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ग्वालियर : मंडलों के पैनल में 40 से अधिक आयु के दावेदार, अटकी अध्यक्षों की सूची

उम्र की बाधाएं लांघने के कारण मामला फंसा

ग्वालियर : मंडलों के पैनल में 40 से अधिक आयु के दावेदार, अटकी अध्यक्षों की सूची

ग्वालियर / वेब डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के ग्वालियर महानगर एवं ग्रामीण के मंडल अध्यक्षों की सूची लटकने के पीछे अधिकांश दावेदारों का निर्धारित आयु सीमा को लांघना है। इस कारण प्रदेश नेतृत्व एवं चुनाव अधिकारी ने पुन: दावेदारों के परिचय-पत्र मांगे हैं, जिससे सूची जारी होने में विलम्ब हो रहा है। अभी तक प्रदेश के अन्य जिलों के अलावा ग्वालियर-चम्बल संभाग के भिण्ड व दतिया सहित अंचल के कुछ अन्य जिलों की सूचियां सामने आ चुकी हैं, लेकिन ग्वालियर की सूची जारी करने में नेताओं के पसीने छूट रहे हैं। ग्वालियर की सूची लटकने पर दावेदारों की सांसें अटकी हुई हैं। किन्तु संगठन आयु सीमा के कारण उस पर निर्णय नहीं ले पा रहा है।

प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही ग्वालियर महानगर एवं ग्रामीण भाजपा के मंडल अध्यक्षों के लिए 15 एवं 16 नवम्बर को चुनाव हुए थे। चूंकि पार्टी गाइड लाइन के तहत रायशुमारी से नाम तय करना थे, इसलिए नेताओं ने दो दिन तक मंथन कर नामों के पैनल बनाकर प्रदेश नेतृत्व को भेज दिए। दो दिन चली प्रक्रिया के दौरान भी नामों को लेकर खींचतान एवं गुटबाजी सामने आई थी, इसलिए तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि नामों को अंतिम रूप देने में प्रदेश नेतृत्व को पसीने छूट सकते हैं। हुआ भी उसी के मुताबिक और अभी तक ग्वालियर जिले के मंडल अध्यक्षों के नामों की घोषणा प्रदेश नेतृत्व नहीं कर पाया है, जबकि प्रदेश के 80 फीसदी जिलों के मंडल अध्यक्षों की सूची जारी कर दी गई है। सूत्रों की मानें तो सूची अटकने के पीछे सबसे बड़ा कारण उम्र का बंधन बताया जा रहा है। पर्यवेक्षक व निर्वाचन अधिकारियों द्वारा रायशुमारी करके जो पैनल बनाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर के 40 वर्ष की आयु में फिट नहीं बैठ पा रहे हैं या फिर उन नामों को लेकर प्रदेश नेतृत्व व बड़े नेता सहमत नहीं हैं। 40 साल की आयु सीमा ने कई नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दी हैं। पार्टी गाइड लाइन में नाम फिट न होने पर नए नामों पर मंथन चल रहा है और उसने जुड़े दस्तावेज मंगाए जा रहे हैं, जिससे उनकी वास्तविक आयु का आंकलन किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं न कहीं समय लग रहा है। एक यह वजह भी सूची रुकने का कारण मानी जा रही है। मंडल अध्यक्षों की सूची अटकने के भले ही कई कारण हैं, लेकिन इसे लेकर जिले के नेताओं में खलबली जरूर मची हुई है और उनमें नामों को लेकर भारी उत्सुकता भी देखी जा रही है।

अपनी सूची लेकर बैरंग लौटे

सूत्रों की मानें तो जिला निर्वाचन अधिकारी चुनाव प्रक्रिया के बाद दिल्ली चले गए थे, इसलिए दो वरिष्ठ नेता मंडल अध्यक्षों के नामों का पैनल भोपाल लेकर पहुंचे। यह दोनों नेता प्रदेश नेतृत्व से मिले और अपनी सूची उन्हें दी। किन्तु सूची में ज्यादातर उम्रदराज लोगों के नाम होने के कारण उन्हें बैरंग लौटा दिया गया।

नेताओं की आपत्ति से लटका विस्तार

कुछ नेता पार्टी की बलि चढ़ाकर निजी स्वार्थ की पूर्ति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल-फिलहाल में हुए भाजपा के संगठन चुनावों में भी देखने को मिला। संगठन चुनाव को लेकर पिछले दिनों कैंसर पहाड़ी में हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट एवं सख्त दिशा-निर्देश दिए थे कि ग्वालियर महानगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में मंडलों का विस्तार किया जाए। महानगर के लिए बाकायदा तीन वरिष्ठ नेताओं की समिति का गठन कर मंडल विस्तार का कार्य सौंपा गया था, जिसमें नौ मंडलों को बढ़ाकर 12 किया जाना था। किन्तु एक वरिष्ठ नेता की आपत्ति के कारण मंडलों का विस्तार अटक गया। इसी तरह मंडल अध्यक्षों के नामों पर भी उक्त नेता की घोर आपत्ति के कारण विवाद पैदा हो रहा है। इन बातों से वरिष्ठ नेतृत्व भी अवगत है।

इनका कहना है

मंडल अध्यक्षों के लिए रायशुमारी की प्रक्रिया पूरी हो गई है और मंडलों के पैनल भी बन गए हैं। इन पर विस्तार से चर्चा होने के बाद जल्द ही मंडल अध्यक्षों की घोषणा कर दी जाएगी।

कैलाश सोनी, जिला निर्वाचन अधिकारी

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