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...तो क्या विश्वकप में माही होंगे चौथे नंबर के बल्लेबाज

क्रिकेट विश्वकप पर विशेष

...तो क्या विश्वकप में माही होंगे चौथे नंबर के बल्लेबाज

ग्वालियर/सचिन श्रीवास्तव। भारतीय टीम में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। क्रिकेट में जब नंबर चार पर बल्लेबाजी करने वाले बल्लेबाजों की बात होती है तो इसमें महेला जयवर्धने या एबी डीविलियर्स का नाम सबसे पहले आता है जिन्हें इस क्रम पर बेजोड़ बल्लेबाज माना जाता था। नंबर चार की बल्लेबाजी शीर्ष क्रम और निचले क्रम के बल्लेबाजों के बीच पुल का काम करता है। किसी भी टीम के लिए इस नंबर की बल्लेबाजी उनके बैटिंग लाइनअप को बैलेंस करने का काम करती है।

भारतीय टीम की बात करें तो युवराज सिंह के अलावा इस क्रम पर आठ बल्लेबाजों को आजमाया जा चुका है लेकिन इस नंबर पर युवी जितना सफल कोई नहीं रहा। इस क्रम पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी को परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालना होता है। इस क्रम पर ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है जो ना तो बहुत तेज खेलता हो और ना ही धीमी गति से बल्लेबाजी करता हो। शायद यही वजह रही कि युवराज इस क्रम पर भारतीय टीम के लिए काफी समय तक खेलते रहे और सफल हुए।

विश्व कप 2011 में भारतीय टीम के लिए विराट ने इस भूमिका को बखूबी निभाया था। गंभीर टीम के लिए तीसरे ओपनर के तौर पर थे इसलिए वो तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते थे। इसके बाद विश्व कप 2015 में अजिंक्य रहाणे ने इस क्रम पर बल्लेबाजी की। वर्ष 2015 के विश्व कप के बाद इस नंबर पर कई भारतीय बल्लेबाजों को आजमाया गया लेकिन कोई भी इस क्रम पर सफल नहीं हुआ।

भारत में खेली गई ऑस्टे्रलिया के खिलाफ शृंखला में नंबर चार पर हार्दिक पांड्या को आजमाया गया जिनकी जि मेदारी स्पिन अटैक को आक्रमक अंदाज में खेलना था लेकिन वो इस नंबर पर निरंतर नहीं रह सके। मनीष पांड, श्रेयस अय्यर को भी कुछ मैचों में मौका मिला लेकिन कुछ खास हासिल नहीं हुआ। इसके बाद टीम प्रबंधन ने केदार जाधव को चौथे नंबर पर आजमाया उन्होनें कुछ अच्छी पारियां जरूर खेलीं लेकिन वो आईपीएल में चोटिल हो गए। इसी आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन के दम पर केएल राहुल पर भारतीय टीम दांव खेल सकती है। लेकिन आईपीएल में राहुल ने जो प्रभावशाली पारियां खेली वो सलामी बल्लेबाज के रूप में खेलीं और आईपीएल टी-२० प्रारूप में है जबकि विश्वकप ५०-५० का खेला जाना है। इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय टीम स्थिति के हिसाब से अपने बल्लेबाजों का क्रम तय करती है लेकिन टीम को एक अदद बल्लेबाज की जरूरत है जो नंबर चार पर बल्लेबाजी कर सके।

ऐसे में टीम प्रबंधन अपने सबसे वरिष्ठ, अनुभवी खिलाड़ी की ओर देख रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की। वैसे भी भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कई बार कहा है कि वह भाग्यशाली हैं कि महेंद्र सिंह धोनी उनके साथ हैं। धोनी के रणनीतिज्ञ कौशल का कोई सानी नहीं है और इसलिए जब मैच को पढऩे तथा रणनीति बनाने की बात आती है तो धोनी इस स्थिति में कोहली के लिए सही मार्गदर्शक है। इसलिए कोहली को जब भी सलाह की जरूरत पड़ती है वह माही के पास आते हैं।

यह बात सही है कि केप्टन कूल पिछले कुछ मैचों में पहले की तरफ फिनिशर के तौर पर उतने सफल नहीं हो पाए जिसके लिए वह जाने जाते हैं। पिछले कुछ मैचों में ऐसा देखने को मिला है कि जब धोनी बल्लेबाजी करने आते हैं तब वह कुछ समय लेते हैं, कुछ गेंदे खेलने के बाद अपने स्वाभिक खेल को जारी रखते हैं लेकिन उस समय उन्हें आते ही बड़े शॉट मारना होता है क्योंकि उस समय हर गेंद पर रनों की दरकार होती है। तब वह जोखिम लेते हैं। ऐसे में कप्तान कोहली और कोच रविशास्त्री, धोनी को नंबर चार पर बल्लेबाजी करा कर उनका सदउपयोग कर सकते हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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