहा खेल-तमाशा ध्यान आता है। किसी ज़माने में फिल्मों के बाद सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहें सर्कस अब समय के साथ कम होते जा रहें हैं। ग्वालियर मेले में आये रेमन सर्कस में करीब 150 कलाकार काम कर रहें हैं। खेल दिखाने वाले कलाकारों के साथ साथ कुछ तंबू लगाना, उखाड़ना व उनकी देखभाल करना, तो कुछ लोग जानवरों की सेवा में लगे रहते हैं। इसके अलावा जब कभी किसी कलाकार का शो खराब हो रहा होता है, तो कैसे जोकर व अन्य लोग उस शो को संभाल लेते हैं, यह देखते ही बनता है।'

रेमन सर्कस के मेनेजर ने बताया की एक वक्त था जब सर्कस लोगो के लिए मनोरंजन के लोकप्रिय साधनों में से एक था। छोटे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्गों में भी सर्कस के खेल को देखने का जज्बा था। लेकिन समय के साथ आधुनिकता और मोबाइल के चलन के साथ सर्कस में जानवरों के खेल पर रोक लगने से देश में सभी सर्कस बहुत ही तंगी की हालत में चल रहें हैं। एक समय था जब हजारों की संख्या में दर्शक आते थे। अब एक शो में 50 से 100 लोग बमुश्किल आते हैं। दर्शको की कमी से जूझ रहें सर्कस से नए कलाकार नहीं जुड़ना चाहते, जो पुराने कलाकार हैं, वह भी इस खेल से दूर होने का मन बना रहे हैं।

जिम्नास्ट और पैरों से निशाने बाजी करने वाली कलाकार खोई ने बताया की उसने ट्रेनरों से लम्बे समय तक ट्रेनिंग ली हैं। इस तरह की ट्रेनिंग के लिए शुरू में रोज़ाना आठ से दस घंटे में प्रेक्टिस करना पड़ती है, वह अपने देश में भी सर्कस में काम करती थीं यहाँ पिछले दो साल से काम कर रहीं हैं, छुट्टियों में वह अपने घर जाती हैं।

डॉग शो का खेल दिखाने वाली कानपुर की कलाकार रेशमा ने बताया की वह पिछले 3 साल से सर्कस में काम कर रही है। डॉग शो करने के लिए उसने ट्रेनर से विशेष ट्रेनिंग ली है उसने बताया की प्रतिदिन वह शो के अन्य कलाकारों के साथ प्रेक्टिस करती है। उसने ग्वालियर मेला भी घुमा और बताया की उसे काफी अच्छा लगा। उसने अपने साथियों के साथ मेले में पापड़ खाये और झूले भी झूलें, जिसमे काफी मजा आया।

कुर्सी को लेकर कॉमिक एक्ट करने वाले ग्रुप के सदस्य साइमन, मोचा, जॉनी ने बताया की वह मूल रूप से मणिपुर से आये हैं।उनके द्वारा किये एक्ट में एक लड़का कुर्सी को नहीं छोड़ता बाकी तीन उससे कुर्सी छीनने का प्रयास करते हैं लेकिन वह जहाँ जाता है, कुर्सी को साथ ले जाता है। एक्ट के अंत में उसके साथी कुर्सी को उससे छीनकर एक साथ बैठ जाते हैं। इस एक्ट के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया की वह अपने एक्ट द्वारा सरकारी तंत्र में लोगों के कुर्सी से प्रेम को दर्शाते हैं। किस प्रकार लोग कुर्सी से प्रेम करते है, उसके लिए लड़ते हैं। पिछले चार सालो से सर्कस में काम कर रहें इस ग्रुप के लड़को ने बताया की पैसे जोड़ने के बाद वह सर्कस छोड़कर खुद का व्यापार करना चाहते हैं।

अन्य कलाकारों ने बताया की सर्कस में काम करने में उन्हें मजा आता हैं लेकिन कई बार खाली पड़ी कुर्सियां अखरती हैं। उन्होंने बताया की कभी 50 तो कभी 100 दर्शक ही शो देखने आते हैं और कभी-कभी तो मुश्किल से 15 से 20 दर्शक ही एक शो को मिल पाते हैं और उन्हींके बीच ही शो करना पड़ता है। जब भी किसी शो में ज्यादा दर्शक आते हैं तो उनके सामने शो करने में ज्यादा मजा आता हैं, क्योकि तालियों की गड़गड़ाहट हर कलाकार को पसंद होती है।

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Prashant Parihar ( 0 )

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