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भारतीय शिक्षण मंडल ने किया 330 शिक्षकों का सम्मान

मनुष्यता का निर्माण करने वाली है भारतीय व्यवस्था: पचौरी

भारतीय शिक्षण मंडल ने किया 330 शिक्षकों का सम्मान

ग्वालियर/वेब डेस्क। भारतीय व्यवस्था मनुष्यता का निर्माण करने वाली है। यहां हमेशा गुरु का सम्मान होता है। यही कारण था कभी तक्षशिला और नालंदा के गुरुकुलों में दुनिया भर से छात्र पढऩे के लिए आते थे। जिस देश में गुरु का सम्मान होता है, उस देश को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। रविवार को शाम भारतीय शिक्षण मंडल शाखा ग्वालियर के तत्वावधान में नई सडक़ स्थित राष्ट्रोत्थान न्यास में आयोजित 'शिक्षक सब चाणक्य समान' वृहद गुरु पूजन कार्यक्रम में यह बात भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. उमाशंकर पचौरी ने मुख्य वक्ता की आसंदी से कही।

डॉ. पचौरी ने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों। शिक्षक हमेशा ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भूमिका निभाता है। शिक्षक अनासक्त कर्मयोगी की तरह छात्रों को गढऩे का काम करता है, इसीलिए गुरु सदैव चाणक्य के समान था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपनी संतान को बढ़ते हुए देखकर प्रसन्न होते हैं तो गुरु अपने शिष्य को बढ़ते हुए खुश होता है। उन्होंने दिवंगत पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को राजनैतिक गुरु बताया और कहा कि उन्होंने कई युवाओं को एक कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में गढऩे का काम किया। यही काम गुरु का है। डॉ. पचौरी ने कहा कि जिस प्रकार एक गुरु के रूप में परमहंस रामकृष्ण जी ने स्वामी विवेकानंद जी को और चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को गढऩे का काम किया। आज वैसे ही गुरुओं और वैसे ही गुरु-शिष्य के बीच संबंधों की जरूरत है।

कार्यक्रम में मुख्य अभ्यागत के रूप में उपस्थित एमिटी स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन के संचालक डॉ. सुमित नरूला ने कहा कि शिक्षक अपने छात्रों में मानवता, जीवन और चरित्र निर्माण पर ज्यादा ध्यान दें। छात्रों में यदि हम चरित्र निर्माण कर पाए तो जीवन में उनके सामने कोई समस्या नहीं आएगी। वे हर कठिनाई का समाधान खोजने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि हम अपनी मातृ भाषा को न भूलें। अपनी भाषा पर गर्व करें, लेकिन हमें अंगे्रजी सहित अन्य भाषाओं का भी ज्ञान होना चाहिए। हमें नई-नई तकनीक से भी जुडऩा चाहिए, जिससे हमें निरंतर आगे बढऩे में मदद मिलेगी। अध्यक्षीय उद्बोधन में आईआईटीटीएम के डायरेक्टर संदीप कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सभी शिक्षक मिलकर समग्र रूप से छात्रों को गढऩे का काम करें, जिससे हम परिवार, समाज, राष्ट्र, मानव मात्र के लिए संपत्ति के रूप में एक ऐसी पीढ़ी दे पाएंगे, जो अपने देश व समाज के लिए कुछ अच्छा करे।

कार्यक्रम में शहर के करीब 200 विद्यालयों से आए 330 शिक्षक-शिक्षिकाओं को अक्षत तिलक लगाकर, पुष्प एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रेल विभाग से सेवानिवृत्त 90 वर्षीय यंत्री वाले मामा को अंग वस्त्र एवं श्रीफल भेंटकर 'कर्मयोगी गौरव सम्मान' एवं विवेकानंद केन्द्र के कार्यकर्ता नवीन सेन को 'युवा प्रेरणा' सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रारंभ में अतिथियों का परिचय एवं स्वागत भाषण इमरान ने दिया। प्रांत महामंत्री पंकज नाफड़े ने भारतीय शिक्षण मंडल का विस्तार से परिचय देते हुए बताया कि इस संगठन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में भारतीयता को स्थापित करना है। कार्यक्रम संयोजक पियूष ताम्बे ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मंच पर भारतीय शिक्षण मंडल के जिलाध्यक्ष गोपी मंधान एवं सचिव माधुरी गुप्ता भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन नवनीत पचौरी ने एवं आभार प्रदर्शन नितिन विटवेकर ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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