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100 करोड़ के आरोपों को लेकर सियासत गरमाई

दिग्विजय के तीर को बोगस बता रहे भाजपा के पूर्व मंत्री

100 करोड़ के आरोपों को लेकर सियासत गरमाई

ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस में खूब सियासी दांव-पेच चले। जिसमें अल्पमत में होने के बाद भी कांग्रेस ने सत्ता हासिल कर ली। इस दौरान दोनों ही दलों को यह चिंता भी सताए रही कि कहीं उनके विधायकों की खरीद-फरोख्त न हो जाए। विधानसभा सत्र के पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बार-बार यह आरोप लगाए कि भाजपा के कुछ कद्दावर नेता हॉर्स ट्रेडिंग का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं जब सदन में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव चल रहा था उसी दौरान दिग्विजय सिंह ने एक और बड़ा आरोप मढ़ दिया कि भाजपा के दो पूर्व मंत्रियों ने कांग्रेस विधायकों को खरीदने के लिए 100 करोड़ रुपए का ऑफर दिया था। इस सियासी दांव- पेच के चलते इन दिनों भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीति काफी गरमा गई है। साथ ही दिग्विजय सिंह के आरोपों में कितना दम है, इसे लेकर अलग अलग तरह की चर्चाएं हैं।

उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश की 230 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें मिली हैं। ऐसे में दोनों ही दल बहुमत से फिसल गए। फिर कांग्रेस ने बसपा,सपा और निर्दलीयों को अपने पक्ष में कर सरकार बना ली। यद्यपि भाजपा भी तोडफ़ोड़ कर सकती थी,लेकिन ऐन समय पर उसने इरादा बदलकर कांग्रेस को मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ कर दिया।

सत्ता के बनते बिगड़ते खेल के बीच दोनों ही दलों को यह चिंता जरूर रही की एक-दूसरे दल के विधायकों की तोडफ़ोड़ हो सकती है। कांग्रेस के दिग्गज नेता इसके लिए बार-बार आरोप लगाते रहे कि भाजपा के कुछ कद्दावर लोग हार्स ट्रेडिंग का काम कर रहे हैं। वे निर्दलीय और कांग्रेस विधायकों को प्रलोभन दे रहे हैं। इस बात को तूल उस वक्त मिल गया जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ली, जिसमें आरोप लगाया कि भाजपा के दो पूर्व मंत्रियों डॉ नरोत्तम मिश्रा एवं विश्वास सारंग ने कांग्रेस के सबलगढ़ से विधायक बैजनाथ कुशवाहा को भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी के जरिए भोपाल से 10 किलोमीटर दूर एक ढाबे पर बुलाकर बैठक की। इसमें कांग्रेस विधायक को ऑफर दिया गया कि वे कुछ और विधायकों को भाजपा में ले आए तो उन्हें 100 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।साथ ही चार्टर प्लेन तैयार है, सरकार बन जाएगी तो जितना विधायक रहते नहीं कमा पाओगे उतना सरकार में आकर कमा लोगे। दिग्गी ने यह भी कहा कि भाजपा के लोग 5 करोड़ ले लो, 10 करोड़ ले लो के प्रलोभन लगातार दे रहे हैं। इसके लिए मैं कई विधायक सामने खड़े कर सकता हूं।इसमें एक और कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल को प्रलोभन देने का नाम भी आया। यद्यपि दिग्विजय सिंह के आरोपों का डॉ. नरोत्तम मिश्रा एवं विश्वास सारंग ने पुरजोर तरीके से खंडन किया है। वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजवर्गीय ने तो यहां तक कहा कि दिग्विजय सिंह को कांग्रेस ने किसी भी मंच पर भाषण देने से रोके रखा,उन्हें चुनाव में कहीं भी आने जाने नहीं दिया गया। उनके आरोप बेबुनियाद हैं।वहीं डॉ नरोत्तम मिश्रा ने भी दिग्विजय सिंह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि उनके पास कांग्रेस विधायक को प्रलोभन देने के सबूत है तो वे पेश करें।वही विश्वास सारंग ने कहा कि यदि हम लोग 100 करोड़ रुपए की डीलिंग करेंगे तो क्या उसके लिए कोई ढाबा चुनेंगे, यदि ऐसा होता तो किसी पांच सितारा होटल में होता। उन्होंने कहा कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है, यह तो राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोप-प्रत्यारोपों के चलते दिग्विजय के आरोपों में कितना दम है और आगे की राजनीति कहां जाएगी, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। उधर दिग्विजय सिंह से जुड़े एक कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगे हैं तो वे मानहानि का दावा कर अपना पक्ष रख सकते हैं।बहरहाल राजधानी भोपाल में इन दिनों भाजपा और कांग्रेस की राजनीति बेहद गरमाई हुई है।

कांग्रेस की चाणक्य नीति सफल !

विधानसभा में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के दोनों पद कांग्रेस ले उड़ी है। इसके पीछे भाजपा द्वारा अध्यक्ष पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित करने का फार्मूला नाकाम माना गया। क्योंकि ऐसा करने से उसका उपाध्यक्ष पद भी चला गया। क्योंकि पहले परंपरा रही है कि सत्ता पक्ष को अध्यक्ष और विपक्ष को उपाध्यक्ष पद दे दिया जाता है,लेकिन भाजपा ने अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी की घोषणा कर नया फार्मूला लाने की कोशिश की। किंतु यह दांव उल्टा पड़ गया। जिससे प्रोटेम स्पीकर ने पहले अध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी और फिर उसके बाद अध्यक्ष बने नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी को विजय दिलाने में मदद कर दी।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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