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क्या निजी हाथों में जाएगी मप्र की बिजली ?

मुख्यमंत्री के समक्ष टाटा पावर के प्रजेंटेशन से बढ़ी आशंका

क्या निजी हाथों में जाएगी मप्र की बिजली ?

विद्युत मंडल अभियंता संघ ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

ग्वालियर, न.सं.। करोड़ों के घाटे में चल रहीं मध्यप्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों के काम को निजी हाथों में सौंपने की एक बार फिर से तैयारी की जा रही है। इसका मुख्य कारण विद्युत वितरण हानि एवं राजस्व वसूली में कमी और कम्पनियों को विभिन्न कारणों से हो रहा नुकसान बताया जा रहा है। इसकी भनक लगते ही म.प्र. विद्युत मंडल अभियंता संघ ने आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि बिजली के क्षेत्र में फें्रचाइजी व्यवस्था प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। अगर बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपी गई तो अभियंता संघ इसका प्रदेश भर में पुरजोर विरोध करेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार म.प्र. की मध्य, पूर्व एवं पश्चिम तीनों बिजली कम्पनियां बड़े घाटे में चल रही हैं। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई बिजली दरों के रूप में चुकाना पड़ रहा है। बीते 17 अगस्त से प्रदेश में बढ़ी हुई बिजली दरें लागू कर दी गई हैं। बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने और नुकसान को रोकने के उद्देश्य से म.प्र. सरकार की पहल पर पिछले दिनों टाटा पावर ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया था। इस दौरान चालू वित्तीय वर्ष में मध्य, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनियों ने करीब 4100 करोड़ रुपए का राजस्व अंतर बताया था। सभी व्यवस्थाओं के लिए तीनों कम्पनियों ने 38 हजार 163 करोड़ रुपए की राजस्व जरूरत बताई थी। प्रजेंटेशन के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया था कि राजस्व को कैसे बढ़ाया जा सकता है? इसके लिए प्रदेश में कौन से मॉडल अनुकूल रहेंगे? प्रजेंटेशन के दौरान अधिकारियों बताया कि दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में बिजली वितरण व्यवस्था निजी क्षेत्र की कम्पनियों को सौंपी गई है।

पूर्व में असफल हो चुकी है फें्रचाइजी व्यवस्था

म.प्र. विद्युत मंडल अभियंता संघ के महासचिव इंजी. व्ही.के. परिहार का कहना है कि प्रदेश की विद्युत वितरण कम्पनियों में फें्रचाइजी व्यवस्था लागू करने के शुरुआती दौर में टाटा पावर द्वारा प्रजेंटेशन दिया गया है, जिससे साफ पता चलता है कि म.प्र. सरकार बिजली आपूर्ति व्यवस्था निजी हाथों को सौंपने की तैयारी कर रही है, जबकि फें्रचाइजी व्यवस्था इससे पहले असफल हो चुकी है। राजधानी भोपाल के करौंद, जहांगीराबाद एवं छोला क्षेत्र के अलावा सागर व उज्जैन में फें्रचाइजी व्यवस्था लागू की गई थी, जो बिजली कम्पनी के पूर्ण सहयोग के बावजूद असफल रही और बिजली कम्पनी को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था।

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