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आपातकाल की वर्षगांठ पर हुई लोकतंत्र सेनानियों और बुद्धिजीवी वर्ग की संगोष्ठी

आपातकाल को हम लोकतंत्र का काला अध्याय कहते हैं।

आपातकाल की वर्षगांठ पर हुई लोकतंत्र सेनानियों और बुद्धिजीवी वर्ग की संगोष्ठी

21 माह की काली रात थी आपातकाल : रामलाल जी

ग्वालियर | आपातकाल को हम लोकतंत्र का काला अध्याय कहते हैं। आपातकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने निर्दोष लोगों को जेलों में डाला, उन पर अत्याचार किए, यातनाएं दी । देश की जनता को आशा की किरण नहीं चहुंओर काली रात्रि दिखाई देती थी। इस तरह आपातकाल भारतीय संविधान के लिए काला अध्याय नहीं बल्कि एक काली रात थी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल जी ने मंगलवार 26 जून को आपातकाल की वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी महानगर ग्वालियर द्वारा चेम्बर ऑफ कॉमर्स भवन में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों और बुद्धिजीवी वर्ग की संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।

आपातकाल की यातनाओं से जुड़ीं कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए रामलाल जी ने कहा कि आपातकाल में सिर्फ फांसी के फंदे पर नहीं चढ़ाया गया, वरन हर तरह के अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि जनसंघ से जुड़े लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने दल और संविधान को लोकतंत्र की रक्षा के लिए होम कर दिया। उन्होंने कहा कि हम जीतें न जीतें, राष्ट्र जीतना चाहिए। आपातकाल जैसी घटनाएं मानसिकता के कारण होती हैं। प्रारंभ से आज तक कांग्रेस के नेताओं के मानस में मैं और सिर्फ मैं रहा है। उनकी मानसिकता में तानाशाही प्रवृत्ति रही है। रामलाल जी ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता तानाशाही, वंशवाद, लोकतंत्र विरोधी यहां तक कि संविधान विरोधी भी रही है।

कांग्रेस का संवैधानिक संस्थाओं के साथ-साथ देश की सेना पर भी भरोसा नहीं है। भाजपा का विरोध करते-करते कांग्रेसी भारत का विरोध करने लगे। केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री एवं स्थानीय सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जनता ने इंदिरा गांधी की तानाशाही को समझा तथा देश को उस तानाशाही से बाहर निकाला। आपातकाल में देश की जनता ने यह सिद्ध कर दिया कि वह हर परिस्थिति से देश को निकालने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आपातकाल की वर्षगांठ पर इस तरह के आयोजन होते रहना चाहिए। जिससे नई पीढ़ी संविधान के हित में लोकतंत्र के महत्व को समझ सके। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद प्रभात झा ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि 'इंडियन एक्सप्रेस और ग्वालियर से प्रकाशित 'स्वदेश समाचार पत्रों ने पहले ही दिन आपातकाल को काला दिवस मानकर संपादकीय काली कर दी थी।

तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने पत्रकारिता, न्यायपालिका सहित संविधान से जुड़ी हर चीज की हत्या कर दी थी। वहीं देशहित में जनसंघ ने खुद को जनता पार्टी में विलय कर दिया था। संगोष्ठी में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री बी.डी.शर्मा, बंशीलाल गुर्जर भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन भाजपा जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, संभागीय संगठन मंत्री शैलेन्द्र बरुआ सहित लोकतंत्र सेनानी एवं शहर के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जयप्रकाश नारायण, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय की चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर आपातकाल से जुड़ी पुस्तक सौंपकर एवं भाजपा का अंगवस्त्र अतिथियों को पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ। आभार प्रदर्शन लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव मदन बाथम ने किया।


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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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